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प्रतिदिन 100 क्विंटल सिंगल यूज प्लास्टिक की खपत
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सुल्तानपुर। जिले में सिंगल यूज प्लास्टिक का बड़ा कारोबार है। प्रतिदिन 100 क्विंटल सिंगल यूज प्लास्टिक की खपत है। सरकार शुक्रवार से इस पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने जा रही है। इसका निर्माण, आयात, निर्यात और बिक्री पूरी तरह गैर कानूनी हो जाएगी। सिंगल यूज प्लास्टिक उत्पाद मिलने पर संबंधित के खिलाफ केस दर्ज कर जुर्माना लगाया जाएगा। प्रतिबंध से प्रतिदिन करीब 10 लाख रुपये का कारोबार प्रभावित होगा।
केंद्र सरकार पर्यावरण संरक्षण की दिशा में पहली जुलाई से सख्त कदम उठाने जा रही है। इसके तहत सिंगल यूज प्लास्टिक की बिक्री को प्रतिबंधित करने के साथ जुुर्माना भी लगाया जाएगा। सिंगल यूज प्लास्टिक (पॉलिथीन समेत) का कारोबार पूरे जिले में फैला है। वर्तमान में शहर के प्रमुख बाजारों, मंडी और ग्रामीण क्षेत्र के अन्य बाजारों में पॉलिथीन की थैलियों में धड़ल्ले से सामान बेचा जाता है।
रेस्टोरेंट, मार्केट, रेहड़ी पटरी तक पर सिंगल यूज प्लास्टिक (प्लेट, कप, गिलास, कटोरी, कांटे, चाकू, चम्मच, थर्मोकोल से बने प्लेट, कप, गिलास, कटोरी, डिश बाउल, ट्रे, गिलास, ढक्कन, खाद्य पदार्थों की पैकिंग के लिए प्लास्टिक बैग, पाउच, प्लास्टिक मिनरल वाटर पाउच, यूज एंड थ्रो रेजर्स) की बड़ी मात्रा में खपत है।
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शहर में चौक, डाकखाना, शाहगंज चौराहा, गल्ला मंडी समेत अन्य स्थानों पर सिंगल यूज प्लास्टिक के सामान बेचे जा रहे हैं।
यहां सिंगल यूज प्लास्टिक के सामान दिल्ली व कानपुर से मंगाए जाते हैं। पॉलिथीन कारोबार से जुड़े एक व्यापारी ने बताया कि पॉलिथीन की बिक्री वजन के हिसाब से होती है। इस समय करीब 50 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से पॉलिथीन खरीदी जाती है। पहली जुलाई से इस पर प्रतिबंध लगने से सिर्फ पॉलिथीन का रोज करीब पांच लाख रुपये का कारोबार प्रभावित होगा। वहीं, सिंगल यूज प्लास्टिक के अन्य उत्पाद को भी इसमें शामिल कर दिया जाए तो यह आंकड़ा करीब 10 लाख रुपये को पार कर जाएगा।
सिंगल यूज प्लास्टिक के बने ईयर बड्स, बैलून स्टिक, झंडे, लॉलीपॉप की स्टिक, आइसक्रीम की स्टिक, प्लेट, कप, गिलास, कांटे, चम्मच, चाकू, स्ट्रॉ, ट्रे सहित मिठाई के डिब्बे पर लगने वाली पन्नी, निमंत्रण पत्र, सिगरेट पैकेट, थर्मोकॉल का सजावटी सामान, पीवीसी बैनर व 75 माइक्रॉन तक के पॉलिथीन पर यह प्रतिबंध लागू होगा।
जिले में अभी भी 50 माइक्रॉन से कम की पॉलिथीन व प्लास्टिक कोटेड आइटम की बिक्री पूरी तरह से प्रतिबंधित नहीं की जा सकी है। शहर व ग्रामीण क्षेत्र में पॉलिथीन में सामान का अभी भी लेन-देन किया जा रहा है।
पॉलिथीन का इस्तेमाल न सिर्फ पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है बल्कि गंभीर रोगों को न्योता भी दे रहा है। इससे नालियां जाम हो जाती हैं। नालियां चोक होने से पानी सड़क पर बहकर गंभीर बीमारियों का कारण बनता है। भूमि की उर्वरा शक्ति खत्म हो जाती है। इसका प्रयोग सांस, त्वचा और कैंसर जैसे रोगों को जन्म देता है। इसे जलाने पर निकलने वाला धुआं ओजोन परत को नुकसान पहुंचाता है।
सिंगल यूज प्लास्टिक की बिक्री पर पहली बार पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत पांच साल का कारावास व एक लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। दोबारा उल्लंघन करने पर सात साल का कारावास हो सकता है।
सिंगल यूज प्लास्टिक की बिक्री पर रोक लगाने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे। पहले भी समय-समय पर पॉलिथीन की बिक्री पर रोक लगाने के लिए चेकिंग अभियान चलाया जाता रहा है। अभियान में पुलिस व प्रशासन की मदद ली जाएगी।
-श्यामेंद्र मोहन, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका
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केंद्र सरकार पर्यावरण संरक्षण की दिशा में पहली जुलाई से सख्त कदम उठाने जा रही है। इसके तहत सिंगल यूज प्लास्टिक की बिक्री को प्रतिबंधित करने के साथ जुुर्माना भी लगाया जाएगा। सिंगल यूज प्लास्टिक (पॉलिथीन समेत) का कारोबार पूरे जिले में फैला है। वर्तमान में शहर के प्रमुख बाजारों, मंडी और ग्रामीण क्षेत्र के अन्य बाजारों में पॉलिथीन की थैलियों में धड़ल्ले से सामान बेचा जाता है।
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रेस्टोरेंट, मार्केट, रेहड़ी पटरी तक पर सिंगल यूज प्लास्टिक (प्लेट, कप, गिलास, कटोरी, कांटे, चाकू, चम्मच, थर्मोकोल से बने प्लेट, कप, गिलास, कटोरी, डिश बाउल, ट्रे, गिलास, ढक्कन, खाद्य पदार्थों की पैकिंग के लिए प्लास्टिक बैग, पाउच, प्लास्टिक मिनरल वाटर पाउच, यूज एंड थ्रो रेजर्स) की बड़ी मात्रा में खपत है।
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शहर में चौक, डाकखाना, शाहगंज चौराहा, गल्ला मंडी समेत अन्य स्थानों पर सिंगल यूज प्लास्टिक के सामान बेचे जा रहे हैं।
यहां सिंगल यूज प्लास्टिक के सामान दिल्ली व कानपुर से मंगाए जाते हैं। पॉलिथीन कारोबार से जुड़े एक व्यापारी ने बताया कि पॉलिथीन की बिक्री वजन के हिसाब से होती है। इस समय करीब 50 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से पॉलिथीन खरीदी जाती है। पहली जुलाई से इस पर प्रतिबंध लगने से सिर्फ पॉलिथीन का रोज करीब पांच लाख रुपये का कारोबार प्रभावित होगा। वहीं, सिंगल यूज प्लास्टिक के अन्य उत्पाद को भी इसमें शामिल कर दिया जाए तो यह आंकड़ा करीब 10 लाख रुपये को पार कर जाएगा।
सिंगल यूज प्लास्टिक के बने ईयर बड्स, बैलून स्टिक, झंडे, लॉलीपॉप की स्टिक, आइसक्रीम की स्टिक, प्लेट, कप, गिलास, कांटे, चम्मच, चाकू, स्ट्रॉ, ट्रे सहित मिठाई के डिब्बे पर लगने वाली पन्नी, निमंत्रण पत्र, सिगरेट पैकेट, थर्मोकॉल का सजावटी सामान, पीवीसी बैनर व 75 माइक्रॉन तक के पॉलिथीन पर यह प्रतिबंध लागू होगा।
जिले में अभी भी 50 माइक्रॉन से कम की पॉलिथीन व प्लास्टिक कोटेड आइटम की बिक्री पूरी तरह से प्रतिबंधित नहीं की जा सकी है। शहर व ग्रामीण क्षेत्र में पॉलिथीन में सामान का अभी भी लेन-देन किया जा रहा है।
पॉलिथीन का इस्तेमाल न सिर्फ पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है बल्कि गंभीर रोगों को न्योता भी दे रहा है। इससे नालियां जाम हो जाती हैं। नालियां चोक होने से पानी सड़क पर बहकर गंभीर बीमारियों का कारण बनता है। भूमि की उर्वरा शक्ति खत्म हो जाती है। इसका प्रयोग सांस, त्वचा और कैंसर जैसे रोगों को जन्म देता है। इसे जलाने पर निकलने वाला धुआं ओजोन परत को नुकसान पहुंचाता है।
सिंगल यूज प्लास्टिक की बिक्री पर पहली बार पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत पांच साल का कारावास व एक लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। दोबारा उल्लंघन करने पर सात साल का कारावास हो सकता है।
सिंगल यूज प्लास्टिक की बिक्री पर रोक लगाने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे। पहले भी समय-समय पर पॉलिथीन की बिक्री पर रोक लगाने के लिए चेकिंग अभियान चलाया जाता रहा है। अभियान में पुलिस व प्रशासन की मदद ली जाएगी।
-श्यामेंद्र मोहन, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका