स्वच्छ भारत अभियान को सफल बनाने के लिए शौचालय निर्माण में लाखों खर्च के बाद भी स्थिति सुधर नहीं पाई है। इसकी बड़ी वजह शौचालय निर्माण में लापरवाही भी है। म्योरपुर ब्लाक के रजमिलान गांव में इसकी बानगी देखी जा सकती है। यहां बड़ी संख्या में शौचालय अधूरे पड़े हैं। जो बने भी हैं, उनका दरवाजा चोर उखाड़ ले गए या सड़ गए। अब उनमें लकड़ी-भूसा और उपला रखा जा रहा है। ग्रामीण खुले में शौच के लिए जाने के लिए विवश हैं।
पिछले पंचवर्षीय में ग्रामीण लालमनी और जनसाय के नाम से बने शौचालय में दरवाजा, खिड़की, कमोड, पाइप, गड्ढा नहीं है। इस कारण उपयोग लायक नहीं है। पूर्व ग्राम प्रधान जगरनाथ के अनुसार उनके कार्यकाल में कुल 243 इज्जत घर बने थे। कुछ दरवाजा चोर ले गए, वहीं कुछ सड़ गल कर टूट चुके हैं या फिर अधूरे पड़े हैं। शौचालय का ग्रामीण उपयोग जलावनी लकड़ी, भूसा रखने या बकरी आदि बांधने के काम मे कर रहे हैं। बताया जाता है कि ग्रामीण पुरुष महिलाएं बच्चें पहले जमाने की तरह शौच के लिए जंगल और खेत मे जाकर नित्यक्रिया करते हैं। इसबाबत तत्कालीन ग्राम पंचायत अधिकारी अखिलेश दुबे कहते हैं कि शौचालय की धनराशि लाभार्थी के खाते में भेजी जाती है। जो लाभार्थी पैसे का दुरुपयोग किए हैं उनका आज भी शौचालय अधूरा पड़ा है।