{"_id":"68bf18b022c84669be0b7b28","slug":"two-lives-were-lost-due-to-negligence-mother-and-child-died-sonbhadra-news-c-194-1-son1018-134003-2025-09-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sonebhadra News: लापरवाही की भेंट चढ़ी दो जिंदगी, जच्चा-बच्चा की मौत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sonebhadra News: लापरवाही की भेंट चढ़ी दो जिंदगी, जच्चा-बच्चा की मौत
विज्ञापन
बभनी। बभनी सीएचसी पर महिला और गर्भ में पल रहे बच्चे की सोमवार को मौत हो गई। महिला को प्रसव के लिए सीएचसी लाया गया था। डॉक्टरों के मुताबिक गर्भ में ही बच्चे की मौत हो गई थी। खून की कमी और हाई बीपी के कारण प्रसूता ने भी दम तोड़ दिया। विभाग ने इसके लिए परिजनों की लापरवाही को जिम्मेदार बताया है। बीजपुर थाना क्षेत्र के रजमिलान गांव निवासी देवमती (32) एक सप्ताह पूर्व बभनी थाना क्षेत्र के मजीठ गांव स्थित मायके आई थी। पति रामसूरत के मुताबिक सोमवार को सुबह उसे प्रसव पीड़ा शुरू हुई तो 7.55 बजे अरझट स्थित स्वास्थ्य केंद्र पर ले जाया गया। वहां उसे मृत बच्चा पैदा हुआ। इसके बाद उसकी तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी। आनन-फानन एंबुलेंस के जरिये उसे सीएचसी बभनी लाया गया, जहां पहुंचने के कुछ देर बाद ही उसकी भी मौत हो गई। अधीक्षक डाॅ. राजन सिंह ने बताया कि उसे सीएचसी पर सुबह 9.10 बजे लाया गया था। उसकी हालत काफी खराब थी। चेकअप करने पर पता चला कि उसका रक्तचाप काफी बढ़ा हुआ है। खून भी काफी कम था। वह मुंह से आवाज नहीं निकाल रही थी। आने के महज 10 मिनट बाद उसके मुंह से झाग निकलने लगा। उसे समुचित उपचार मुहैया कराया जाता, इससे पहले ही उसकी मौत हो गई।
आठ साल दोबारा मिला था मातृत्व सुख का मौका
एक तरफ सरकारी आंकड़ों में कल्याणकारी योजनाओं का संचालन चकाचक होने का दावा किया जाता है। वहीं, दूसरी तरफ एक ऐसी महिला ने दम तोड़ दिया था, जिससे मातृत्व सुख छिनने के आठ साल बाद दोबारा मौका मिला था। पति ने बताया कि आठ साल पहले भी प्रसव के समय उसके बच्चे की मौत हो गई थी। इस बार जच्चा-बच्चा दोनों की मौत हो गई। पति के अनुसार, पूरे गर्भकाल में उसे सिर्फ एक बार टीका लगाया गया था।
बताते चलें कि प्रत्येक गांव में आशा कार्यकर्ता के साथ ही क्षेत्रवार एएनएम को भी नियुक्त किया गया है। साथ ही उन्हें गांव में गर्भवती महिलाओं का रिकाॅर्ड, टीकाकरण, समुचित देखभाल उपलब्ध कराने-निगरानी की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी। बावजूद जिस तरह से जच्चा-बच्चा की मौत सामने आई है, उसने बेहतरी के किए जाने वाले दावों पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
आठ साल दोबारा मिला था मातृत्व सुख का मौका
एक तरफ सरकारी आंकड़ों में कल्याणकारी योजनाओं का संचालन चकाचक होने का दावा किया जाता है। वहीं, दूसरी तरफ एक ऐसी महिला ने दम तोड़ दिया था, जिससे मातृत्व सुख छिनने के आठ साल बाद दोबारा मौका मिला था। पति ने बताया कि आठ साल पहले भी प्रसव के समय उसके बच्चे की मौत हो गई थी। इस बार जच्चा-बच्चा दोनों की मौत हो गई। पति के अनुसार, पूरे गर्भकाल में उसे सिर्फ एक बार टीका लगाया गया था।
विज्ञापन
बताते चलें कि प्रत्येक गांव में आशा कार्यकर्ता के साथ ही क्षेत्रवार एएनएम को भी नियुक्त किया गया है। साथ ही उन्हें गांव में गर्भवती महिलाओं का रिकाॅर्ड, टीकाकरण, समुचित देखभाल उपलब्ध कराने-निगरानी की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी। बावजूद जिस तरह से जच्चा-बच्चा की मौत सामने आई है, उसने बेहतरी के किए जाने वाले दावों पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
विज्ञापन