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गर्मी बढ़ते ही 50 मेगावाट एंपियर बढ़ी बिजली की खपत
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गर्मी बढ़ते ही 50 मेगावाट एंपियर बढ़ी बिजली की खपत
सुल्तानपुर। भीषण गर्मी बढ़ते ही जिले में बिजली की डिमांड बढ़ गई है। मांग एवं आपूर्ति में अंतर आने से वितरण पूरी विद्युत आपूर्ति नहीं कर पा रहा है। इसकी वजह से शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक कटौती जारी है।
बारिश के दौरान खपत और बढ़ने के आसार हैैं। लोड बढ़ने से वितरण के जर्जर संयंत्र भी धोखा दे रहे हैं। इसकी वजह से उपभोक्ताओं को और दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
जिले में भीषण गर्मी शुरू होने से बिजली मांग बढ़ती जा रही है। पारेषण सूत्रों की मानें तो मौजूदा समय में खपत को देखते हुए बिजली की डिमांड करीब 160 मेगावाट एंपियर तक पहुंच गई है।
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करीब तीन माह पहले तक डिमांड करीब 110 मेगावाट एंपियर के आसपास थी। लगातार बढ़ती खपत से डिमांड और बढ़ने के आसार हैं। पारेषण ने बारिश के दौरान उमस भरी गर्मी में खपत और बढ़ने की उम्मीद जताई है।
हालांकि पारेषण वितरण खंडों को पूरी बिजली उपलब्ध कराने का दावा कर रहा है। पारेेषण अपनी क्षमता 300 मेगावाट एंपियर तक बता रहा है। गर्मी में लोड बढते ही खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में जर्जर संयंत्र धोखा देेेने लगे हैं।
लोड बढ़ने से संयंत्रों में फॉल्ट आ रही है। इसके बाद भी वितरण के उपकेंद्रों से बिजली कटौती हो रही है। फॉल्ट से उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
गर्मी बढ़ते ही शहर से लेेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक के उपभोक्ताओं को पर्याप्त बिजली नहीं मिल पा रही है। शहरी क्षेत्र में मौजूदा समय में करीब 20 घंटे, ग्रामीण क्षेत्रों में 12 व तहसील मुख्यालयों पर करीब 16 घंटे ही बिजली मिल पा रही है।
हालांकि शासन ने शहरी क्षेत्र में 24, तहसील मुख्यालयों पर 20 व ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे बिजली देने का निर्देश दिया है।
सैफल्लागंज निवासी फिरोज अहमद का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र में बिजली की दिक्कत बढ़ गई है। महज 12 घंटे की आपूर्ति मिल पा रही है। पुरुषोत्तमपुर निवासी संजय मिश्र ने बताया कि गांव में कई शिफ्ट में 12 घंटे बिजली ही मिल पा रही है।
इसकी वजह से सिंचाई आदि की भी दिक्कत हो रही है। शहर निवासी विजेेंद्र त्रिपाठी ने कहा कि केएनआई उपकेंद्र से रोजाना तीन से चार घंटे की कटौती शहरी क्षेत्र में की जा रही है। रात में कटौती से उपभोक्ता सो नहीं पा रहे हैं।
पारेषण के अधीक्षण अभियंता पीयूष गर्ग का कहना है कि पारेषण मांग के सापेक्ष वितरण को पर्याप्त बिजली उपलब्ध करवा रहा है। पारेषण की क्षमता बढ़ गई है। पारेषण के उपकेंद्रों पर ओवर लोडिंग की समस्या नहीं रह गई है।
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सुल्तानपुर। भीषण गर्मी बढ़ते ही जिले में बिजली की डिमांड बढ़ गई है। मांग एवं आपूर्ति में अंतर आने से वितरण पूरी विद्युत आपूर्ति नहीं कर पा रहा है। इसकी वजह से शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक कटौती जारी है।
बारिश के दौरान खपत और बढ़ने के आसार हैैं। लोड बढ़ने से वितरण के जर्जर संयंत्र भी धोखा दे रहे हैं। इसकी वजह से उपभोक्ताओं को और दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
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जिले में भीषण गर्मी शुरू होने से बिजली मांग बढ़ती जा रही है। पारेषण सूत्रों की मानें तो मौजूदा समय में खपत को देखते हुए बिजली की डिमांड करीब 160 मेगावाट एंपियर तक पहुंच गई है।
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करीब तीन माह पहले तक डिमांड करीब 110 मेगावाट एंपियर के आसपास थी। लगातार बढ़ती खपत से डिमांड और बढ़ने के आसार हैं। पारेषण ने बारिश के दौरान उमस भरी गर्मी में खपत और बढ़ने की उम्मीद जताई है।
हालांकि पारेषण वितरण खंडों को पूरी बिजली उपलब्ध कराने का दावा कर रहा है। पारेेषण अपनी क्षमता 300 मेगावाट एंपियर तक बता रहा है। गर्मी में लोड बढते ही खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में जर्जर संयंत्र धोखा देेेने लगे हैं।
लोड बढ़ने से संयंत्रों में फॉल्ट आ रही है। इसके बाद भी वितरण के उपकेंद्रों से बिजली कटौती हो रही है। फॉल्ट से उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
गर्मी बढ़ते ही शहर से लेेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक के उपभोक्ताओं को पर्याप्त बिजली नहीं मिल पा रही है। शहरी क्षेत्र में मौजूदा समय में करीब 20 घंटे, ग्रामीण क्षेत्रों में 12 व तहसील मुख्यालयों पर करीब 16 घंटे ही बिजली मिल पा रही है।
हालांकि शासन ने शहरी क्षेत्र में 24, तहसील मुख्यालयों पर 20 व ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे बिजली देने का निर्देश दिया है।
सैफल्लागंज निवासी फिरोज अहमद का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र में बिजली की दिक्कत बढ़ गई है। महज 12 घंटे की आपूर्ति मिल पा रही है। पुरुषोत्तमपुर निवासी संजय मिश्र ने बताया कि गांव में कई शिफ्ट में 12 घंटे बिजली ही मिल पा रही है।
इसकी वजह से सिंचाई आदि की भी दिक्कत हो रही है। शहर निवासी विजेेंद्र त्रिपाठी ने कहा कि केएनआई उपकेंद्र से रोजाना तीन से चार घंटे की कटौती शहरी क्षेत्र में की जा रही है। रात में कटौती से उपभोक्ता सो नहीं पा रहे हैं।
पारेषण के अधीक्षण अभियंता पीयूष गर्ग का कहना है कि पारेषण मांग के सापेक्ष वितरण को पर्याप्त बिजली उपलब्ध करवा रहा है। पारेषण की क्षमता बढ़ गई है। पारेषण के उपकेंद्रों पर ओवर लोडिंग की समस्या नहीं रह गई है।