सोनभद्र में एटीएम में डिवाइस लगाकर करते थे ठगी, 4 राज्यों में देते थे वारदात को अंजाम
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यूपी, एमपी, बिहार और झारखंड सहित अन्य राज्यों में एटीएम कार्ड की क्लोनिंग कर लोगों के खाते से पैसे निकालने वाले गिरोह के तीन सदस्य बुधवार को मध्य प्रदेश की सिंगरौली पुलिस हत्थे चढ़ गए। अंतरराज्यीय गिरोह का मुख्य आरोपी फरार हो गया। उसकी तलाश के लिए एसपी सिंगरौली ने विशेष टीम लगाई है।
एसपी सिंगराली वीरेंद्र कुमार सिंह ने गुरुवार को पत्रकारों से बताया कि तीनों आरोपियों को बैढ़न कोतवाली क्षेत्र से पकड़ा गया। बताया कि काफी समय से शिकायत मिल रही थी कि बिना पिन कोड बताए, बिना कार्ड नंबर किसी को बताए खाते से पैसा निकल जा रहा है। इसे गंभीरता से लेते हुए मुकदमा दर्ज किया गया। उसी के आधार पर मामले की जांच शुरू हुई।
जब पड़ताल की गई तो अंतरराज्यीय गिरोह के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद विभिन्न स्थानों के एटीएम में लगे सीसीटीवी कैमरे का फुटेज देखा गया। उसी आधार पर पहचान करके आरोपियों की तलाश की जाने लगी। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग पांच टीमें लगाईं गई थीं।
इसी बीच थाना प्रभारी बैढ़न को सूचना मिली कि बिहार की तरफ से इन्हीं आरोपियों की गाड़ी आ रही है। मुखबिर के बताए गए स्थान पर पहुंचकर कार को रोका गया तो स्विफ्ट डिजायर कार से तीन आरोपी पकड़े गए। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने बताया कि एटीएम में डिवाइस लगा देते थे। साथ ही पीछे से एक व्यक्ति नंबर देख लेता था।
उसी से कार्ड क्लोनिंग करके पैसे ट्रांसफर कर लेते थे। गिरफ्तार आरोपियों में शुभम कुमार उर्फ गुलशन कुमार निवासी रोशना थाना फतेपुर जिला गया बिहार, कन्हैया कुमार भूमियार निवासी मोहब्बतपुर थाना सेखोपुर सराय जिला रोखपुरा बिहार, गौरव कुमार निवासी ग्राम दौलतपुरा थाना सीतामढ़ी जिला नवादा बिहार शामिल हैं। एसपी ने पुलिस टीम को पुरस्कार देने की भी बात कही।
ऐसे करते थे कार्ड की क्लोनिंग
पुलिस के अनुसार आरोपियों ने जो बताया वह चौंकाने वाला है। बताया गया कि आरोपी खाली एटीएम की तलाश करते थे। जिस एटीएम में गार्ड नहीं रहता था और एटीएम खाली रहता था, वहां जाकर एटीएम का डिसप्ले खोलकर एटीएम में मिनी डी-एक्स-5 स्कैनर डिवाइस लगा देते थे।
जब कोई व्यक्ति एटीएम में पैसे निकालने आता तो मशीन में एटीएम कार्ड डालने पर उसका पूरा डाटा स्कैनर डिवाइस में ट्रांसफर हो जाता था। आरोपियों में से एक पैसा निकालने वाले के पीछे खड़े होकर उसका गोपनीय पिन नंबर नोट कर लेता था और डिवाइस से एटीएम क्लोनिंग कर नया एटीएम कार्ड बना लेते थे। इसके बाद संबंधित खाता धारक के खाते से पैसा क्लोन किए हुए एटीएम के माध्यम से निकाल लेते थे।