{"_id":"5d2e08368ebc3e6cc17ca9bd","slug":"3-000-teachers-get-relief-from-order-of-supreme-court-sultanpur-news-lko471081976","type":"story","status":"publish","title_hn":"सुप्रीम कोर्ट के आदेश से तीन हजार शिक्षकों को मिली राहत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सुप्रीम कोर्ट के आदेश से तीन हजार शिक्षकों को मिली राहत
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सुल्तानपुर। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के 30 मई 2018 के उस आदेश को रद कर दिया है, जिसमें बीएड, बीटीसी कंपलीट किए बिना टेट पास करने वाले शिक्षकों को अयोग्य करार दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट का आदेश होने से जिले के लगभग तीन हजार शिक्षकों की नौकरी पर मंडरा रहा खतरा टल गया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बीटीसी व बीएड की डिग्री लिए बिना टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) उत्तीर्ण करने वाले शिक्षकों को अयोग्य करार देने का आदेश दिया था। जिस पर प्रभावित शिक्षक सुप्रीम कोर्ट चले गए थे।
शिक्षकों का न्यायालय में पक्ष रखने वाले आवेश विक्रम सिंह ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच ने हाईकोर्ट के आदेश को रद कर दिया है। न्यायालय ने कहा है कि एनसीटीई के नियम में यह कहीं नहीं लिखा है कि टीईटी कब पास करना है।
विज्ञापन
अगर ट्रेनिंग के दौरान कोई टीईटी पास किया है तो अवैध कैसे होगा। शिक्षकों का चयन राज्य सरकार के मानक के अनुसार हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी नियुक्त शिक्षकों को वैध करार देते हुए पूर्ववत कार्य करने का निर्देश दिया है। गौरतलब है कि हाईकोर्ट के अयोग्यता संबंधी आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने 20 अगस्त 2018 को रोक लगा दी थी।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश से लगभग तीन हजार शिक्षकों की नौकरी बच गई है। इसमें 72,825 शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के 1400, जूनियर हाईस्कूलों में गणित-विज्ञान शिक्षकों के 301, पंद्रह हजार शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के 296, सोलह हजार 448 शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के 525, बारह हजार 460 शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के 256 व अड़सठ हजार 500 शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के लगभग 200 शिक्षकों को उच्चतम न्यायालय के इस आदेश से राहत मिल गई है।
विज्ञापन
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बीटीसी व बीएड की डिग्री लिए बिना टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) उत्तीर्ण करने वाले शिक्षकों को अयोग्य करार देने का आदेश दिया था। जिस पर प्रभावित शिक्षक सुप्रीम कोर्ट चले गए थे।
विज्ञापन
शिक्षकों का न्यायालय में पक्ष रखने वाले आवेश विक्रम सिंह ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच ने हाईकोर्ट के आदेश को रद कर दिया है। न्यायालय ने कहा है कि एनसीटीई के नियम में यह कहीं नहीं लिखा है कि टीईटी कब पास करना है।
विज्ञापन
अगर ट्रेनिंग के दौरान कोई टीईटी पास किया है तो अवैध कैसे होगा। शिक्षकों का चयन राज्य सरकार के मानक के अनुसार हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी नियुक्त शिक्षकों को वैध करार देते हुए पूर्ववत कार्य करने का निर्देश दिया है। गौरतलब है कि हाईकोर्ट के अयोग्यता संबंधी आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने 20 अगस्त 2018 को रोक लगा दी थी।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश से लगभग तीन हजार शिक्षकों की नौकरी बच गई है। इसमें 72,825 शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के 1400, जूनियर हाईस्कूलों में गणित-विज्ञान शिक्षकों के 301, पंद्रह हजार शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के 296, सोलह हजार 448 शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के 525, बारह हजार 460 शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के 256 व अड़सठ हजार 500 शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के लगभग 200 शिक्षकों को उच्चतम न्यायालय के इस आदेश से राहत मिल गई है।