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Sonebhadra News: वीआईपी ड्यूटी में गए हैं ट्रैफिक कर्मी, चौराहों-तिराहों की जिम्मेदारी संभाल रहे होमगार्ड
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नगर की यातायात व्यवस्था होमगार्ड और पीआरडी जवानों के भरोसे है। प्रमुख चौराहों-तिराहों और हाईवे पर भी यही जवान ड्यूटी निभाते हैं। प्रशिक्षित कर्मियों के अभाव में ट्रैफिक मनमाने तरीके से चलता रहता है। नतीजा अलग-अलग इलाकों में अक्सर जाम की स्थिति बनती है।
जिले में यातायात पुलिस के पास एक निरीक्षक, चार एसआई, 18 हेड कांस्टेबल और 54 कांस्टेबल के पद स्वीकृत हैं। यह पद सृजन भी आबादी के पुराने मानकों के तहत हुआ है। इन सृजित पदों के सापेक्ष कांस्टेबल के अधिकांश पद खाली हैं। जो तैनात हैं, उन्हें भी पिछले डेढ़ माह से महाकुंभ ड्यूटी में भेजा गया है।
ऐसे में ट्रैफिक व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी होमगार्ड के जवानों और पीआरडी पर छोड़ी गई है। नगर के बढ़ौली चौराहा, मेन चौक, महिला थाना तिराहा, धर्मशाला चौराहा, चंडी तिराहा, उरमौरा सहित अन्य प्रमुख स्थानों पर वही ड्यूटी दे रहे हैं। उनके पास किसी कार्रवाई का अधिकार नहीं है।
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वह वाहन चालकों को बिना रुके आगे बढ़ने का इशारा करते रहते हैं, लेकिन कई बार मनबढ़ वाहन सवार उनकी अनसुनी कर बीच सड़क वाहन खड़ी कर देते हैं। इसके चलते आम राहगीरों को जाम की समस्या से जूझना पड़ता है। कई बार वाहन स्वामी व अतिक्रमणकारी उन्हीं पर रौब गांठने लगते हैं, ऐसे में होमगार्ड जवान भी मौन साध लेते हैं।
वर्षों से बंद पड़े हैं ट्रैफिक लाइट, बूथ पर रहते हैं मवेशी
रेणुकूट नगर में यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए ट्रैफिक सिग्नल लगाए गए थे। वर्षों से यह सिग्नल बंद पड़े हैं। इन्हें चालू करने में किसी की रुचि नहीं है। यहां मेन चौराहे पर यातायात पुलिस के लिए बने बूथ पर भी अक्सर कोई कर्मी नहीं रहता है। ऐसे में बूथ पर मवेशी अपना ठिकाना बनाए रहते हैं। औद्योगिक इकाइयों में शिफ्ट परिवर्तन के दौरान एक साथ कर्मचारियों के निकलने से जाम की स्थिति बन जाती है। पिछले कुछ महीनों से रेणुकूट नगर लगातार भीषण जाम से जूझ रहा है। इसके चलते कई बार कर्मचारी व छात्र-छात्रा समय से स्कूल नहीं पहुंच पाते। ट्रैफिक सिग्नल होने से यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाने में मदद मिलती।
नगर की यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए सभी प्रमुख स्थानों पर ड्यूटी लगाई जाती है। इधर कुछ दिनों से कर्मचारियों के वीआईपी ड्यूटी में जाने के कारण होमगार्ड और पीआरडी की मदद ली जा रही है, लेकिन इससे यातायात व्यवस्था में कोई बाधा नहीं है। अन्य जो भी कमियां हैं, उसे दूर कराने के लिए प्रयास किया जा रहा है।
-अविनाश कुमार सिंह, यातायात निरीक्षक।
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जिले में यातायात पुलिस के पास एक निरीक्षक, चार एसआई, 18 हेड कांस्टेबल और 54 कांस्टेबल के पद स्वीकृत हैं। यह पद सृजन भी आबादी के पुराने मानकों के तहत हुआ है। इन सृजित पदों के सापेक्ष कांस्टेबल के अधिकांश पद खाली हैं। जो तैनात हैं, उन्हें भी पिछले डेढ़ माह से महाकुंभ ड्यूटी में भेजा गया है।
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ऐसे में ट्रैफिक व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी होमगार्ड के जवानों और पीआरडी पर छोड़ी गई है। नगर के बढ़ौली चौराहा, मेन चौक, महिला थाना तिराहा, धर्मशाला चौराहा, चंडी तिराहा, उरमौरा सहित अन्य प्रमुख स्थानों पर वही ड्यूटी दे रहे हैं। उनके पास किसी कार्रवाई का अधिकार नहीं है।
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वह वाहन चालकों को बिना रुके आगे बढ़ने का इशारा करते रहते हैं, लेकिन कई बार मनबढ़ वाहन सवार उनकी अनसुनी कर बीच सड़क वाहन खड़ी कर देते हैं। इसके चलते आम राहगीरों को जाम की समस्या से जूझना पड़ता है। कई बार वाहन स्वामी व अतिक्रमणकारी उन्हीं पर रौब गांठने लगते हैं, ऐसे में होमगार्ड जवान भी मौन साध लेते हैं।
वर्षों से बंद पड़े हैं ट्रैफिक लाइट, बूथ पर रहते हैं मवेशी
रेणुकूट नगर में यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए ट्रैफिक सिग्नल लगाए गए थे। वर्षों से यह सिग्नल बंद पड़े हैं। इन्हें चालू करने में किसी की रुचि नहीं है। यहां मेन चौराहे पर यातायात पुलिस के लिए बने बूथ पर भी अक्सर कोई कर्मी नहीं रहता है। ऐसे में बूथ पर मवेशी अपना ठिकाना बनाए रहते हैं। औद्योगिक इकाइयों में शिफ्ट परिवर्तन के दौरान एक साथ कर्मचारियों के निकलने से जाम की स्थिति बन जाती है। पिछले कुछ महीनों से रेणुकूट नगर लगातार भीषण जाम से जूझ रहा है। इसके चलते कई बार कर्मचारी व छात्र-छात्रा समय से स्कूल नहीं पहुंच पाते। ट्रैफिक सिग्नल होने से यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाने में मदद मिलती।
नगर की यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए सभी प्रमुख स्थानों पर ड्यूटी लगाई जाती है। इधर कुछ दिनों से कर्मचारियों के वीआईपी ड्यूटी में जाने के कारण होमगार्ड और पीआरडी की मदद ली जा रही है, लेकिन इससे यातायात व्यवस्था में कोई बाधा नहीं है। अन्य जो भी कमियां हैं, उसे दूर कराने के लिए प्रयास किया जा रहा है।
-अविनाश कुमार सिंह, यातायात निरीक्षक।