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अंधाधुंध ट्रांसफार्मरों के जलने से धराशायी हुई बिजली व्यवस्था
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सुल्तानपुर। अंधाधुंध ट्रांसफार्मरों के जलने से जिले में बिजली को लेकर हाहाकार मच गया है। एक के बाद एक ट्रांसफार्मरों के जलने से इसकी संख्या 225 पहुंच गई है।
इसमें वे भी ट्रांसफार्मर शामिल हैं जिन्हें वितरण खंड ने अपने रिकॉर्ड में नहीं दर्ज किया है। वितरण खंड के रिकॉर्डों में भी विभिन्न क्षमताओं के जले ट्रांसफार्मरों की संख्या 121 दर्शायी जा रही है।
इतनी बड़ी संख्या में ट्रांसफार्मरों के जलने से ग्रामीण क्षेत्रों में लाइट के साथ राजकीय एवं निजी नलकूप बंद हो गए हैं। बिजली आपूर्ति नहीं मिलने से भीषण उमस में एक लाख से अधिक उपभोक्ता व किसान परेशान हो गए हैं।
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वर्कशॉप समय पर व अच्छे मरम्मत का ट्रांसफार्मर उपभोक्ताओं को नहीं उपलब्ध करा पा रहा है। वर्कशॉप पर जवाबदेही तय नहीं होने से दिक्कत बढ़ती जा रही है। उपभोक्ता व किसान रोजाना वर्कशाप का चक्कर लगा रहे हैं।
जले हुए ट्रांसफार्मरों की संख्या का अंदाजा केवल प्रतापपुर कमैचा विकास खंड क्षेत्र से ही लगाया जा सकता है। ग्रामीणों के मुताबिक प्रतापपुरकमैचा विकास खंड के दो दर्जन गांवों के ट्रांसफार्मर जल गए हैैं।
इसमें सिंहौली, चांदा, भुआपठखौली, फुटेला, तमरसेपुर, बड़ेगांव, किंदीपुर समेत कई गांव शामिल हैं। प्रतापपुर कमैचा विकास खंड क्षेत्र में किंदीपुर, गारवपुर व चांदा उपकेंद्र से बिजली आपूर्ति होती है। ट्रांसफार्मर जलने से इसी क्षेत्र की करीब 20 हजार आबादी परेशान है। किसानों के नलकूप बंद हैं।
एक सप्ताह पहले जिले में कई दिनों हुई बारिश में ग्रामीण क्षेत्रों में लगे विभिन्न क्षमताओं के ट्रांसफार्मर जल गए थे। सूत्रों की मानें तो मौजूदा समय में जले हुए ट्रांसफार्मरों की संख्या करीब 225 के पास है।
इसमें वे ट्रांसफार्मर भी शामिल हैं जिन्हें वितरण खंड के इंजीनियरों ने अपने रिकॉर्डों में न दर्ज किया है और न ही उसे वर्कशाप में जमा कराया है। रिकॉर्डों में दर्ज नहीं होने से उनके आंकड़े वितरण खंड व वर्कशाप में नहीं आ सके हैं।
वितरण खंड हाल ही में विभिन्न वजहों से जले ट्रांसफार्मरों की संख्या 121 बता रहा है। इसमें सर्वाधिक जले ट्रांसफार्मरों की संख्या लंभुआ वितरण खंड में दशाई जा रही है। लंभुआ वितरण खंड क्षेत्र में जले ट्रांसफार्मरों की संख्या 35 बताई गई है।
अंधाधुंध जल रहे ट्रांसफार्मरों की मरम्मत करने में वर्कशॉप फिसड्डी साबित हो रहा है। सप्ताह भर से अधिक समय से जले ट्रांसफार्मरों की समय से व गुणवत्तापूर्ण मरम्मत करके वर्कशॉप उपभोक्ताओं व वितरण खंड को नहीं उपलब्ध करा पा रहा है।
समय से ट्रांसफार्मरों के उपलब्ध नहीं होने पर वितरण खंड भी समय से उपभोक्ताओं को ट्रांसफार्मर नहीं दे पा रहा है। वितरण खंड के अधिकारी भी वर्कशॉप से ट्रांसफार्मर दिलाने में हाथ खड़े कर ले रहे हैं। वर्कशॉप के इंजीनियरों की जवाबदेही तय नहीं होने से समस्या बढ़ती जा रही है।
शासन ने जले ट्रांसफार्मरों को बदलने के लिए 48 घंटे का समय निर्धारित किया है। वर्कशॉप से मरम्मत किए हुए ट्रांसफार्मरों के समय से नहीं मिलने से शासन के आदेश पर पानी फिर रहा है।
वर्कशॉप सिर्फ जेई के भरोसे होने से समस्या और बढ़ गई है। स्थिति यह है कि वर्कशॉप के अवर अभियंता वितरण खंड के इंजीनियरों तक की नहीं सुन रहे हैं।
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इसमें वे भी ट्रांसफार्मर शामिल हैं जिन्हें वितरण खंड ने अपने रिकॉर्ड में नहीं दर्ज किया है। वितरण खंड के रिकॉर्डों में भी विभिन्न क्षमताओं के जले ट्रांसफार्मरों की संख्या 121 दर्शायी जा रही है।
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इतनी बड़ी संख्या में ट्रांसफार्मरों के जलने से ग्रामीण क्षेत्रों में लाइट के साथ राजकीय एवं निजी नलकूप बंद हो गए हैं। बिजली आपूर्ति नहीं मिलने से भीषण उमस में एक लाख से अधिक उपभोक्ता व किसान परेशान हो गए हैं।
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वर्कशॉप समय पर व अच्छे मरम्मत का ट्रांसफार्मर उपभोक्ताओं को नहीं उपलब्ध करा पा रहा है। वर्कशॉप पर जवाबदेही तय नहीं होने से दिक्कत बढ़ती जा रही है। उपभोक्ता व किसान रोजाना वर्कशाप का चक्कर लगा रहे हैं।
जले हुए ट्रांसफार्मरों की संख्या का अंदाजा केवल प्रतापपुर कमैचा विकास खंड क्षेत्र से ही लगाया जा सकता है। ग्रामीणों के मुताबिक प्रतापपुरकमैचा विकास खंड के दो दर्जन गांवों के ट्रांसफार्मर जल गए हैैं।
इसमें सिंहौली, चांदा, भुआपठखौली, फुटेला, तमरसेपुर, बड़ेगांव, किंदीपुर समेत कई गांव शामिल हैं। प्रतापपुर कमैचा विकास खंड क्षेत्र में किंदीपुर, गारवपुर व चांदा उपकेंद्र से बिजली आपूर्ति होती है। ट्रांसफार्मर जलने से इसी क्षेत्र की करीब 20 हजार आबादी परेशान है। किसानों के नलकूप बंद हैं।
एक सप्ताह पहले जिले में कई दिनों हुई बारिश में ग्रामीण क्षेत्रों में लगे विभिन्न क्षमताओं के ट्रांसफार्मर जल गए थे। सूत्रों की मानें तो मौजूदा समय में जले हुए ट्रांसफार्मरों की संख्या करीब 225 के पास है।
इसमें वे ट्रांसफार्मर भी शामिल हैं जिन्हें वितरण खंड के इंजीनियरों ने अपने रिकॉर्डों में न दर्ज किया है और न ही उसे वर्कशाप में जमा कराया है। रिकॉर्डों में दर्ज नहीं होने से उनके आंकड़े वितरण खंड व वर्कशाप में नहीं आ सके हैं।
वितरण खंड हाल ही में विभिन्न वजहों से जले ट्रांसफार्मरों की संख्या 121 बता रहा है। इसमें सर्वाधिक जले ट्रांसफार्मरों की संख्या लंभुआ वितरण खंड में दशाई जा रही है। लंभुआ वितरण खंड क्षेत्र में जले ट्रांसफार्मरों की संख्या 35 बताई गई है।
अंधाधुंध जल रहे ट्रांसफार्मरों की मरम्मत करने में वर्कशॉप फिसड्डी साबित हो रहा है। सप्ताह भर से अधिक समय से जले ट्रांसफार्मरों की समय से व गुणवत्तापूर्ण मरम्मत करके वर्कशॉप उपभोक्ताओं व वितरण खंड को नहीं उपलब्ध करा पा रहा है।
समय से ट्रांसफार्मरों के उपलब्ध नहीं होने पर वितरण खंड भी समय से उपभोक्ताओं को ट्रांसफार्मर नहीं दे पा रहा है। वितरण खंड के अधिकारी भी वर्कशॉप से ट्रांसफार्मर दिलाने में हाथ खड़े कर ले रहे हैं। वर्कशॉप के इंजीनियरों की जवाबदेही तय नहीं होने से समस्या बढ़ती जा रही है।
शासन ने जले ट्रांसफार्मरों को बदलने के लिए 48 घंटे का समय निर्धारित किया है। वर्कशॉप से मरम्मत किए हुए ट्रांसफार्मरों के समय से नहीं मिलने से शासन के आदेश पर पानी फिर रहा है।
वर्कशॉप सिर्फ जेई के भरोसे होने से समस्या और बढ़ गई है। स्थिति यह है कि वर्कशॉप के अवर अभियंता वितरण खंड के इंजीनियरों तक की नहीं सुन रहे हैं।