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बैंकों ने नहीं बदले पुराने नोट
अमर उजाला ब्यूरो/सुल्तानपुर
Updated Thu, 17 Nov 2016 01:15 AM IST
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सुल्तानपुर के एसबीआई में पैसा निकालने के लिए जमा भीड़।
- फोटो : अमर उजाला
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500-1000 के नोटों के बंद होने के बाद शुरू हुई दुश्वारी कम होने का नाम नहीं ले रही है। मांग के सापेक्ष कैश नहीं मिलने से अधिकतर बैंक ग्राहकों को नए रुपये नहीं मुहैया करा पा रहे हैं। नए नोटों की कमी का संकट बुधवार को भी बैंक शाखाओं में रहा। भीड़ का दबाव अधिक होने से कई बैंकों पर पुराने रुपये बदलने का काम नहीं किया गया।
शहर और ग्रामीण क्षेत्र की बैंक शाखाओं पर बैंक कर्मियों व ग्राहकों के बीच नोट बदलने को लेकर कहासुनी भी हुई। 500-1000 के पुराने नोट बंद होने के बाद से जिले की 196 शाखाओं पर कैश की कमी बरकरार है। बैंक अधिकारियों का कहना है कि जो शाखाओं के खाताधारक हैं, उनका कार्य नहीं हो पा रहा था।
करेंसी चेंज करने वालों की लंबी कतार से खाताधारकों को जमा व निकासी करने में असुविधा हो रही थी। ऐसे में सीमित लोड मिलने पर सिर्फ खाताधारकों के धन की जमा-निकासी का कार्य किया जा रहा है। एसबीआई, इलाहाबाद बैंक, विजया समेत अन्य कई शाखाओं पर देर में कैश पहुंचने से खाताधारकों को सिर्फं 4,000 रुपये का नगद भुगतान किया गया।
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धनपतगंज में सरकार की ओर से 500 व 1000 रुपये के नोटों की बंदी के बाद ग्रामीण अंचल की बैंक शाखाओं पर दलालों की सक्रियता बढ़ गई है। दलालों के सहारे बैकों से लेन-देन में ग्राहकों को कुछ ही मिनटों में सुविधा मिल जा रही है। वहीं पुराने नोटों को जमा करने और नए नोटों की निकासी में आम ग्राहकों को ठंड में पसीने छूट रहे हैं।
ग्रामीण अंचल में शासनादेश के बावजूद निशक्तों, बुजुर्गों और महिलाओं को सुविधा नहीं मिल पा रही है। स्थानीय विकास क्षेत्र के हरौरा, धनपतगंज, शंकरगढ़, देहली बाजार समेत अन्य बाजारों में संबंधित बैंक की शाखाओं पर 500-1000 के नोटों के बदलने और खाते से पैसा निकालने को लेकर लोगों की परेशानी बढ़ गई है।
नए नोटों की कमी के साथ बैकों की गैर जिम्मेदाराना कार्यशैली और दलालों की बढ़ी सक्रियता को ग्रामीण एक बड़ी वजह मान रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि बैंकों से जुड़े दलाल बड़े कारोबारियों और सेठ साहूकारों से तयशुदा रकम लेकर बैंककर्मियों की सांठगांठ से आसानी से पैसा निकाल ले रहे हैं।
वहीं, आम ग्राहकों को बैंक में जमा-निकासी के लिए घंटों कतार में खड़े होकर इंतजार करना पड़ रहा है। कभी-कभी स्थिति यह हो जाती है कि कांउटर पर पहुंचते ही रुपया खत्म हो जाता है। बैंक शाखाओं से निराश ग्राहकों को एटीएम पर भी राहत मिलती नहीं दिख रही है।
बुधवार को भी सीमित शाखाओं पर कैश रहा। कुछ स्थानों पर बंद एटीएम के आगे लोग सुबह से ही कतार लगाकर खड़े हो गए थे। एसबीआई, बैंक ऑफ बड़ौदा, एचडीएफसी की शाखाओं पर मंगलवार को कैश खत्म होने के बाद रविवार को लोडवैन आने के इंतजार में सुबह से ही लाइन लगी रही।
लाइन में खड़े लोगों ने बताया कि अब फुटकर न मिलने से खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। बैंक में कतार लगाने के बाद भी पैसा नहीं मिलता है। डाकघर की 40 व क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक 80 शाखाओं में अधिकांश पर बुधवार को कैश नहीं डाला गया। डाक अधीक्षक एसएन दूबे ने बताया कि जो कैश चेस्ट मिल रहा है उससे प्रधान डाकघर पर ही भुगतान व नोट बदलने का कार्य पूर्ण नहीं हो पा रहा है।
ऐसे में उपडाकघरों की शाखा पर पेमेंट नहीं भेजा जा सका है। लीड बैंक मैनेजर एसपी श्रीवास्तव ने बताया कि बैंकों के कैश चेस्ट न पहुंच पाने से बुधवार को भी कई शाखाओं का कार्य प्रभावित रहा। अभी नई नोटों की पर्याप्त खेप नहीं आ सकी है। इस वजह से ग्राहकों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
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शहर और ग्रामीण क्षेत्र की बैंक शाखाओं पर बैंक कर्मियों व ग्राहकों के बीच नोट बदलने को लेकर कहासुनी भी हुई। 500-1000 के पुराने नोट बंद होने के बाद से जिले की 196 शाखाओं पर कैश की कमी बरकरार है। बैंक अधिकारियों का कहना है कि जो शाखाओं के खाताधारक हैं, उनका कार्य नहीं हो पा रहा था।
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करेंसी चेंज करने वालों की लंबी कतार से खाताधारकों को जमा व निकासी करने में असुविधा हो रही थी। ऐसे में सीमित लोड मिलने पर सिर्फ खाताधारकों के धन की जमा-निकासी का कार्य किया जा रहा है। एसबीआई, इलाहाबाद बैंक, विजया समेत अन्य कई शाखाओं पर देर में कैश पहुंचने से खाताधारकों को सिर्फं 4,000 रुपये का नगद भुगतान किया गया।
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धनपतगंज में सरकार की ओर से 500 व 1000 रुपये के नोटों की बंदी के बाद ग्रामीण अंचल की बैंक शाखाओं पर दलालों की सक्रियता बढ़ गई है। दलालों के सहारे बैकों से लेन-देन में ग्राहकों को कुछ ही मिनटों में सुविधा मिल जा रही है। वहीं पुराने नोटों को जमा करने और नए नोटों की निकासी में आम ग्राहकों को ठंड में पसीने छूट रहे हैं।
ग्रामीण अंचल में शासनादेश के बावजूद निशक्तों, बुजुर्गों और महिलाओं को सुविधा नहीं मिल पा रही है। स्थानीय विकास क्षेत्र के हरौरा, धनपतगंज, शंकरगढ़, देहली बाजार समेत अन्य बाजारों में संबंधित बैंक की शाखाओं पर 500-1000 के नोटों के बदलने और खाते से पैसा निकालने को लेकर लोगों की परेशानी बढ़ गई है।
नए नोटों की कमी के साथ बैकों की गैर जिम्मेदाराना कार्यशैली और दलालों की बढ़ी सक्रियता को ग्रामीण एक बड़ी वजह मान रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि बैंकों से जुड़े दलाल बड़े कारोबारियों और सेठ साहूकारों से तयशुदा रकम लेकर बैंककर्मियों की सांठगांठ से आसानी से पैसा निकाल ले रहे हैं।
वहीं, आम ग्राहकों को बैंक में जमा-निकासी के लिए घंटों कतार में खड़े होकर इंतजार करना पड़ रहा है। कभी-कभी स्थिति यह हो जाती है कि कांउटर पर पहुंचते ही रुपया खत्म हो जाता है। बैंक शाखाओं से निराश ग्राहकों को एटीएम पर भी राहत मिलती नहीं दिख रही है।
बुधवार को भी सीमित शाखाओं पर कैश रहा। कुछ स्थानों पर बंद एटीएम के आगे लोग सुबह से ही कतार लगाकर खड़े हो गए थे। एसबीआई, बैंक ऑफ बड़ौदा, एचडीएफसी की शाखाओं पर मंगलवार को कैश खत्म होने के बाद रविवार को लोडवैन आने के इंतजार में सुबह से ही लाइन लगी रही।
लाइन में खड़े लोगों ने बताया कि अब फुटकर न मिलने से खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। बैंक में कतार लगाने के बाद भी पैसा नहीं मिलता है। डाकघर की 40 व क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक 80 शाखाओं में अधिकांश पर बुधवार को कैश नहीं डाला गया। डाक अधीक्षक एसएन दूबे ने बताया कि जो कैश चेस्ट मिल रहा है उससे प्रधान डाकघर पर ही भुगतान व नोट बदलने का कार्य पूर्ण नहीं हो पा रहा है।
ऐसे में उपडाकघरों की शाखा पर पेमेंट नहीं भेजा जा सका है। लीड बैंक मैनेजर एसपी श्रीवास्तव ने बताया कि बैंकों के कैश चेस्ट न पहुंच पाने से बुधवार को भी कई शाखाओं का कार्य प्रभावित रहा। अभी नई नोटों की पर्याप्त खेप नहीं आ सकी है। इस वजह से ग्राहकों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।