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बच्चों को नहीं लग रही कोरोना की वैक्सीन
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सुल्तानपुर। कोरोना से बचाने के लिए सरकार की ओर से जिले में शुरू किया गया कोरोना रोधी टीकाकरण स्वास्थ्य कर्मियों की मनमानी से बंद हो रहा है। बच्चों को लगने वाली वैक्सीन की खुराक बर्बाद होने का बहाना बताकर दो चार बच्चे प्रतिदिन जिला अस्पताल से बैरंग वापस कर दिए जा रहे हैं।
कोरोना की लहर से 12 से 14 वर्ष के आयु वर्ग के बच्चों को बचाने के लिए सरकार ने पिछले दिनों जिला अस्पताल, जिला महिला अस्पताल से लेकर सीएचसी और पीएचसी तक टीकाकरण अभियान शुरू किया था। इसके तहत बच्चों को कोर्वेवैक्स वैक्सीन लगाई जा रही थी। जिन बच्चों ने कोर्वेवैक्स वैक्सीन की पहली खुराक महिला अस्पताल में लगवाई थी, उन्हें दूसरी खुराक ये कहकर नहीं लगाई गई कि बच्चे कम हैं।
महिला अस्पताल में वैक्सीन लगाने वाले स्वास्थ्य कर्मियों ने कहा कि एक बार स्लाट खोलने के बाद 17 बच्चों को लगाई जाती है। जब तक 17 बच्चे नहीं पहुंचेंगे, स्लाट नहीं खुलेगी। दो से तीन बच्चे अस्पताल में अन्य बच्चों के आने का काफी देर तक इंतजार करते रहे, लेकिन जब संख्या पूरी नहीं हुई तो बिना वैक्सीन लगवाए ही वापस हो गए। दूसरी तरफ स्वास्थ्य विभाग अभिभावकों में जागरूकता की कमी का रोना रो रहा है।
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कम बच्चों के पहुंचने से बर्बाद हो रही वैक्सीन
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. एएन राय ने बताया कि बच्चों की संख्या कम होने से वैक्सीन खुलने के बाद बर्बाद हो जा रही है। स्वास्थ्य कर्मियों को निर्देश दिया जाएगा कि जिन बच्चों को पहली खुराक लगाई गई है, उन्हें तब बुलाएं, जब पर्याप्त बच्चे अस्पताल में उपलब्ध हों।
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कोरोना की लहर से 12 से 14 वर्ष के आयु वर्ग के बच्चों को बचाने के लिए सरकार ने पिछले दिनों जिला अस्पताल, जिला महिला अस्पताल से लेकर सीएचसी और पीएचसी तक टीकाकरण अभियान शुरू किया था। इसके तहत बच्चों को कोर्वेवैक्स वैक्सीन लगाई जा रही थी। जिन बच्चों ने कोर्वेवैक्स वैक्सीन की पहली खुराक महिला अस्पताल में लगवाई थी, उन्हें दूसरी खुराक ये कहकर नहीं लगाई गई कि बच्चे कम हैं।
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महिला अस्पताल में वैक्सीन लगाने वाले स्वास्थ्य कर्मियों ने कहा कि एक बार स्लाट खोलने के बाद 17 बच्चों को लगाई जाती है। जब तक 17 बच्चे नहीं पहुंचेंगे, स्लाट नहीं खुलेगी। दो से तीन बच्चे अस्पताल में अन्य बच्चों के आने का काफी देर तक इंतजार करते रहे, लेकिन जब संख्या पूरी नहीं हुई तो बिना वैक्सीन लगवाए ही वापस हो गए। दूसरी तरफ स्वास्थ्य विभाग अभिभावकों में जागरूकता की कमी का रोना रो रहा है।
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कम बच्चों के पहुंचने से बर्बाद हो रही वैक्सीन
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. एएन राय ने बताया कि बच्चों की संख्या कम होने से वैक्सीन खुलने के बाद बर्बाद हो जा रही है। स्वास्थ्य कर्मियों को निर्देश दिया जाएगा कि जिन बच्चों को पहली खुराक लगाई गई है, उन्हें तब बुलाएं, जब पर्याप्त बच्चे अस्पताल में उपलब्ध हों।