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युवराज ने अमेठी नरेश का प्रस्ताव ठुकराया

Sun, 27 Jul 2014 05:30 AM IST
Sultanpur
Sultanpur Updated Sun, 27 Jul 2014 05:30 AM IST
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अमेठी। अमेठी राजघराने के युवराज अनंत विक्रम सिंह ने अपने पिता व अमेठी नरेश डॉ. संजय सिंह के सुलह समझौते के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। उनका कहना है कि वे अपने पिता से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने को तो तैयार हैं लेकिन अमीता सिंह स्वीकार नहीं। कहा कि भविष्य में वे अमेठी से चुनाव लड़ेंगे।
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शुक्रवार से अमेठी राजघराने में शुरू हुए विवाद को सुलझाने के लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजय सिंह ने युवराज अनंत विक्रम सिंह के फोन पर बातचीत की। अनंत विक्रम सिंह की मानें तो उनके पिता ने तीन शर्तें रखीं। पहली यह कि अनंत विक्रम सार्वजनिक रूप से उनसे माफी मांगें। दूसरी कि वह एक वर्ष के लिए राजमहल छोड़ दें और लौट कर अमेठी न आएं। तीसरी शर्त रखी कि वह अमीता सिंह को स्वीकार करते हुए क्षेत्र में उनके साथ भ्रमण कर उनका प्रचार करें। युवराज ने बताया कि डॉ. संजय सिंह हमारे पिता हैं। पुत्र होने के नाते एक बार नहीं सौ बार सार्वजनिक रूप से उनके पैर छू कर माफी मांगने को तैयार हूं लेकिन उनकी अन्य दोनों शर्ते मानने को कतई तैयार नहीं हैं। अनंत विक्रम सिंह का कहना है कि अमीता सिंह ने उनके पिता डॉ. संजय सिंह को गुमराह कर दिया है। अमीता सिंह के पढ़ाने-लिखाने की बात से इन्कार करते हुए उन्होंने कहा कि नौकरी के दौरान वे कुछ जान नहीं पाए। छुट्टी के समय लौट कर आते थे तो अमीता उन्हें भी गुमराह करती थीं। नौकरी छोड़कर आने के बाद अमीता को यह डर सताने लगा कि वे उनका विकल्प बन सकते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि वे अब अमेठी से चुनाव लड़ेंगे। हालांकि अनंत विक्रम सिंह ने दल का खुलासा नहीं किया।
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‘अब बच्चों के हक का सवाल है’
षडयंत्र के तहत पहले मुझे महल से बाहर किया गया। फिर मेरे नाबालिग बच्चों को बरगलाया गया। बावजूद इसके मैं चुप रही। उफ! तक नहीं की लेकिन अब मेरे बच्चों के साथ अन्याय हो रहा है। अपने बच्चों के हक के लिए मजबूरी में हमें मुंह खोलना पड़ा है। ये उद्गार सांसद डॉ. संजय सिंह की पहली पत्नी गरिमा सिंह के हैं। फोन पर हुई बातचीत में उन्होंने अमीता पर सुनियोजित साजिश करने का आरोप लगाते हुए कहा कि मेरे बच्चों तक को मुझसे दूर करने की कोशिश की गई। बच्चे समझदार हुए तो उन्हें इसका अहसास हुआ। यह बात षडयंत्र करने वालों को खटकी। उसके बाद मेरे बच्चों को किनारे करने की साजिश की जाने लगी। बच्चों के हक के लिए हमें सामने आना पड़ा। उन्होंने कहा कि यह संपत्ति नहीं बल्कि हक की लड़ाई है।
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