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Sultanpur News: आयोग ने बैंक को दिया 33.33 लाख रुपये लौटाने का आदेश
Wed, 12 Feb 2025 12:31 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Wed, 12 Feb 2025 12:31 AM IST
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सुल्तानपुर। कोतवाली नगर के गोलाघाट स्थित एग्रो ऑटो मोबाइल्स के पार्टनर मनोज कुमार ने तीन नवंबर 2022 को बैंक ऑफ बड़ौदा के खिलाफ जिला उपभोक्ता आयोग में परिवाद दायर किया था। मनोज ने अपने व्यवसाय कार्य के लिए बैंक ऑफ बड़ौदा की बस स्टेशन शाखा में दो ओवर ड्राफ्ट खाता खोलवाया था। परिवादी के खाते से 28 जून 2022 को 37,34,000 रुपये कविता, दीक्षांत कुमार व अजीजुर रहमान के खाते में अवैध ढ़ंग से ट्रांसफर कर दिए गए थे।
शिकायत मनोज ने बैंक में की और कोतवाली नगर में धोखाधड़ी का केस दर्ज कराया था। बाद में बैंक ने आरोपी से रिकवरी कर 3,91,751 रुपये परिवादी के खाते में वापस जमा कर दिया था, जबकि 33,33,249 रुपये बकाया है। बैंक ने जबाव में कहा कि परिवादी के खाते का व्यवसायिक प्रयोग किया जाता है। वह उपभोक्ता की श्रेणी में नहीं आता है। इस मामले की सुनवाई का क्षेत्राधिकार आयोग को नहीं है। हालांकि, आयोग ने बैंक के इस तर्क को खारिज कर दिया।
जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष रामलखन सिंह चंद्रौल व सदस्य भारत भूषण तिवारी ने परिवादी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए बैंक को ग्राहक की सेवा में कमी करने का जिम्मेदार माना है। आयोग ने बैंक को आदेश दिया है कि दो माह में अवैध ढंग से निकाली गई 33,33,249 रुपये का भुगतान परिवादी को करें। शारीरिक व मानसिक कष्ट के लिए तीन हजार रुपये और वाद व्यय के लिए दो हजार रुपये भी परिवादी को अदा करें।
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शिकायत मनोज ने बैंक में की और कोतवाली नगर में धोखाधड़ी का केस दर्ज कराया था। बाद में बैंक ने आरोपी से रिकवरी कर 3,91,751 रुपये परिवादी के खाते में वापस जमा कर दिया था, जबकि 33,33,249 रुपये बकाया है। बैंक ने जबाव में कहा कि परिवादी के खाते का व्यवसायिक प्रयोग किया जाता है। वह उपभोक्ता की श्रेणी में नहीं आता है। इस मामले की सुनवाई का क्षेत्राधिकार आयोग को नहीं है। हालांकि, आयोग ने बैंक के इस तर्क को खारिज कर दिया।
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जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष रामलखन सिंह चंद्रौल व सदस्य भारत भूषण तिवारी ने परिवादी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए बैंक को ग्राहक की सेवा में कमी करने का जिम्मेदार माना है। आयोग ने बैंक को आदेश दिया है कि दो माह में अवैध ढंग से निकाली गई 33,33,249 रुपये का भुगतान परिवादी को करें। शारीरिक व मानसिक कष्ट के लिए तीन हजार रुपये और वाद व्यय के लिए दो हजार रुपये भी परिवादी को अदा करें।
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