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स्वतंत्रता आंदोलन में आदिवासियों का रहा है अहम योगदान
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भारतीय स्वाधीनता आंदोलन में आदिवासियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इन्होंने हर विदेशी आक्रांताओं के अत्याचारों का जमकर मुकाबला किया। इनके संघर्षों की कहानी भारतीय इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में दर्ज है। यह बातें बृहस्पतिवार को बभनी ब्लाक सभागार में संगीत नाटक अकादमी नई दिल्ली और जनजातीय शोध एवं विकास संस्थान की ओर से आयोजित गोष्ठी में इतिहासकार दीपक कुमार केशरवानी ने कही।
उत्तर प्रदेश राज्य के गोंड आदिवासियों की परंपरागत नृत्य, गीत की प्रस्तुति और संकलन विषयक संगोष्ठी में रामायण कल्चर मैपिंग योजना के डिस्ट्रिक्ट कोआर्डिनेटर दीपक कुमार ने कहा कि चार राज्यों से घिरे सोनभद्र पर आदिवासी गोंड राजाओं का शासन आदिकाल से रहा है। आदिवासी संस्कृति, कला, साहित्य से भरपूर जिला आदिवासियों की आदि भूमि रही है। यहां के जंगलों, पहाड़ों, नदियों, के किनारों पर अवस्थित गुफाओं, कंदराओं में निर्मित गुफा चित्रों के कलाकारों के बंशधर आज की आदिवासी जातियां है। इनकी संस्कृति में द्रविड़ सभ्यता जीवंत है। गोंडवाना लैंड पर गोड राजाओं का शासन रहा है। आजादी के बाद भारतीय संविधान में आदिवासी को जनजाति की मान्यता प्रदान कर इन्हें सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक तौर पर मजबूत बनाया गया। विशिष्ट अतिथि रहे बरवाटोला के ग्राम प्रधान राम प्रताप ने कहा कि वर्तमान आदिवासी संस्कृति को विलुप्त होने से बचाने के लिए भावी पिढ़ी का आगे आना होगा। अध्यक्षता संस्थान के सचिव/प्रबंधक बृजभान मरावी ने किय। इस अवसर पर हरी प्रसाद पच्ची, विनोद कुमार, पवन कुमार, मुन्नी लाल, संदीप कुमार, तारा सिंह, संगीता देवी, प्रमिला देवी आदि मौजूद रहे।
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उत्तर प्रदेश राज्य के गोंड आदिवासियों की परंपरागत नृत्य, गीत की प्रस्तुति और संकलन विषयक संगोष्ठी में रामायण कल्चर मैपिंग योजना के डिस्ट्रिक्ट कोआर्डिनेटर दीपक कुमार ने कहा कि चार राज्यों से घिरे सोनभद्र पर आदिवासी गोंड राजाओं का शासन आदिकाल से रहा है। आदिवासी संस्कृति, कला, साहित्य से भरपूर जिला आदिवासियों की आदि भूमि रही है। यहां के जंगलों, पहाड़ों, नदियों, के किनारों पर अवस्थित गुफाओं, कंदराओं में निर्मित गुफा चित्रों के कलाकारों के बंशधर आज की आदिवासी जातियां है। इनकी संस्कृति में द्रविड़ सभ्यता जीवंत है। गोंडवाना लैंड पर गोड राजाओं का शासन रहा है। आजादी के बाद भारतीय संविधान में आदिवासी को जनजाति की मान्यता प्रदान कर इन्हें सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक तौर पर मजबूत बनाया गया। विशिष्ट अतिथि रहे बरवाटोला के ग्राम प्रधान राम प्रताप ने कहा कि वर्तमान आदिवासी संस्कृति को विलुप्त होने से बचाने के लिए भावी पिढ़ी का आगे आना होगा। अध्यक्षता संस्थान के सचिव/प्रबंधक बृजभान मरावी ने किय। इस अवसर पर हरी प्रसाद पच्ची, विनोद कुमार, पवन कुमार, मुन्नी लाल, संदीप कुमार, तारा सिंह, संगीता देवी, प्रमिला देवी आदि मौजूद रहे।
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