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लखनऊ-वाराणसी रेल ट्रैक पर जल्द दौड़ेंगी इलेक्ट्रिक ट्रेनें
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लखनऊ-वाराणसी ट्रैक पर जल्द दौड़ेंगी इलेक्ट्रिक ट्रेनें
अमेठी। लखनऊ-वाराणसी रेल ट्रैक (वाया रायबरेली-प्रतापगढ़) पर जल्द ही इलेक्ट्रिक इंजन से चलने वाली ट्रेनें संचालित होंगी। ट्रैक पर विद्युतीकरण कार्य पूरा होने के बाद महकमा तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटा है।
पहले चरण में 15 जोड़ी ट्रेनों का चयन किया गया है। विद्युत इंजन से ट्रेनों का संचालन शुरू होने के बाद डीजल की बचत के साथ ही पर्यावरण को भी साफ रखने में मदद मिलेगी।
लखनऊ-वाराणसी वाया सुलतानुपर व लखनऊ-वाराणसी वाया फैजाबाद के बाद जल्द ही लखनऊ-वाराणसी वाया रायबरेली प्रतापगढ़ ट्रैक पर भी विद्युत इंजन से चलने वाली ट्रेनों का संचालन शुरू होगा।
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283 किलोमीटर लंबे रेल खंड पर विद्युतीकरण कार्य पूरा होने के बाद रेल महकमा 20 मई के बाद किसी भी दिन विद्युत इंजन से ट्रेनों का संचालन शुरू करने की तैयारी में है।
विद्युत चालित ट्रेनों के संचालित होने से न सिर्फ डीजल की बचत होगी बल्कि इससे निकलने वाला इंजन का धुंआ पर्यावरण को प्रदूषित भी नहीं कर सकेगा। विद्युत इंजन से ट्रेनों का संचालन होने पर यात्रियों का कुछ समय भी बचेगा।
रेल विकास निगम लिमिटेड के प्रबंधक जगन्नाथ मिश्र ने बताया कि पंजाब मेल और उद्योग नगरी समेत कई ट्रेनों के इंजन लखनऊ में बदले जाते हैं। ऐसे में विद्युत इंजन से ट्रेनों का संचालन शुरू करने से इंजन बदलने की समस्या से छुटकारा मिलेगा। इससे काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस समेत तमाम ट्रेनों की रफ्तार बढ़ जाएगी।
जगन्नाथ मिश्र ने बताया एक हजार टन भार के साथ एक किलोमीटर चलने वाला इंजन साढ़े तीन लीटर डीजल की खपत करता है। मालगाड़ी के एक बैगन का भार लगभग 80 टन होता है।
ऐसे में 48 से 50 बैगन वाली एक मालगाड़ी चार हजार टन भार वहन करती है। यानि मालगाड़ी के एक किलोमीटर के सफर में 14 लीटर डीजल की खपत होती है जबकि एक्सप्रेस ट्रेन एक हजार टन के भार से चलती है और उस पर साढ़े तीन लीटर डीजल प्रति किलोमीटर खर्च होता है।
जगन्नाथ मिश्र ने बताया कि इस ट्रैक पर 32 जोड़ी यात्री ट्रेनें दौड़ती हैं। पहले चरण में 15 जोड़ी ट्रेनों को इलेक्ट्रिक इंजन से संचालित किया जाएगा।
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अमेठी। लखनऊ-वाराणसी रेल ट्रैक (वाया रायबरेली-प्रतापगढ़) पर जल्द ही इलेक्ट्रिक इंजन से चलने वाली ट्रेनें संचालित होंगी। ट्रैक पर विद्युतीकरण कार्य पूरा होने के बाद महकमा तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटा है।
पहले चरण में 15 जोड़ी ट्रेनों का चयन किया गया है। विद्युत इंजन से ट्रेनों का संचालन शुरू होने के बाद डीजल की बचत के साथ ही पर्यावरण को भी साफ रखने में मदद मिलेगी।
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लखनऊ-वाराणसी वाया सुलतानुपर व लखनऊ-वाराणसी वाया फैजाबाद के बाद जल्द ही लखनऊ-वाराणसी वाया रायबरेली प्रतापगढ़ ट्रैक पर भी विद्युत इंजन से चलने वाली ट्रेनों का संचालन शुरू होगा।
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283 किलोमीटर लंबे रेल खंड पर विद्युतीकरण कार्य पूरा होने के बाद रेल महकमा 20 मई के बाद किसी भी दिन विद्युत इंजन से ट्रेनों का संचालन शुरू करने की तैयारी में है।
विद्युत चालित ट्रेनों के संचालित होने से न सिर्फ डीजल की बचत होगी बल्कि इससे निकलने वाला इंजन का धुंआ पर्यावरण को प्रदूषित भी नहीं कर सकेगा। विद्युत इंजन से ट्रेनों का संचालन होने पर यात्रियों का कुछ समय भी बचेगा।
रेल विकास निगम लिमिटेड के प्रबंधक जगन्नाथ मिश्र ने बताया कि पंजाब मेल और उद्योग नगरी समेत कई ट्रेनों के इंजन लखनऊ में बदले जाते हैं। ऐसे में विद्युत इंजन से ट्रेनों का संचालन शुरू करने से इंजन बदलने की समस्या से छुटकारा मिलेगा। इससे काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस समेत तमाम ट्रेनों की रफ्तार बढ़ जाएगी।
जगन्नाथ मिश्र ने बताया एक हजार टन भार के साथ एक किलोमीटर चलने वाला इंजन साढ़े तीन लीटर डीजल की खपत करता है। मालगाड़ी के एक बैगन का भार लगभग 80 टन होता है।
ऐसे में 48 से 50 बैगन वाली एक मालगाड़ी चार हजार टन भार वहन करती है। यानि मालगाड़ी के एक किलोमीटर के सफर में 14 लीटर डीजल की खपत होती है जबकि एक्सप्रेस ट्रेन एक हजार टन के भार से चलती है और उस पर साढ़े तीन लीटर डीजल प्रति किलोमीटर खर्च होता है।
जगन्नाथ मिश्र ने बताया कि इस ट्रैक पर 32 जोड़ी यात्री ट्रेनें दौड़ती हैं। पहले चरण में 15 जोड़ी ट्रेनों को इलेक्ट्रिक इंजन से संचालित किया जाएगा।