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Sultanpur News: स्नातक की 42 फीसदी सीटें खाली
Mon, 04 Sep 2023 12:01 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Mon, 04 Sep 2023 12:01 AM IST
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सुल्तानपुर। रोजगारपरक शिक्षा की मांग ने स्नातक के प्रति युवाओं का मोहभंग कर दिया है। हालात ये हैं कि जिले के पांच एडेड महाविद्यालयों में स्नातक प्रथम वर्ष की 42 फीसदी सीटें खाली पड़ी हैं। निजी महाविद्यालयों की हालत तो और भी खराब बताई जा रही है। संजय गांधी पीजी कॉलेज चौकिया में तो एक चौथाई सीटों पर भी प्रवेश नहीं हुए हैं।
जिले में तकरीबन 80 महाविद्यालय संचालित हैं। इनमें पांच सहायता प्राप्त महाविद्यालय हैं। शेष महाविद्यालय स्ववित्तपोषित योजना के अंतर्गत संचालित हैं। महाविद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया जून से ही शुरू हो जाती है जो अगस्त तक पूर्ण कर ली जाती है। इस वर्ष महाविद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया सुस्त चल रही है।
अगस्त माह खत्म होने के बाद भी प्रवेश प्रक्रिया चल रही है लेकिन एडमिशन लेने वालों का ध्यान ही इस ओर कम है। इससे इन पांचों कॉलेजों में 42 फीसदी सीटें खाली पड़ी हैं। केएनआई में फार्मेसी संकाय के निदेशक प्रो. महेश प्रसाद कहते हैं कि बीए, बीएससी, बीकॉम के बजाय ज्यादातर युवा प्रोफेशनल कोर्सों को तरजीह दे रहे हैं। यही कारण है कि सामान्य स्नातक में कम विद्यार्थी प्रवेश ले रहे हैं।
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प्रोफेशनल कोर्सों में प्रवेश के लिए मारामारी
एक ओर जहां स्नातक की सीटें खाली चल रही हैं, वहीं दूसरी ओर प्रोफेशनल कोर्सों में प्रवेश के लिए मारामारी है। बी-फार्मा, बीएससी नर्सिंग, जीएनएम, एएनएम, बीबीए और बीए एलएलबी जैसे कोर्सों में विद्यार्थियों का रुझान बढ़ा है। इन कोर्सों में प्रवेश के लिए भारी भीड़ उमड़ रही है। बी-फार्मा की मैनेजमेंट कोटे की सीटों पर बड़ी संख्या में रजिस्ट्रेशन हुए हैं।
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जिले में तकरीबन 80 महाविद्यालय संचालित हैं। इनमें पांच सहायता प्राप्त महाविद्यालय हैं। शेष महाविद्यालय स्ववित्तपोषित योजना के अंतर्गत संचालित हैं। महाविद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया जून से ही शुरू हो जाती है जो अगस्त तक पूर्ण कर ली जाती है। इस वर्ष महाविद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया सुस्त चल रही है।
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अगस्त माह खत्म होने के बाद भी प्रवेश प्रक्रिया चल रही है लेकिन एडमिशन लेने वालों का ध्यान ही इस ओर कम है। इससे इन पांचों कॉलेजों में 42 फीसदी सीटें खाली पड़ी हैं। केएनआई में फार्मेसी संकाय के निदेशक प्रो. महेश प्रसाद कहते हैं कि बीए, बीएससी, बीकॉम के बजाय ज्यादातर युवा प्रोफेशनल कोर्सों को तरजीह दे रहे हैं। यही कारण है कि सामान्य स्नातक में कम विद्यार्थी प्रवेश ले रहे हैं।
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प्रोफेशनल कोर्सों में प्रवेश के लिए मारामारी
एक ओर जहां स्नातक की सीटें खाली चल रही हैं, वहीं दूसरी ओर प्रोफेशनल कोर्सों में प्रवेश के लिए मारामारी है। बी-फार्मा, बीएससी नर्सिंग, जीएनएम, एएनएम, बीबीए और बीए एलएलबी जैसे कोर्सों में विद्यार्थियों का रुझान बढ़ा है। इन कोर्सों में प्रवेश के लिए भारी भीड़ उमड़ रही है। बी-फार्मा की मैनेजमेंट कोटे की सीटों पर बड़ी संख्या में रजिस्ट्रेशन हुए हैं।