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भाजपा के‘एम’ की टक्कर पर सपा का ‘एम’

Sat, 01 Jun 2013 01:22 AM IST
मेरठ/नितिन यादव
मेरठ/नितिन यादव Updated Sat, 01 Jun 2013 01:22 AM IST
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sp lok sabha election strategy

भाजपा में मोदी के बढ़ते प्रभाव और फिर अमित शाह के प्रभारी बनने के बाद सपा पूरी तरह से मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण को अपने पक्ष में कराने की रणनीति पर आ गई है।

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राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा के मोदी फैक्टर से निपटने के लिए सपा ने अपना एम फैक्टर यानी मुस्लिम कार्ड पूरी तरह से चल दिया है।

नए टिकटों के बाद पश्चिम और आसपास की अधिकांश सीटों पर सपा के मुस्लिम प्रत्याशी हो गए हैं। इस एम फैक्टर के दम पर सपा की रणनीति कांग्रेस और बसपा की ओर मुस्लिम मतों का बंटवारा रोकने की भी है।
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वहीं कहा तो यह भी जा रहा है कि बिजनौर से अमीर आलम से जरिए आजम खां ने अपने चिर-परिचित प्रतिद्वंदी और हाल में बसपा में आए याकूब कुरैशी के लिए रणनीति बनाई है।
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बिजनौर लोकसभा सीट से चार लाख से ज्यादा मुस्लिम हैं। किसी भी पार्टी से मुस्लिम प्रत्याशी न होने के कारण लगातार मुस्लिम प्रत्याशी को लेकर कयास लगाए जा रहे थे।

सपा से भी कई मुस्लिम दिग्गज टिकट पर दावा जता रहे थे। हाल ही में बसपा में आए याकूब कुरैशी के बारे में भी बिजनौर सीट को लेकर चर्चाएं थी।

सपा ने वहां से मुस्लिम प्रत्याशी को लाकर दूसरे दलों की मुस्लिम प्रत्याशी की भविष्य की रणनीति पर फिलहाल रोक लगा दी है।

बिजनौर में सपा के जाट प्रत्याशी का टिकट बदलने से भाजपा में भी टिकट के दावेदारों का गणित बदल गया है। सपा ने सहारनपुर में मुस्लिम प्रत्याशी को टिकट देकर और बिजनौर और अलीगढ़ से टिकट बदलकर सीधे-सीधे मुस्लिम वोटों पर निगाह गड़ा दी है।

पिछले लोकसभा चुनावों में मुस्लिमों के छिटकने से सपा को काफी नुकसान हुआ था और इस बार उस नुकसान से बचने की तैयारी है।

माना यह भी जा रहा है कि भाजपा के मोदी फैक्टर के बीच मुस्लिम वोटों के पूरी तरह से ध्रुवीकरण का लाभ उठाने के लिए सपा ने पश्चिम और आसपास की सीटों पर मुस्लिम प्रत्याशियों का जाल बिछा दिया है।

बिजनौर से अनुराधा चौधरी का टिकट कटने के पीछे भी कहीं न कहीं मोदी फैक्टर ही है। पिछले लोकसभा चुनाव में मुजफ्फरनगर सीट से चुनाव केदौरान नरेंद्र मोदी की उन्होंने जमकर तारीफ की थी।

बिजनौर में सपा को इस बात का भी डर सता रहा था कि पिछले लोकसभा चुनाव का अनुराधा का मोदी प्रेम कहीं मुस्लिमों को नाराज न कर दे।

मुस्लिमों के बीच मजबूत संदेश देने के लिए ही  बिजनौर से अमीर आलम, मेरठ से शाहिद मंजूर, सहारनपुर से फिरोज आफताब, संभल से जावेद अली, अलीगढ़ से जफर आलम, मुरादाबाद से एचटी हसन, कैराना से नाहिद हसन, अमरोहा से उमैरा अख्तर, बरेली से आयशा इस्लाम को प्रत्याशी बनाया गया है।

पिछले लोकसभा चुनाव में सपा से मुस्लिम छिटकर कांग्रेस और बसपा में चला गया था। यह भी माना जाता है कि लोकसभा चुनावों में कई बार भाजपा की सीधी टक्कर पर मुस्लिम कांग्रेस को वोट कर देते हैं। सपा सुप्रीमों ने अपने मिशन 2014  को पूरा करने के लिए मुस्लिमों के बंटवारे को रोकने की रणनीति बनाई है।


याकूब कुरैशी के बसपा ज्वाइन करने के बाद माना जा रहा था कि बसपा प्रत्या बदल सकती है लेकिन सपा ने मुस्लिम प्रत्याशी खड़ा करके इसमें रोड़ा अटका दिया है। सहारनपुर में भी मुस्लिम प्रत्याशी खड़ा करके कांग्रेस नेता रसीद मसूद की घेराबंदी करने की भी सपा की योजना है।

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