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Sultanpur News: याेगी दरबार में गूंजेगा अधिवक्ता हत्याकांड, धरना आज से
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सुल्तानपुर। अधिवक्ता आजाद अहमद हत्याकांड अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दरबार में गूंजेगा। बृहस्पतिवार को हुई बार एसोसिएशन की बैठक में मुख्यमंत्री से मुलाकात के लिए प्रतिनिधिमंडल भेजने का निर्णय लिया। ताकि पुलिस प्रशासन की संदिग्ध भूमिका की जानकारी मुख्यमंत्री को दी जा सके।वकीलों ने अभियुक्तों की संपत्ति पर बुलडोजर चलाने की मांग उठाई। लगातार चाैथे दिन वकीलों ने कार्य बहिष्कार से अदालतों में न्यायिक कार्य ठप रहा।
पूर्व अध्यक्ष संदीप सिंह, श्रवण पांडेय, अरुण उपाध्याय, अरविंद सिंह, ऋषिदेव मिश्र, झिनकूराम विश्वकर्मा, रामशंकर पांडेय समेत अन्य वकीलों ने हत्या के आरोपी सिराज अहमद की संपत्ति को कुर्क करने की मांग की। कहा कि मामले को लेकर हाईकोर्ट में रिट दाखिल की जानी चाहिए। तभी पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता मिलेगी। वकीलों ने पुलिस व प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया। साथ ही 24 घंटे में अभियुक्तों की गिरफ्तारी की मांग की।
बार एसोसिएशन अध्यक्ष अरविंद पांडेय ने कहा कि शुक्रवार को दीवानी न्यायालय परिसर में धरना दिया जाएगा। शनिवार या रविवार को मामले को लेकर बार एसोसिएशन का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने जाएगा। सीएम को पूरे मामले की जानकारी देते हुए आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई किए जाने के साथ ही पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता दिलाने की मांग की जाएगी। बैठक में पूर्व अध्यक्ष करुणा शंकर दुबे, नरोत्तम शुक्ल, महेंद्र शर्मा, नागेंद्र सिंह, अनिल दुबे समेत कई अधिवक्ता मौजूद रहे।
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पांचवां आरोपी कोर्ट में पेश, भेजा गया जेल
अधिवक्ता हत्याकांड में फरार चल रहे 25 हजार रुपये के इनामी पांचवें आरोपी सैयाद उर्फ शहजाद को कोतवाली देहात थाने की पुलिस ने बृहस्पतिवार को शाम करीब साढ़े चार बजे सीजेएम कोर्ट में पेश किया। वह कोतवाली नगर के खैराबाद मोहल्ले का निवासी है। प्रभारी सीजेएम/एसीजेएम प्रथम योगेश कुमार यादव ने आरोपी को न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश दिया है।
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धनपतगंज ब्लॉक पर हुए बवाल में सिराज को कोर्ट ने सुनाई थी दो वर्ष की सजा
सुल्तानपुर। अधिवक्ता आजाद अहमद हत्याकांड में फरारी काट रहे 25 हजार के इनामी सिराज अहमद की नजदीकी भाजपा समर्थित जिला पंचायत अध्यक्ष ऊषा सिंह व उनके पति बल्दीराय ब्लॉक प्रमुख शिवकुमार सिंह से रही है। यह बात वर्ष 2016 में खुले तौर पर सार्वजनिक भी हुई थी। वह भद्र परिवार के वर्चस्व को चुनौती देने धनपतगंज ब्लॉक मुख्यालय गया था।
जिला पंचायत अध्यक्ष व उनके ब्लॉक प्रमुख पति और इसौली के पूर्व विधायक चंद्रभद्र सिंह सोनू व उनके भाई यशभद्र सिंह के समर्थकों के बीच हुए बवाल में सिराज भी आरोपी बनाया गया था। उसे कोर्ट ने दो दिसंबर 2022 को दोषी मानते हुए दो वर्ष की सजा सुनाई थी।
धनपतगंज ब्लॉक को इसौली के पूर्व विधायक चंद्रभद्र सिंह सोनू व उनके भाई धनपतगंज ब्लॉक प्रमुख यशभद्र सिंह मोनू का गढ़ माना जाता है। आजादी के बाद से अब तक धनपतगंज ब्लॉक प्रमुख की कुर्सी पर भद्र परिवार के किसी न किसी सदस्य का अथवा उनके किसी समर्थक का कब्जा रहा है। ब्लॉक प्रमुख के लिए चाहे जो चुनाव लड़ा हो लेकिन जीत भद्र परिवार अभवा उनके करीबी की ही हुई है। यह बात जिला पंचायत अध्यक्ष बनने के बाद ऊषा सिंह न उनके पति शिवकुमार सिंह काे अखर रही थी।
वर्ष 2016 में ब्लॉक प्रमुख के चुनाव का शंखनाद हुआ तो उस समय सपा में रही जिला पंचायत ऊषा सिंह व उनके पति शिव कुमार सिंह ने भद्र परिवार के वर्चस्व को चुनौती देने की योजना तैयार कर ली थी। इसके लिए वे पांच फरवरी 2016 को अपने कई समर्थकों के साथ धनपतगंज पहुंच गए। वे लाव लश्कर के साथ ब्लॉक प्रमुख की सपा समर्थित प्रत्याशी नीलम कोरी का पर्चा दाखिल कराने गईं थीं। उनके साथ सिराज अहमद समेत कई लोग भी गए थे।
पर्चा दाखिल करने के दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष व पूर्व विधायक के समर्थकों के बीच बवाल हो गया था। दोनों पक्षों की ओर से एक दूसरे के खिलाफ बलवा, मारपीट के साथ ही एससी-एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज कराया गया था। मामले में दो दिसंबर 2022 को एमपी-एमएलए की विशेष कोर्ट के न्यायाधीश एकता वर्मा ने एक पक्ष के पूर्व विधायक चंद्रभद्र सिंह व उनके भाई यशभद्र सिंह माेनू और दूसरे पक्ष के जिला पंचायत अध्यक्ष ऊषा सिंह, उनके पति शिवकुमार सिंह के साथ सिराज अहमद को दोषी मानते हुए दो वर्ष की सजा सुनाई थी।
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पूर्व अध्यक्ष संदीप सिंह, श्रवण पांडेय, अरुण उपाध्याय, अरविंद सिंह, ऋषिदेव मिश्र, झिनकूराम विश्वकर्मा, रामशंकर पांडेय समेत अन्य वकीलों ने हत्या के आरोपी सिराज अहमद की संपत्ति को कुर्क करने की मांग की। कहा कि मामले को लेकर हाईकोर्ट में रिट दाखिल की जानी चाहिए। तभी पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता मिलेगी। वकीलों ने पुलिस व प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया। साथ ही 24 घंटे में अभियुक्तों की गिरफ्तारी की मांग की।
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बार एसोसिएशन अध्यक्ष अरविंद पांडेय ने कहा कि शुक्रवार को दीवानी न्यायालय परिसर में धरना दिया जाएगा। शनिवार या रविवार को मामले को लेकर बार एसोसिएशन का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने जाएगा। सीएम को पूरे मामले की जानकारी देते हुए आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई किए जाने के साथ ही पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता दिलाने की मांग की जाएगी। बैठक में पूर्व अध्यक्ष करुणा शंकर दुबे, नरोत्तम शुक्ल, महेंद्र शर्मा, नागेंद्र सिंह, अनिल दुबे समेत कई अधिवक्ता मौजूद रहे।
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पांचवां आरोपी कोर्ट में पेश, भेजा गया जेल
अधिवक्ता हत्याकांड में फरार चल रहे 25 हजार रुपये के इनामी पांचवें आरोपी सैयाद उर्फ शहजाद को कोतवाली देहात थाने की पुलिस ने बृहस्पतिवार को शाम करीब साढ़े चार बजे सीजेएम कोर्ट में पेश किया। वह कोतवाली नगर के खैराबाद मोहल्ले का निवासी है। प्रभारी सीजेएम/एसीजेएम प्रथम योगेश कुमार यादव ने आरोपी को न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश दिया है।
धनपतगंज ब्लॉक पर हुए बवाल में सिराज को कोर्ट ने सुनाई थी दो वर्ष की सजा
सुल्तानपुर। अधिवक्ता आजाद अहमद हत्याकांड में फरारी काट रहे 25 हजार के इनामी सिराज अहमद की नजदीकी भाजपा समर्थित जिला पंचायत अध्यक्ष ऊषा सिंह व उनके पति बल्दीराय ब्लॉक प्रमुख शिवकुमार सिंह से रही है। यह बात वर्ष 2016 में खुले तौर पर सार्वजनिक भी हुई थी। वह भद्र परिवार के वर्चस्व को चुनौती देने धनपतगंज ब्लॉक मुख्यालय गया था।
जिला पंचायत अध्यक्ष व उनके ब्लॉक प्रमुख पति और इसौली के पूर्व विधायक चंद्रभद्र सिंह सोनू व उनके भाई यशभद्र सिंह के समर्थकों के बीच हुए बवाल में सिराज भी आरोपी बनाया गया था। उसे कोर्ट ने दो दिसंबर 2022 को दोषी मानते हुए दो वर्ष की सजा सुनाई थी।
धनपतगंज ब्लॉक को इसौली के पूर्व विधायक चंद्रभद्र सिंह सोनू व उनके भाई धनपतगंज ब्लॉक प्रमुख यशभद्र सिंह मोनू का गढ़ माना जाता है। आजादी के बाद से अब तक धनपतगंज ब्लॉक प्रमुख की कुर्सी पर भद्र परिवार के किसी न किसी सदस्य का अथवा उनके किसी समर्थक का कब्जा रहा है। ब्लॉक प्रमुख के लिए चाहे जो चुनाव लड़ा हो लेकिन जीत भद्र परिवार अभवा उनके करीबी की ही हुई है। यह बात जिला पंचायत अध्यक्ष बनने के बाद ऊषा सिंह न उनके पति शिवकुमार सिंह काे अखर रही थी।
वर्ष 2016 में ब्लॉक प्रमुख के चुनाव का शंखनाद हुआ तो उस समय सपा में रही जिला पंचायत ऊषा सिंह व उनके पति शिव कुमार सिंह ने भद्र परिवार के वर्चस्व को चुनौती देने की योजना तैयार कर ली थी। इसके लिए वे पांच फरवरी 2016 को अपने कई समर्थकों के साथ धनपतगंज पहुंच गए। वे लाव लश्कर के साथ ब्लॉक प्रमुख की सपा समर्थित प्रत्याशी नीलम कोरी का पर्चा दाखिल कराने गईं थीं। उनके साथ सिराज अहमद समेत कई लोग भी गए थे।
पर्चा दाखिल करने के दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष व पूर्व विधायक के समर्थकों के बीच बवाल हो गया था। दोनों पक्षों की ओर से एक दूसरे के खिलाफ बलवा, मारपीट के साथ ही एससी-एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज कराया गया था। मामले में दो दिसंबर 2022 को एमपी-एमएलए की विशेष कोर्ट के न्यायाधीश एकता वर्मा ने एक पक्ष के पूर्व विधायक चंद्रभद्र सिंह व उनके भाई यशभद्र सिंह माेनू और दूसरे पक्ष के जिला पंचायत अध्यक्ष ऊषा सिंह, उनके पति शिवकुमार सिंह के साथ सिराज अहमद को दोषी मानते हुए दो वर्ष की सजा सुनाई थी।