सोनभद्र। करीब छह साल पहले नाबालिग के साथ हुए दुष्कर्म के मामले में विशेष न्यायाधीश पाॅक्सो एक्ट की अदालत ने आरोपी को बरी कर दिया है। पीड़िता ने कोर्ट में सुनवाई के दौरान आरोपी की भूमिका से इन्कार किया। पीड़िता ने पारिवारिक रंजिश में ग्रामीणों के बहकावे में आकर दरोगा के कहे अनुसार दुष्कर्म का बयान देने की बात स्वीकार की।
नवंबर 2018 में राॅबर्ट्सगंज पुलिस ने नाबालिग की मां की तहरीर पर दुष्कर्म का केस दर्ज किया था। मां ने बताया था कि वह बेटे के साथ मायके गई थी। तब पड़ोसी ने घर में घुसकर बेटी के साथ दुष्कर्म किया था। पुलिस ने आरोपी बाल अपचारी के विरुद्ध आरोप पत्र दाखिल किया। इस मामले में विशेष सत्र न्यायाधीश पाॅक्सो एक्ट की अदालत में छह साल तक सुनवाई हुई। मामले में वादी मुकदमा, पीड़िता और गवाह लगातार बयान बदलते रहे। जिरह के दौरान पीड़िता और उसकी मां के बयानों में विरोधाभास दिखा। पीड़िता ने दुष्कर्म होने और आरोपी को पहचाने का दावा किया था, जबकि जिरह के दौरान बताया कि घटना के वक्त अंधेरा था। उसने आरोपी को नहीं पहचाना। आरोपी के घर से रंजिश थी। ऐसे में गांव वालों के बहकावे और दबाव में आकर उसने आरोपी का नाम लिया था। उसने दरोगा के कहने और सिखाने पर कोर्ट में बयान दिया था। उसने यह भी बताया कि उसने अपनी मां को यह कभी नहीं बताया था कि आरोपी ने ही उसके साथ दुष्कर्म किया था। पुलिस ने जो बयान दर्ज किया था, वह हमने नहीं दिया था। इस आधार पर न्यायालय ने बाल अपचारी को दोष मुक्त कर दिया।