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पारेषण लाइन में फाल्ट से दिक्कत
सोनभद्र
Updated Wed, 02 Nov 2016 11:17 PM IST
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पॉवर कट
- फोटो : अमर उजाला
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अनपरा सी (लैंको) से उन्राव के लिए गई 765केवीए के पारेषण लाइन में बुधवार को बड़ा फाल्ट आने से ऊर्जांचल की बिजली परियोजनाओं को विद्युत उत्पादन में दिक्कत का सामना करना पड़ा। अनपरा सी में जहां सुबह से ही 470 मेगावाट की थर्मल बैकिंग बनी रही। वहीं राज्य सेक्टर की अनपरा परियोजना अनपरा सहित अन्य परियोजनाओं में सुबह चार सौ मेगावाट के करीब रही थर्मल बैकिंग शाम चार बजते-बजते 873 पर पहुंच गई। इसके चलते एनटीपीसी सिंगरौली में भी तीन सौ मेगावाट के करीब थर्मल बैकिंग बनी रही।
बताते चलें कि 765 केवी वाली पारेषण लाइन का जुड़ाव अनपरा सी के साथ अनपरा और एनटीपीसी सिंगरौली से बना हुआ है और जरूरत के हिसाब से इस लाइन के रास्ते से उत्पादित होने वाली बिजली उन्नाव स्थित ग्रिड जंक्शन को भेजी जाती है। बुधवार को सुबह से ही फाल्ट की स्थिति होने के कारण थोड़ी-थोड़ी थर्मल बैकिंग की स्थिति बनी रही।
दोपहर तक फाल्ट दूर न होने पर पारेषण के अधिकारियों को दोपहर बाद दो बजे से शाम छह बजे तक शट डाउन रखना पड़ा। इसके चलते थर्मल बैकिंग तेजी से बढ़ गई। अनपरा सीजीएम त्रिभुवन तिवारी ने बताया कि लाइन में दिक्कत को देखते हुए उनकी परियोजनाओं में चार सौ मेगावाट से अधिक की थर्मल बैकिंग करानी पड़ी है।
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उधर, लैंको प्रबंधन के मुताबिक उनके यहां शाम तक 470 मेगावाट की थर्मल बैकिंग बनी हुई थी।
शक्तिगर में भी उत्पादन घटाने का सिलसिला जारी था। लाइन पूरी तरह दुरुस्त होने के बाद ही स्थिति पटरी पर आने की उम्मीद थी।
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बताते चलें कि 765 केवी वाली पारेषण लाइन का जुड़ाव अनपरा सी के साथ अनपरा और एनटीपीसी सिंगरौली से बना हुआ है और जरूरत के हिसाब से इस लाइन के रास्ते से उत्पादित होने वाली बिजली उन्नाव स्थित ग्रिड जंक्शन को भेजी जाती है। बुधवार को सुबह से ही फाल्ट की स्थिति होने के कारण थोड़ी-थोड़ी थर्मल बैकिंग की स्थिति बनी रही।
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दोपहर तक फाल्ट दूर न होने पर पारेषण के अधिकारियों को दोपहर बाद दो बजे से शाम छह बजे तक शट डाउन रखना पड़ा। इसके चलते थर्मल बैकिंग तेजी से बढ़ गई। अनपरा सीजीएम त्रिभुवन तिवारी ने बताया कि लाइन में दिक्कत को देखते हुए उनकी परियोजनाओं में चार सौ मेगावाट से अधिक की थर्मल बैकिंग करानी पड़ी है।
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उधर, लैंको प्रबंधन के मुताबिक उनके यहां शाम तक 470 मेगावाट की थर्मल बैकिंग बनी हुई थी।
शक्तिगर में भी उत्पादन घटाने का सिलसिला जारी था। लाइन पूरी तरह दुरुस्त होने के बाद ही स्थिति पटरी पर आने की उम्मीद थी।