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नए कलेवर में दिखेगा 154 साल पुराना जीआईसी
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सुल्तानपुर। करीब 154 वर्ष पुराने राजकीय इंटर कॉलेज का कायाकल्प होगा। कॉलेज के अध्ययनकक्षों, प्रयोगशालाओं व शौचालय का मरम्मत व रंग-रोगन किया जा रहा है। इसके लिए राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान व कॉलेज फंड से पैसे खर्च किए जाएंगे।
वर्ष 1866 में राजकीय इंटर कॉलेज का संचालन शुरू हुआ था। इस कॉलेज से उत्तीर्ण होकर तमाम लोग शासन-प्रशासन से लेकर देश-विदेश तक में सेवा दे चुके हैं या फिर सेवारत हैं। कई राजनेता भी जीआईसी से पढ़कर राजनीति में आगे बढ़े हैं।
एक समय था जब जीआईसी में एडमिशन कराने के लिए लोगों को एड़ी-चोटी तक का जोर लगाना पड़ता था। जीआईसी में प्रवेश होने का मतलब छात्र के मेधावी होने की गारंटी माना जाता था। जैसे-जैसे समय बीतता गया सीबीएसई बोर्ड के स्कूलों की संख्या में वृद्धि होती गई और अभिभावकों का रुझान इसकी तरफ कम हो गया।
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इसके बावजूद शहर के जीआईसी में छात्र संख्या में कभी भी बहुत अधिक गिरावट नहीं आई। आज भी विद्यालय में 1640 छात्र अध्ययनरत हैं। इन दिनों समय के साथ जीर्ण-शीर्ण हो चुके कॉलेज की सूरत बदलने की कोशिश चल रही है।
इमारत के पुराने ढांचे को रंग-रोगन एवं मरम्मतीकरण कर नया स्वरूप दिया जा रहा है। प्रधानाचार्य कक्ष में वॉश बेसिन व प्रसाधन का निर्माण नए सिरे से कराया जा रहा है। जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान एवं भौतिक विज्ञान की प्रयोगशालाएं भी सुसज्ज्ति की जा रही हैं। मुख्य द्वार को भी नए तरीके से बनवाया जाएगा। इस सब कार्य में राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान से मिली धनराशि तथा कॉलेज में बचे फंड का उपयोग किया जाएगा।
छात्रों के लिए शुद्ध पेयजल के लिए परिसर में एक-एक हजार लीटर की दो टंकियां लगाई जा रही हैं। इन टंकियों से पांच-पांच टोटियां लगाई गई हैं। पेयजल स्थल पर टाइल्स व शेड लगाया जा रहा है। इसके अलावा वर्षों से बंद पड़े प्रसाधन को भी दुरुस्त कराया जा रहा है।
राजकीय इंटर कॉलेज का गौरवशाली इतिहास रहा है। यहां के पुरातन छात्र देश के कई हिस्सों में महत्वपूूर्ण पदों पर आसीन हैं। हमारा लक्ष्य है कि जीआईसी को उसका पुराना गौरव हासिल हो। शैक्षिक गुणवत्ता के साथ-साथ मूलभूत सुविधाओं भी मुकम्मल की जाएगी। कम पैसे में अधिक से अधिक संसाधन विकसित किए जाएंगे।
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वर्ष 1866 में राजकीय इंटर कॉलेज का संचालन शुरू हुआ था। इस कॉलेज से उत्तीर्ण होकर तमाम लोग शासन-प्रशासन से लेकर देश-विदेश तक में सेवा दे चुके हैं या फिर सेवारत हैं। कई राजनेता भी जीआईसी से पढ़कर राजनीति में आगे बढ़े हैं।
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एक समय था जब जीआईसी में एडमिशन कराने के लिए लोगों को एड़ी-चोटी तक का जोर लगाना पड़ता था। जीआईसी में प्रवेश होने का मतलब छात्र के मेधावी होने की गारंटी माना जाता था। जैसे-जैसे समय बीतता गया सीबीएसई बोर्ड के स्कूलों की संख्या में वृद्धि होती गई और अभिभावकों का रुझान इसकी तरफ कम हो गया।
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इसके बावजूद शहर के जीआईसी में छात्र संख्या में कभी भी बहुत अधिक गिरावट नहीं आई। आज भी विद्यालय में 1640 छात्र अध्ययनरत हैं। इन दिनों समय के साथ जीर्ण-शीर्ण हो चुके कॉलेज की सूरत बदलने की कोशिश चल रही है।
इमारत के पुराने ढांचे को रंग-रोगन एवं मरम्मतीकरण कर नया स्वरूप दिया जा रहा है। प्रधानाचार्य कक्ष में वॉश बेसिन व प्रसाधन का निर्माण नए सिरे से कराया जा रहा है। जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान एवं भौतिक विज्ञान की प्रयोगशालाएं भी सुसज्ज्ति की जा रही हैं। मुख्य द्वार को भी नए तरीके से बनवाया जाएगा। इस सब कार्य में राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान से मिली धनराशि तथा कॉलेज में बचे फंड का उपयोग किया जाएगा।
छात्रों के लिए शुद्ध पेयजल के लिए परिसर में एक-एक हजार लीटर की दो टंकियां लगाई जा रही हैं। इन टंकियों से पांच-पांच टोटियां लगाई गई हैं। पेयजल स्थल पर टाइल्स व शेड लगाया जा रहा है। इसके अलावा वर्षों से बंद पड़े प्रसाधन को भी दुरुस्त कराया जा रहा है।
राजकीय इंटर कॉलेज का गौरवशाली इतिहास रहा है। यहां के पुरातन छात्र देश के कई हिस्सों में महत्वपूूर्ण पदों पर आसीन हैं। हमारा लक्ष्य है कि जीआईसी को उसका पुराना गौरव हासिल हो। शैक्षिक गुणवत्ता के साथ-साथ मूलभूत सुविधाओं भी मुकम्मल की जाएगी। कम पैसे में अधिक से अधिक संसाधन विकसित किए जाएंगे।