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अफसरों की अदूरदर्शिता से भड़की भीड़
Sultanpur
Updated Mon, 15 Sep 2014 05:30 AM IST
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अमेठी। रामनगर के भूपति भवन के सामने रविवार को हुआ बवाल मौके पर मौजूद वरिष्ठ अफसरों की अदूरदर्शिता के चलते हुआ। अनंत विक्रम के नजरबंद होने की सूचना पर भड़की पब्लिक का गुस्सा तब फूटा जब अफसरों ने उन्हें हटाने का आदेश दिया। पुलिस की ओर से जबरन हटाने की कोशिश पर पब्लिक के भड़कने के बाद फोर्स तो मोर्चा लेती रही लेकिन अधिकारी मौके से भाग निकले।
रविवार को रामनगर स्थित भूपति भवन के सामने अधिकारियों की अदूरदर्शिता के कारण सबसे पहले लोगों में राजमहल में पहले से मौजूद अनंत विक्रम को प्रशासन की ओर से नजरबंद करने की अफवाह फैली। इस अफवाह के फैलने के बाद पब्लिक डंडे आदि लेकर सड़क पर उतर आई। सड़क पर उतरी भीड़ भी आगे बढ़ने के बजाय महल से कुछ दूर पर खड़ी होकर अनंत के पक्ष में नारेबाजी करने लगी।
भीड़ को नारेबाजी करते देख एडीएम माताफेर, एएसपी मुन्नालाल व एसडीएम अमेठी आरडी राम, एसडीएम गौरीगंज सुभाष चंद्र प्रजापति, एसडीएम तिलोई वंदिता श्रीवास्तव, सीओ अमेठी रवि चतुर्वेदी और सीओ गौरीगंज नवीन मौके पर पहुंच गए। अधिकारियों ने भीड़ से हट जाने या गिरफ्तारी देने के लिए तैयार होने को कहा। यह सब चल ही रहा था कि पुलिस वाले भीड़ को जबरन हटाने लगे। पुलिस के इस रवैए से भीड़ आक्रामक हो गई और पथराव व गोलीबारी होने लगी। हालात पर गौर करें तो यदि अधिकारी भीड़ के पास नहीं जाते तो यह बवाल न होता जिसमें एक पुलिस कर्मी को अपनी जान गंवानी पड़ी बल्कि कई लोग घायल भी हुए।
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रविवार को रामनगर स्थित भूपति भवन के सामने अधिकारियों की अदूरदर्शिता के कारण सबसे पहले लोगों में राजमहल में पहले से मौजूद अनंत विक्रम को प्रशासन की ओर से नजरबंद करने की अफवाह फैली। इस अफवाह के फैलने के बाद पब्लिक डंडे आदि लेकर सड़क पर उतर आई। सड़क पर उतरी भीड़ भी आगे बढ़ने के बजाय महल से कुछ दूर पर खड़ी होकर अनंत के पक्ष में नारेबाजी करने लगी।
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भीड़ को नारेबाजी करते देख एडीएम माताफेर, एएसपी मुन्नालाल व एसडीएम अमेठी आरडी राम, एसडीएम गौरीगंज सुभाष चंद्र प्रजापति, एसडीएम तिलोई वंदिता श्रीवास्तव, सीओ अमेठी रवि चतुर्वेदी और सीओ गौरीगंज नवीन मौके पर पहुंच गए। अधिकारियों ने भीड़ से हट जाने या गिरफ्तारी देने के लिए तैयार होने को कहा। यह सब चल ही रहा था कि पुलिस वाले भीड़ को जबरन हटाने लगे। पुलिस के इस रवैए से भीड़ आक्रामक हो गई और पथराव व गोलीबारी होने लगी। हालात पर गौर करें तो यदि अधिकारी भीड़ के पास नहीं जाते तो यह बवाल न होता जिसमें एक पुलिस कर्मी को अपनी जान गंवानी पड़ी बल्कि कई लोग घायल भी हुए।
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