रेणुकूट। बीते एक पखवाड़े से ऊर्जांचल सहित मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ में लगातार हो रही बारिश के कारण रिहंद बांध के जलस्तर में तेजी से वृद्धि हुई है। इसे देखते हुए इस वर्ष जल विद्युत उत्पादन संतोषजनक रहने की उम्मीद है। जल विद्युत गृहों को गर्मी के दिनों में जल संकट से मुक्ति मिलेगी। यही नहीं औद्योगिक नगरी में रहने वाले लोगों की प्यास बुझाने में भी काफी मदद मिलेगी।
एक पखवाड़े से सोनांचल के अलावा सीमावर्ती प्रांत में लगातार हो रही बारिश के चलते गोविंद बल्लभ पंत सागर की प्यास बुझ गई है। जिस तरह बीते एक पखवाड़े से बांध में पानी आ रहा है, अगर यही स्थिति रही तो आने वाले दिनों में रिहंद के फाटक खोलकर पानी निकाला जा सकता है। पिपरी स्थित रिहंद बांध में एकत्रित पानी से तटवर्ती इलाकों में स्थित 20 हजार मेगावाट क्षमता के ताप विद्युत गृहों का संचालन होता है। विद्युत घरों को थर्मल कूलिंग के लिए भारी जल की आवश्यकता होती है। इसकी भरपाई इस बांध से होती है। बांध के कंट्रोल रूम से मिली जानकारी के अनुसार रविवार को बांध का जलस्तर 862 फीट पर पहुंच गया, जो अधिकतम से मात्र 8 फीट की दूरी पर है। जून में शुरू हुई बारिश से 31 जुलाई तक बांध केवल 6.50 फ़ीट ही भर सका था। 31 जुलाई को बांध का जलस्तर 839 फीट तक पहुंचा था। वहीं 18 अगस्त को 862 फ़ीट पर पहुंच गया है। इस तरह देखा जाए तो मात्र 18 दिन में ही बांध का जलस्तर 23 फीट बढ़ गया है। बांध की अधिकतम जलस्तर क्षमता 870 फीट है। इसके बाद ही बांध के फाटक खोले जाते हैं।