फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sonebhadra News ›   UP cabinet expansion: Sanjay Gond became MLA after defeating son of former minister

यूपी कैबिनेट विस्तार: पूर्व मंत्री के बेटे को हराकर बने थे विधायक, अब मिला मंत्री पद का तोहफा, संजय गोंड को मंत्री बनाकर सरकार ने साधे एक तीर से तीन निशाने

Sun, 26 Sep 2021 11:41 PM IST
गीतार्जुन गौतम अमर उजाला नेटवर्क, सोनभद्र
अमर उजाला नेटवर्क, सोनभद्र Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Sun, 26 Sep 2021 11:41 PM IST
विज्ञापन
UP cabinet expansion: Sanjay Gond became MLA after defeating son of former minister
संजय गोंड - फोटो : अमर उजाला

योगी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में ओबरा विधायक संजीव सिंह उर्फ संजय गोंड के राज्य मंत्री पद की शपथ लेते ही समर्थक खुशी से झूम उठे। अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीट से पहली बार विधायक बने संजीव सिंह को मंत्री बनाकर सरकार ने एक तीर से कई निशाने साधे हैं। जिले के बहुसंख्य आदिवासी मतदाताओं के बीच गहरी पैठ बनाने की कोशिश की है तो यह संदेश भी दिया है कि भाजपा में एक आम कार्यकर्ता को भी बड़े से बड़ा ओहदा मिल सकता है।

विज्ञापन


मूल रूप से किसान परिवार से जुड़े संजीव गोंड की साढ़े चार वर्ष पहले तक कोई खास पहचान नहीं थी। सामान्य कार्यकर्ता के तौर पर ही वह विभिन्न कार्यक्रमों में शिरकत करते रहे। 2017 में जब ओबरा विधानसभा सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हुई तो अचानक उनकी लॉटरी खुल गई। भाजपा ने आनन-फानन अनुसूचित जनजाति वर्ग के चेहरे की तलाश शुरू की। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष देवेंद्र शास्त्री सहित पार्टी के अन्य क्षेत्रीय नेताओं के बराबर संपर्क में होने का लाभ संजीव गोंड़ को मिला।
विज्ञापन


पार्टी ने उन्हें अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया। पहली बार चुनाव मैदान में उतरे संजीव के सामने पूर्व मंत्री व दिग्गज आदिवासी नेता विजय सिंह गोंड के पुत्र वीरेंद्र सिंह गोंड को बसपा और सपा ने रवि सिंह गोंड को प्रत्याशी बनाया था। बेहद चौंकाने वाले नतीजे देते हुए संजीव ने जीत दर्ज कर सीट भाजपा की झोली में डाल दी थी। वह प्रदेश के एकमात्र आदिवासी विधायक हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित दूसरी सीट भी इसी जिले के दुद्धी विधानसभा की है। यह सीट भाजपा ने गठबंधन के सहयोगी अपना दल-एस को दी है। पहली बार विधायक बने संजीव सिंह गोंड को अब पार्टी ने राज्य मंत्री बनाकर विधानसभा चुनाव से पहले जिले को बड़ा तोहफा दिया है। यहां के लोग लंबे समय से मंत्री पद की मांग करते आ रहे हैं। यह बात दीगर है कि सरकार ने दूसरे विधायक के नाम पर मुहर लगाई है। राज्य मंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद जिले के कार्यकर्ता खुशी से झूम उठे। उनके डाला स्थित आवास पर बधाई देने वालों का तांता लगा रहा।

साढ़े तीन लाख आदिवासी मतदाताओं को साधने की कोशिश
जिले की चार विधानसभा क्षेत्रों में कुल साढ़े 13 लाख मतदाता हैं। इसमें ज्यादा करीब साढ़े तीन लाख मतदाता अनुसूचित जनजाति के हैं। इसमें भी गोंड, कोल, चेरो, बैगा की संख्या अधिक है। कोल बिरादरी से पकौड़ी लाल कोल अपना दल-एस से सांसद है। दुद्धी से अपना दल विधायक हरिराम चेरो जनजाति का प्रतिनिधित्व करते हैं। भाजपा ने गोंड जनजाति को साधकर बड़े मतदाता वर्ग को अपने खेमे में करने का दांव खेला है।

अब तक इस जाति पर सपा का अच्छा प्रभाव रहा है। सपा नेता व पूर्व विजय सिंह गोंड इन्हीं वोटों की बदौलत सात बार विधायक चुने जा चुक हैं। भाजपा के रणनीतिकारों की मानें तो गोंड बिरादरी का साथ मिलने से भाजपा की स्थिति ओबरा के साथ दुद्धी में भी मजबूत होगी। चंदौली, मिर्जापुर सहित अन्य जिलों में बसी गोंड जाति पर भी अच्छा प्रभाव होगा।

ब्लॉक प्रमुख पद पर फंसी थी प्रतिष्ठा
हाल ही में संपन्न हुए पंचायत चुनाव में चोपन विकासखंड से विधायक संजीव सिंह गोंड की पत्नी लीला देवी प्रमुख चुनी गई है। जिले के कुल दस में से आठ ब्लॉकों में निर्विरोध निर्वाचन हुआ। सिर्फ नगवां और चोपन में ही वोट पड़े थे। चोपन में विधायक की प्रतिष्ठा दांव पर थी। पार्टी नेताओं ने यहां भी निर्विरोध निर्वाचन के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया था, मगर बात नहीं बनी। हालांकि मतदान में भी लीला देवी की एकतरफा जीत हुई।

बेहद सामान्य पृष्ठभूमि से हैं संजीव गोंड
प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री बनाए गए संजीव सिंह उर्फ संजय गोंड की पृष्ठभूमि बेहद सामान्य है। उन्हें नजदीक से जानने वाले बताते हैं विधायक बनने से पहले संजीव सिंह कृषि व खनन क्षेत्र में पेटी कांट्रेक्टर थे। उनके चचेरे दादा रघुनाथ प्रसाद बिल्ली मारकुंडी ग्राम सभा के 35 वर्षों तक प्रधान रहे। इन्हीं के सानिध्य में रहकर संजीव सिंह ने राजनीति का ककहरा सीखा।

सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर शामिल होते रहे। ओबरा पीजी कॉलेज में पढ़ाई के दौरान पूर्व मंत्री विजय सिंह गोंड के संपर्क में आए। संजीव गोंड आरएसएस के सेवा समर्पण संस्थान से भी जुड़े रहे हैं। वह वनाधिकार समिति के अध्यक्ष भी रहे हैं। चार भाइयों में वह दूसरे नंबर पर हैं। सबसे बड़े भाई स्व. अनिल कुमार के बाद दो छोटे भाई श्यामनारायण सिंह गोंड व रामनारायण सिंह गोंड हैं। मां सविता देवी, पत्नी लीला देवी और तीन बेटे क्रमश: राहुल देव, अजय देव और अभिषेक देव हैं। तीनों बेटे अभी पढ़ाई कर रहे हैं।

सिर्फ 11 लोगों को फॉलो करते हैं संजीव, ट्विटर पर 121 फॉलोअर्स
ओबरा विधायक संजीव सिंह गोंड की सोशल मीडिया में सक्रियता बेहद कम है। जून 2020 में ट्वीटर से जुड़े विधायक का अंतिम पोस्ट छह दिन पहले का है। वह राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, पीएम मोदी, सीएम योगी, गृह मंत्री अमित शाह, पीएमओ, अमिताभ बच्चन, ज्योतिरादित्य सिंधिया, केशव प्रसाद मौर्य समेत सिर्फ 11 हस्तियों को फॉलो करते हैं। इस लिस्ट में कुछ माह पहले तक पीएम मोदी का भी नाम नहीं था। ट्विटर पर उनके सिर्फ 121 फॉलोअर्स हैं। फेसबुक पर भी उनके पोस्ट काफी कम हैं।

पार्टी का समर्पित कार्यकर्ता रहा हूं। एक कार्यकर्ता के तौर पर ही जिम्मेदारियों का निर्वहन करता रहा हूं। सौभाग्यशाली हूं कि पार्टी ने मुझ यह जिम्मेदारी सौंपी। उनकी उम्मीदों पर खरा उतरने की पूरी कोशिश करुंगा। जनता की सेवा और आदिवासी समाज के उत्थान के लिए जीजान लगा दूंगा। - संजीव गोंड , विधायक व राज्य मंत्री।

विधायक संजीव सिंह गोंड़ के मंत्री बनाए जाने से पार्टी को मजबूती मिलेगी। आदिवासी मतदाताओं के बीच पार्टी का जनाधार बढ़ेगा। जिले में पार्टी का हर कार्यकर्ता आह्लादित है। चुनाव से पहले सरकार ने बड़ा तोहफा दिया है। - अजीत चौबे, जिलाध्यक्ष, भाजपा।

संजीव सिंह गोंड का प्रोफाइल-
नाम: संजीव सिंह गोंड 
पिता: स्व. रामनखन सिंह गोंड 
मां: सविता देवी
पत्नी: लीला देवी (ब्लॉक प्रमुख चोपन)
संतान: तीन बेटे
उम्र: 46 वर्ष
शिक्षा: स्नातक
व्यवसाय: कृषि
राजनीतिक अनुभव: संघ से जुड़े रहे, वर्ष 2017 में पहली बार विधायक बने।

खबर मिलते ही लखनऊ गया परिवार
प्रदेश सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएं कई दिनों से चल रही थी। इसमें आदिवासी चेहरे के रुप में संजीव सिंह गोंड को शामिल करने की भी अटकलें लगाई जा रही थी। इसका संकेत पहले ही मिल गया था। पार्टी की ओर से उन्हें लखनऊ में ही रुके रहने का निर्देश दिया गया था। दोपहर तक उनके नाम को लेकर अटकलबाजियां जारी थी। खुद विधायक संजीव सिंह गोंड इससे बेखबर थे। हालांकि उनकी मुस्कान से जाहिर हो रहा था कि पार्टी से संकेत मिल चुका है। दोपहर बाद नाम की पुष्टि होते ही उनके डाला स्थित आवास से परिवार के लोग लखनऊ के लिए रवाना हो गए। जिले से बड़ी संख्या में समर्थक लखनऊ गए। लिहाजा शाम को मंत्री पद की शपथ लेने के दौरान आवास पर सन्नाटा पसरा रहा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed