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बुनियादी सहूलियतों से लैस होंगे परिषदीय विद्यालय
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सुल्तानपुर। परिषदीय विद्यालयों को मूलभूत सुविधाओं से संतृप्त कराए जाने के लिए शासन ने काम में तेजी लाने का निर्देश दिया है। मूलभूत अवस्थापना सुविधाओं के लिए 18 बिंदु निर्धारित किए गए हैं। इसके साथ ही 31 मार्च 2022 तक सभी विद्यालयों में बालक-बालिकाओं के लिए अलग-अलग प्रसाधन, विद्यालय परिसर में सबमर्सिबल से जलापूर्ति तथा फर्नीचर व डेस्क-बेंच उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
परिषदीय विद्यालयों में ऑपरेशन कायाकल्प के तहत मूलभूत अवस्थापना सुविधाओं को विकसित कराने का निर्देश शासन ने दिया था। ऑपरेशन कायाकल्प के द्वितीय चरण में लॉकडाउन की वजह से काफी काम अधूरे रह गए हैं।
विद्यालयों में 18 मूलभूत अवस्थापना सुविधाओं को संतृप्त कराए जाने का लक्ष्य दिया गया है। इसमें शुद्घ व सुरक्षित पेयजल, बालक-बालिका के लिए अलग-अलग प्रसाधन, प्रसाधनों में जलापूर्ति, प्रसाधनों में टाइल्स, दिव्यांग सुलभ शौचालय, हैंड वॉशिंग यूनिट, अध्ययन कक्ष की फर्श में टाइल्स, ब्लैक बोर्ड, रसोई घर, विद्यालय की समुचित रंगाई पुताई, दिव्यांगों की सुविधा के लिए सुलभ रैंप व रेलिंग, अध्ययन कक्षों में विद्युत वायरिंग व विद्युत उपकरण, विद्यालयों का विद्युत कनेक्शन शामिल है।
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इसके अतिरिक्त शासन ने चार मूलभूत अवस्थापना सुविधाओं को 31 मार्च 2022 तक संतृप्त कराए जाने का लक्ष्य दिया है। इसमें बालक-बालिका के लिए अलग-अलग यूरिनल की व्यवस्था, विद्यालय परिसर में सबमर्सिबल से जलापूर्ति, फर्नीचर व डेस्क-बेंच की व्यवस्था शामिल है।
ऑपरेशन कायाकल्प के तहत परिषदीय विद्यालयों में 18 मूलभूत अवस्थापना सुविधाओं के संतृप्तीकरण के आधार पर मूल्यांकन कराया जाएगा। मूल्यांकन में प्राप्त स्थिति के अनुसार विद्यालयों की श्रेणी व जिलों की रैंकिंग निर्धारित की जाएगी। कराए गए कार्यों को प्रेरणा पोर्टल पर अपलोड भी कराया जाएगा।
ऑपरेशन कायाकल्प के अंतर्गत ग्राम पंचायत निधियों से परिषदीय विद्यालयों में मूलभूत अवस्थापना सुविधाएं विकसित कराई जानी हैं। अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार ने निर्देशित करते हुए कहा है कि कोविड-19 महामारी की वजह से अन्य प्रदेशों से वापस आए प्रवासी कामगारों को ग्राम स्तर पर ही रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तीव्र गति से काम कराए जाएं।
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परिषदीय विद्यालयों में ऑपरेशन कायाकल्प के तहत मूलभूत अवस्थापना सुविधाओं को विकसित कराने का निर्देश शासन ने दिया था। ऑपरेशन कायाकल्प के द्वितीय चरण में लॉकडाउन की वजह से काफी काम अधूरे रह गए हैं।
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विद्यालयों में 18 मूलभूत अवस्थापना सुविधाओं को संतृप्त कराए जाने का लक्ष्य दिया गया है। इसमें शुद्घ व सुरक्षित पेयजल, बालक-बालिका के लिए अलग-अलग प्रसाधन, प्रसाधनों में जलापूर्ति, प्रसाधनों में टाइल्स, दिव्यांग सुलभ शौचालय, हैंड वॉशिंग यूनिट, अध्ययन कक्ष की फर्श में टाइल्स, ब्लैक बोर्ड, रसोई घर, विद्यालय की समुचित रंगाई पुताई, दिव्यांगों की सुविधा के लिए सुलभ रैंप व रेलिंग, अध्ययन कक्षों में विद्युत वायरिंग व विद्युत उपकरण, विद्यालयों का विद्युत कनेक्शन शामिल है।
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इसके अतिरिक्त शासन ने चार मूलभूत अवस्थापना सुविधाओं को 31 मार्च 2022 तक संतृप्त कराए जाने का लक्ष्य दिया है। इसमें बालक-बालिका के लिए अलग-अलग यूरिनल की व्यवस्था, विद्यालय परिसर में सबमर्सिबल से जलापूर्ति, फर्नीचर व डेस्क-बेंच की व्यवस्था शामिल है।
ऑपरेशन कायाकल्प के तहत परिषदीय विद्यालयों में 18 मूलभूत अवस्थापना सुविधाओं के संतृप्तीकरण के आधार पर मूल्यांकन कराया जाएगा। मूल्यांकन में प्राप्त स्थिति के अनुसार विद्यालयों की श्रेणी व जिलों की रैंकिंग निर्धारित की जाएगी। कराए गए कार्यों को प्रेरणा पोर्टल पर अपलोड भी कराया जाएगा।
ऑपरेशन कायाकल्प के अंतर्गत ग्राम पंचायत निधियों से परिषदीय विद्यालयों में मूलभूत अवस्थापना सुविधाएं विकसित कराई जानी हैं। अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार ने निर्देशित करते हुए कहा है कि कोविड-19 महामारी की वजह से अन्य प्रदेशों से वापस आए प्रवासी कामगारों को ग्राम स्तर पर ही रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तीव्र गति से काम कराए जाएं।