{"_id":"75629c06dfc663570c399c71ab58649a","slug":"2700-electric-consumers-lost-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘लापता’ हैं 2700 विद्युत उपभोक्ता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘लापता’ हैं 2700 विद्युत उपभोक्ता
अमर उजाला ब्यूरो/सुल्तानपुर
Updated Sun, 09 Aug 2015 10:39 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सुल्तानपुर। शहर से करीब 2700 विद्युत उपभोक्ताओं के रहस्यमयढंग से लापता हो गए हैं। लापता उपभोक्ता बिजली तो रोजाना जला रहे हैं और प्रतिमाह लाखों में इनकी बिलिंग भी हो रही है लेकिन भुगतान के नाम पर वितरण खंड को धेला नहीं मिल पा रहा है। पता व ठिकाना नहीं मिलने से वितरण खंड के इंजीनियर हैरान हैं। भुगतान नहीं होने से वितरण खंड को प्रतिमाह करीब दस लाख की चपत लग रही है। एमडी की सख्ती के बाद सकते में आए इंजीनियर प्रकरण को दबाने में लगे हैं।
विज्ञापन
विद्युत वितरण खंड प्रथम में कनेक्शन के नाम बड़ी अनियमितता का खुलासा हुआ है। वितरण खंड के टाउन (शहरी) क्षेत्र से करीब 2700 विद्युत उपभोक्ता रहस्यमय ढंग से गायब हो गए हैं। विभिन्न क्षमताओं के विद्युत कनेक्शन लेने वाले ये ऐसे उपभोक्ता हैं जो बिजली का तो रोजाना उपभोग कर रहे हैं। वितरण खंड इनकी प्रतिमाह बिलिंग भी कर रहा है लेकिन इनका ठिकाना नहीं मिल रहा है। पता व ठिकाना नहीं मिलने से वितरण खंड बिलों को न तो इन तक पहुंचा पा रहा है और न ही बिलों की वसूली कर पा रहा है। बिलों की वसूली नहीं होने से वितरण खंड को प्रतिमाह करीब 10 लाख रुपये से ज्यादा की राजस्व की चपत पलग रही है।
विज्ञापन
बीते माह पावर कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक कार्यालय में इंजीनियरों का यह कारनामा पकड़े जाने के बाद एमडी ने शिकंजा कस दिया है। एमडी ने इन उपभोक्ताओं का पता लगाकर उनके खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया है। एमडी की सख्ती के बाद इंजीनियरों में खलबली मची है। वितरण खंड के इंजीनियर मामले पर पर्दा डालने की कोशिश में लगे हैं।
विज्ञापन
न उगलते बन रहा न निगलते
रहस्यमय ढंग से लापता करीब 2700 शहरी उपभोक्ताओं का पता व ठिकाना रिकॉर्डों में नहीं दर्ज होने से वितरण खंड के सामने समस्या खड़ी हो गई है। वितरण खंड की यह समझ में नहीं आ रहा है कि वह इन उपभोक्ताओं पर कार्रवाई करे तो कैसे। पता ठिकाना नहीं होने से वे तो इन उपभोक्ताओं से राजस्व की वसूली व अन्य कार्रवाई कर पा रहे और न ही कनेक्शन काट पा रहे हैं।