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प्लेटफार्मों पर कोच गाइडेंस डिस्पले नदारद, बढ़ी रेलयात्रियों की परेशानी
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सुल्तानपुर। स्थानीय जंक्शन के प्लेटफॉर्मों पर कोच गाइडेंस डिस्पले नदारद हैं। कोविड-19 स्पेशल ट्रेनों का संचालन सामान्य रूप से प्लेटफार्म नंबर एक-दो व तीन से ही किया जा रहा है।
तीनों प्लेटफार्म पर एक भी कोच गाइडेंस डिस्पले नहीं लगा है। ऐसे में प्रमुख ट्रेनों के पहुंचने के बाद यात्रियों को अपने कोच व बर्थ खोजने में मशक्कत करनी पड़ती है। पिछले वर्ष प्लेटफार्म एक पर लगे 13 कोच गाइडेंस डिस्पले का भी अब अता-पता नहीं है। यात्रियों की शिकायतों के बाद भी रेल महकमे के अधिकारी इस समस्या का निस्तारण नहीं करा रहे हैं।
स्थानीय रेलवे स्टेशन को ए श्रेणी के मॉडल स्टेशनों में शामिल किया गया है। यहां पर चार प्लेटफार्म हैं। लॉक डाउन खत्म होने के बाद से स्थानीय स्टेशन से प्रतिदिन करीब पांच जोड़ी कोविड-19 स्पेशल ट्रेनों की आवाजाही शुरू की गई है। इनमें से लखनऊ-वाराणसी व प्रयागराज-अयोध्या रूट की कोविड-19 स्पेशल ट्रेनों का संचालन प्लेटफार्म एक, दो व तीन से ही किया जा रहा है।
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स्थानीय रेलवे स्टेशन से करीब 1,500 यात्री प्रतिदिन आवाजाही करते हैं। कोविड-19 स्पेशल ट्रेन के रूप में चलाई जाने वाली श्रमजीवी, सुहेलदेव, महामना, बेगमपुरा, फरक्का स्पेशल एक्सप्रेस समेत अन्य प्रमुख ट्रेनों का ठहराव स्थानीय स्टेशन पर होता है।
स्टेशन पर प्रमुख ट्रेनों के ठहराव के समय स्लीपर व एसी कोच में बैठने के लिए यात्रियों को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। रेलवे के अधिकारियों के अनुसार प्लेटफार्म पर 26 कोच के हिसाब से 26 कोच गाइडेंस डिस्पले लगाए जाने चाहिए।
पिछले साल तक प्लेटफार्म एक पर 13 कोच गाइडेंस डिस्पले काम कर रहे थे। इस समय इन कोच गाइडेेंस डिस्पले का भी अता-पता नहीं है। ट्रेनों की लाइव लोकेशन के लिए लगा एलईडी डिस्पले भी बंद पड़ा रहा है। प्लेटफार्म नंबर दो व तीन पर एक भी कोच गाइडेंस डिस्पले नहीं लगाया गया है।
ऐसी स्थिति में तीनों प्लेटफार्म पर प्रमुख ट्रेनों के ठहराव के समय यात्रियों को अपनी आरक्षित सीट तक पहुंचने में कोच खोजने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है। कई यात्रियों ने बताया कि कोच खोजने में उनका समय नष्ट होता है। कम समय के ठहराव वाली ट्रेनों में कोच पर चढने के लिए काफी मुश्किलें झेलनी पड़ती हैं।
पिछले दिनों सांसद मेनका गांधी ने डीआरएम को कोच गाइडेंस डिस्पले समेत अन्य समस्याओं के निस्तारण के लिए पत्र भी लिखा था। फिर भी अभी तक इस संबंध में कोई कदम रेल महकमे की ओर से नहीं उठाया गया है।
इस संबंध में स्टेशन मास्टर एसएस मीना ने बताया कि कोच गाइडेंस डिस्पले के संचालन की समस्या के संबंध में उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। अभी रेलवे मंडल कार्यालय से इस विषय में कोई पत्र नहीं प्राप्त हुआ है। उम्मीद है कि जल्द ही इस पर कार्य शुरू करवाया जाएगा।
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तीनों प्लेटफार्म पर एक भी कोच गाइडेंस डिस्पले नहीं लगा है। ऐसे में प्रमुख ट्रेनों के पहुंचने के बाद यात्रियों को अपने कोच व बर्थ खोजने में मशक्कत करनी पड़ती है। पिछले वर्ष प्लेटफार्म एक पर लगे 13 कोच गाइडेंस डिस्पले का भी अब अता-पता नहीं है। यात्रियों की शिकायतों के बाद भी रेल महकमे के अधिकारी इस समस्या का निस्तारण नहीं करा रहे हैं।
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स्थानीय रेलवे स्टेशन को ए श्रेणी के मॉडल स्टेशनों में शामिल किया गया है। यहां पर चार प्लेटफार्म हैं। लॉक डाउन खत्म होने के बाद से स्थानीय स्टेशन से प्रतिदिन करीब पांच जोड़ी कोविड-19 स्पेशल ट्रेनों की आवाजाही शुरू की गई है। इनमें से लखनऊ-वाराणसी व प्रयागराज-अयोध्या रूट की कोविड-19 स्पेशल ट्रेनों का संचालन प्लेटफार्म एक, दो व तीन से ही किया जा रहा है।
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स्थानीय रेलवे स्टेशन से करीब 1,500 यात्री प्रतिदिन आवाजाही करते हैं। कोविड-19 स्पेशल ट्रेन के रूप में चलाई जाने वाली श्रमजीवी, सुहेलदेव, महामना, बेगमपुरा, फरक्का स्पेशल एक्सप्रेस समेत अन्य प्रमुख ट्रेनों का ठहराव स्थानीय स्टेशन पर होता है।
स्टेशन पर प्रमुख ट्रेनों के ठहराव के समय स्लीपर व एसी कोच में बैठने के लिए यात्रियों को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। रेलवे के अधिकारियों के अनुसार प्लेटफार्म पर 26 कोच के हिसाब से 26 कोच गाइडेंस डिस्पले लगाए जाने चाहिए।
पिछले साल तक प्लेटफार्म एक पर 13 कोच गाइडेंस डिस्पले काम कर रहे थे। इस समय इन कोच गाइडेेंस डिस्पले का भी अता-पता नहीं है। ट्रेनों की लाइव लोकेशन के लिए लगा एलईडी डिस्पले भी बंद पड़ा रहा है। प्लेटफार्म नंबर दो व तीन पर एक भी कोच गाइडेंस डिस्पले नहीं लगाया गया है।
ऐसी स्थिति में तीनों प्लेटफार्म पर प्रमुख ट्रेनों के ठहराव के समय यात्रियों को अपनी आरक्षित सीट तक पहुंचने में कोच खोजने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है। कई यात्रियों ने बताया कि कोच खोजने में उनका समय नष्ट होता है। कम समय के ठहराव वाली ट्रेनों में कोच पर चढने के लिए काफी मुश्किलें झेलनी पड़ती हैं।
पिछले दिनों सांसद मेनका गांधी ने डीआरएम को कोच गाइडेंस डिस्पले समेत अन्य समस्याओं के निस्तारण के लिए पत्र भी लिखा था। फिर भी अभी तक इस संबंध में कोई कदम रेल महकमे की ओर से नहीं उठाया गया है।
इस संबंध में स्टेशन मास्टर एसएस मीना ने बताया कि कोच गाइडेंस डिस्पले के संचालन की समस्या के संबंध में उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। अभी रेलवे मंडल कार्यालय से इस विषय में कोई पत्र नहीं प्राप्त हुआ है। उम्मीद है कि जल्द ही इस पर कार्य शुरू करवाया जाएगा।