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किसानों की आमदनी का जरिया बनी केले की खेती
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विंदेश्वरीगंज के देवरा गांव में तैयार हो रही केले की फसल।
- फोटो : SULTANPUR
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सुल्तानपुर। सेहत के लिए फायदेमंद केला अब किसानों की माली हालत सुधारने में मददगार साबित हो रहा है। किसानों को केले की खेती खूब भा रही है। केले की खेती से किसानों को अच्छा फायदा हो रहा है।
जिले के किसान प्रमुख रूप से धान, गेहूं व गन्ना की खेती करते हैं। कुछ सालों से किसानों को परंपरागत खेती से अपेक्षित फायदा नहीं हो रहा है। गेहूं और धान की फसलों में लागत ज्यादा लग रही है और उपज का दाम कम मिल रहा है। गन्ने की फसलों का भी यही हाल है। गन्ना मूल्य का समय से भुगतान नहीं हो पाता है। इसके चलते किसानों का इन फसलों से मोहभंग हो रहा है। ऐसे हालात में किसान दूसरे विकल्प तलाश रहे थे। ऐसे ही विकल्पों में केले की खेती भी है। किसानों को केले की खेती से काफी फायदा हो रहा है। जिले में भदैंया, लंभुआ, बल्दीराय, मोतिगरपुर, धनपतगंज, दूबेपुर समेत कई ब्लॉकों के किसान केले की खेती कर रहे हैं।
धनपतगंज क्षेत्र के सेवरा गांव के किसान चंद्रशेखर उपाध्याय कई साल से केले की खेती कर रहे हैं। उनका कहना है इसको बेचने में भी परेशानी नहीं होती है। व्यापारी घर से ही खरीदकर ले जाते हैं। खास बात यह है कि केले की खेती में ज्यादा मेहनत भी नहीं करनी पड़ती है। केले का पौधा जुलाई माह में दो से ढाई मीटर की दूरी पर लगाया जाता है। उद्यान विभाग में ऑनलाइन आवेदन करने पर केले की खेती के लिए अनुदान भी मिला था।
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जिले के किसान प्रमुख रूप से धान, गेहूं व गन्ना की खेती करते हैं। कुछ सालों से किसानों को परंपरागत खेती से अपेक्षित फायदा नहीं हो रहा है। गेहूं और धान की फसलों में लागत ज्यादा लग रही है और उपज का दाम कम मिल रहा है। गन्ने की फसलों का भी यही हाल है। गन्ना मूल्य का समय से भुगतान नहीं हो पाता है। इसके चलते किसानों का इन फसलों से मोहभंग हो रहा है। ऐसे हालात में किसान दूसरे विकल्प तलाश रहे थे। ऐसे ही विकल्पों में केले की खेती भी है। किसानों को केले की खेती से काफी फायदा हो रहा है। जिले में भदैंया, लंभुआ, बल्दीराय, मोतिगरपुर, धनपतगंज, दूबेपुर समेत कई ब्लॉकों के किसान केले की खेती कर रहे हैं।
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धनपतगंज क्षेत्र के सेवरा गांव के किसान चंद्रशेखर उपाध्याय कई साल से केले की खेती कर रहे हैं। उनका कहना है इसको बेचने में भी परेशानी नहीं होती है। व्यापारी घर से ही खरीदकर ले जाते हैं। खास बात यह है कि केले की खेती में ज्यादा मेहनत भी नहीं करनी पड़ती है। केले का पौधा जुलाई माह में दो से ढाई मीटर की दूरी पर लगाया जाता है। उद्यान विभाग में ऑनलाइन आवेदन करने पर केले की खेती के लिए अनुदान भी मिला था।
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