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किसी बच्चे के सिर से उठा पिता का साया, कोई मां के आंचल से महरूम
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सुल्तानपुर। कोरोना ने किसी बच्चे के सिर से पिता का साया छीन लिया तो कोई मां के आंचल से महरूम हो गया। कोरोना का शिकार हुए पिता के बाद बच्चों की जिम्मेदारियों का पहाड़ सरीखा बोझ मां के ऊपर आ गया है।
बच्चों के सिर से बाप का साया उठने के बाद मां के सामने अब दोहरी भूमिका आ पड़ी है। कोई आय का स्रोत न होने से मां के समक्ष बच्चों के भरण-पोषण व शिक्षा की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है।
हालांकि सरकार ने सिंगल पेरेंट व जिन बच्चों के सिर से मां-बाप दोनों का साया उठ गया है, उनकी सूचना प्रशासन से मांगी है। फिलहाल अब तक ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है जिस बच्चे के माता-पिता दोनों कोरोना का शिकार हो गए हों। वहीं, सिंगल पेरेंटिंग के कई केस हैं।
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इकलौते बेटे को सिर्फ रोजगार विहीन मां का सहारा
रामगंज के निकट स्थित जमुवावां पश्चिम गांव निवासी सुनील कुमार सिंह एक प्राइवेट विद्यालय में गणित के शिक्षक थे। कोरोना की वजह से 30 अप्रैल को उनका निधन हो गया। सुनील की मौत के बाद इकलौते बेटे कुंवर दीपेंद्र सिंह के पालन-पोषण व पढ़ाई लिखाई की जिम्मेदारी सुनील की पत्नी प्रियंका सिंह पर आ पड़ी है। घर के देहरी न लांघने वाली प्रियंका को अब मां और बाप दोनों की जिम्मेदारी निभानी होगी। प्रियंका कहती हैं कि भगवान ने मेरे ऊपर दुखों का पहाड़ लाद दिया है। बेटा कक्षा नौ में अध्ययनरत है। उसकी पढ़ाई और भविष्य को लेकर चिंता है।
आ गई चार बच्चों की जिम्मेदारी
दूबेपुर ब्लॉक के उच्च प्राथमिक विद्यालय उतुरी में कार्यरत सहायक अध्यापक सुरेश चंद्र त्रिपाठी की कोरोना संक्रमण से चुनाव ड्यूटी के दौरान मौत हो गई थी। उनकी मौत से पत्नी पूनम त्रिपाठी के ऊपर तीन बेटियों और एक बेटे की पढ़ाई-लिखाई के साथ भरण-पोषण की जिम्मेदारी आ गई है।
बेटी प्रियंका बीएससी फाइनल ईयर में है। दूसरी बेटी सुप्रिया इंटरमीडिएट में, तीसरी बेटी शुभी त्रिपाठी कक्षा नौ में अध्ययनरत है। सबसे छोटा बेटा अंजनी त्रिपाठी कक्षा सात में पढ़ रहा है।
सुरेश चंद्र तिवारी की नौकरी ही एकमात्र आय का साधन थी। मृत्यु के बाद परिवार के समक्ष आर्थिक दिक्कतें भी आ खड़ी हुई हैं। अभी तक पीड़ित परिवार को विभाग अथवा सरकार से कोई आर्थिक मदद भी नहीं मिल पाई है।
बच्चो को दिलाएंगे अच्छी शिक्षा
बल्दीराय विकास खंड क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय जोधी में कार्यरत शैलेंद्र यादव की सेवा दो साल पहले शुरू हुई थी। पंचायत चुनाव ड्यूटी के दौरान शैलेंद्र संक्रमित हो गए थे। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
पत्नी कृष्ण कुमारी के सामने अब तीन बेटियों और एक बेटे की पढ़ाई और लालन-पालन की जिम्मेदारी का बोझ आ गया है। वे कहती हैं कि जितना संघर्ष हो सकेगा, उतना किया जाएगा लेकिन बच्चों की पढ़ाई और पालन-पोषण में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।
15 की आई सूचना
जिला प्रोबेशन अधिकारी अशोक कुमार ने बताया कि सिंगल पेरेंट्स व जिन बच्चों के माता व पिता दोनों कोरोना की वजह से मर गए हैं उनकी सूचना मांगी गई है। अभी तक 15 सिंगल पेरेंट्स की सूचना आई है। इसे सत्यापित कराकर शासन को भेजा जाएगा।
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बच्चों के सिर से बाप का साया उठने के बाद मां के सामने अब दोहरी भूमिका आ पड़ी है। कोई आय का स्रोत न होने से मां के समक्ष बच्चों के भरण-पोषण व शिक्षा की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है।
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हालांकि सरकार ने सिंगल पेरेंट व जिन बच्चों के सिर से मां-बाप दोनों का साया उठ गया है, उनकी सूचना प्रशासन से मांगी है। फिलहाल अब तक ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है जिस बच्चे के माता-पिता दोनों कोरोना का शिकार हो गए हों। वहीं, सिंगल पेरेंटिंग के कई केस हैं।
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इकलौते बेटे को सिर्फ रोजगार विहीन मां का सहारा
रामगंज के निकट स्थित जमुवावां पश्चिम गांव निवासी सुनील कुमार सिंह एक प्राइवेट विद्यालय में गणित के शिक्षक थे। कोरोना की वजह से 30 अप्रैल को उनका निधन हो गया। सुनील की मौत के बाद इकलौते बेटे कुंवर दीपेंद्र सिंह के पालन-पोषण व पढ़ाई लिखाई की जिम्मेदारी सुनील की पत्नी प्रियंका सिंह पर आ पड़ी है। घर के देहरी न लांघने वाली प्रियंका को अब मां और बाप दोनों की जिम्मेदारी निभानी होगी। प्रियंका कहती हैं कि भगवान ने मेरे ऊपर दुखों का पहाड़ लाद दिया है। बेटा कक्षा नौ में अध्ययनरत है। उसकी पढ़ाई और भविष्य को लेकर चिंता है।
आ गई चार बच्चों की जिम्मेदारी
दूबेपुर ब्लॉक के उच्च प्राथमिक विद्यालय उतुरी में कार्यरत सहायक अध्यापक सुरेश चंद्र त्रिपाठी की कोरोना संक्रमण से चुनाव ड्यूटी के दौरान मौत हो गई थी। उनकी मौत से पत्नी पूनम त्रिपाठी के ऊपर तीन बेटियों और एक बेटे की पढ़ाई-लिखाई के साथ भरण-पोषण की जिम्मेदारी आ गई है।
बेटी प्रियंका बीएससी फाइनल ईयर में है। दूसरी बेटी सुप्रिया इंटरमीडिएट में, तीसरी बेटी शुभी त्रिपाठी कक्षा नौ में अध्ययनरत है। सबसे छोटा बेटा अंजनी त्रिपाठी कक्षा सात में पढ़ रहा है।
सुरेश चंद्र तिवारी की नौकरी ही एकमात्र आय का साधन थी। मृत्यु के बाद परिवार के समक्ष आर्थिक दिक्कतें भी आ खड़ी हुई हैं। अभी तक पीड़ित परिवार को विभाग अथवा सरकार से कोई आर्थिक मदद भी नहीं मिल पाई है।
बच्चो को दिलाएंगे अच्छी शिक्षा
बल्दीराय विकास खंड क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय जोधी में कार्यरत शैलेंद्र यादव की सेवा दो साल पहले शुरू हुई थी। पंचायत चुनाव ड्यूटी के दौरान शैलेंद्र संक्रमित हो गए थे। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
पत्नी कृष्ण कुमारी के सामने अब तीन बेटियों और एक बेटे की पढ़ाई और लालन-पालन की जिम्मेदारी का बोझ आ गया है। वे कहती हैं कि जितना संघर्ष हो सकेगा, उतना किया जाएगा लेकिन बच्चों की पढ़ाई और पालन-पोषण में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।
15 की आई सूचना
जिला प्रोबेशन अधिकारी अशोक कुमार ने बताया कि सिंगल पेरेंट्स व जिन बच्चों के माता व पिता दोनों कोरोना की वजह से मर गए हैं उनकी सूचना मांगी गई है। अभी तक 15 सिंगल पेरेंट्स की सूचना आई है। इसे सत्यापित कराकर शासन को भेजा जाएगा।