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कंठ में रहे मुलायम, मंच से गायब
संवाददाता अमर उजाला सोनभद्र
Updated Tue, 31 Mar 2015 11:33 PM IST
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समाजवादी पार्टी की राजनीति बदल रही है। इसका एहसास अनपरा तापीय परियोजना के सीआईएसएफ ग्राउंड में मुख्यमंत्री की सभा में हुआ।
मंच से सपा मुखिया मुलायम सिंह की तस्वीर तो गायब थी ही, बिरहा (लोकगीत) के साथ बैंड की छौंक भी दिखाई दी। सूबे की सरकार और सरकार चलाने वालों पर अपनी तीखी टिप्पणियों के लिए चर्चा में रहे सपा मुखिया को भले ही मंच पर जगह न दी गई हो,
लेकिन मुश्किल यह है कि वह जनता के कंठ में अब भी विराजते हैं। सभा के दौरान जितने नारे सीएम अखिलेश यादव के नाम के लगे उससे ज्यादा मुलायम जिंदाबाद लगा।
अनपरा डी परियोजना के उद्घाटन के बाद जिस मंच पर मुख्यमंत्री को भाषण देना था, उसके बैकड्राप पर तीन तस्वीरें छपी थीं।
सीएम अखिलेश यादव के बराबर की तस्वीर उनके चाचा और लोक निर्माण विभाग के कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव की थी जबकि ऊपर उससे छोटी तस्वीर ऊर्जा राज्यमंत्री यासर शाह की लगाई गई थी।
आमतौर पर ऐसे मंच पर सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष की तस्वीर जरूर होती है। यहां उसे न देखकर पार्टी नेता भी दबी जुबान से चर्चा कर रहे थे।
सीएम के आगमन से पहले सपा की परंपरा के मुताबिक बिरहा (लोकगीत) गायकों ने मंच संभाल रखा था। सीएम के आने से पहले तक कारवां चला है जग में समाजवाद का, जैसे गीत गाए जा रहे थे।
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लोक गायकों के साथ ढोल, नाल, करताल, हारमोनियम वाले संगत कर रहे थे लेकिन मंच पर आक्टोपैड, कीबोर्ड और गिटार देख कर लोगों के मन में जिज्ञासा भी थी कि यह सब क्यों है? खैर जैसे ही मुख्यमंत्री के आने का समय हुआ।
गाजियाबाद के घुमक्कड़ बैंड के कलाकार मंच पर आ गए और पाप तराना छेड़ दिया। लोकसभा चुनाव सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव को केंद्र में रखकर लड़ा गया था।
पार्टी तब उनको प्रधानमंत्री बनाने के लिए कार्यकर्ताओं से एकजुट होने की अपील कर रही थी। अब राजनीति का तकाजा बदल गया है। अब 2017 के विधानसभा चुनाव की तैयारी चल रही है।
ऐसे में पार्टी मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को मुख्य चेहरा बनाना चाहती है और पार्टी की अंदरूनी मजबूती के लिए शिवपाल सिंह यादव को अहम मानती है।
भले ही मंच पर मुलायम की तस्वीर न हो लेकिन अभी सपा के चाहने वालों के कंठ में वह रचेबसे हैं। पूर्व जिलाध्यक्ष रामनिहोर यादव और जिला महासचिव विजय यादव ने सीएम के आने से पहले मंच को गरमाने के लिए 10 मिनट तक जो नारे लगवाए तो उसमें भी मुलायम का ही नाम प्रमुख रहा।
राजनीतिक जरूरत के लिहाज से फिलहाल नेताजी को मंच से भले कोई हटा दे लेकिन कंठ से उन्हें हटाना आसान नहीं है। नेताजी के रास्ते पर चलना पार्टी की मजबूरी है। सीएम ने अपने भाषण में कहा भी कि वह सौभाग्यशाली हैं कि नेताजी ने जो योजनाएं शुरू की थीं, उन्हें वह पूरा कर रहे हैं।
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मंच से सपा मुखिया मुलायम सिंह की तस्वीर तो गायब थी ही, बिरहा (लोकगीत) के साथ बैंड की छौंक भी दिखाई दी। सूबे की सरकार और सरकार चलाने वालों पर अपनी तीखी टिप्पणियों के लिए चर्चा में रहे सपा मुखिया को भले ही मंच पर जगह न दी गई हो,
लेकिन मुश्किल यह है कि वह जनता के कंठ में अब भी विराजते हैं। सभा के दौरान जितने नारे सीएम अखिलेश यादव के नाम के लगे उससे ज्यादा मुलायम जिंदाबाद लगा।
अनपरा डी परियोजना के उद्घाटन के बाद जिस मंच पर मुख्यमंत्री को भाषण देना था, उसके बैकड्राप पर तीन तस्वीरें छपी थीं।
सीएम अखिलेश यादव के बराबर की तस्वीर उनके चाचा और लोक निर्माण विभाग के कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव की थी जबकि ऊपर उससे छोटी तस्वीर ऊर्जा राज्यमंत्री यासर शाह की लगाई गई थी।
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आमतौर पर ऐसे मंच पर सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष की तस्वीर जरूर होती है। यहां उसे न देखकर पार्टी नेता भी दबी जुबान से चर्चा कर रहे थे।
सीएम के आगमन से पहले सपा की परंपरा के मुताबिक बिरहा (लोकगीत) गायकों ने मंच संभाल रखा था। सीएम के आने से पहले तक कारवां चला है जग में समाजवाद का, जैसे गीत गाए जा रहे थे।
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लोक गायकों के साथ ढोल, नाल, करताल, हारमोनियम वाले संगत कर रहे थे लेकिन मंच पर आक्टोपैड, कीबोर्ड और गिटार देख कर लोगों के मन में जिज्ञासा भी थी कि यह सब क्यों है? खैर जैसे ही मुख्यमंत्री के आने का समय हुआ।
गाजियाबाद के घुमक्कड़ बैंड के कलाकार मंच पर आ गए और पाप तराना छेड़ दिया। लोकसभा चुनाव सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव को केंद्र में रखकर लड़ा गया था।
पार्टी तब उनको प्रधानमंत्री बनाने के लिए कार्यकर्ताओं से एकजुट होने की अपील कर रही थी। अब राजनीति का तकाजा बदल गया है। अब 2017 के विधानसभा चुनाव की तैयारी चल रही है।
ऐसे में पार्टी मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को मुख्य चेहरा बनाना चाहती है और पार्टी की अंदरूनी मजबूती के लिए शिवपाल सिंह यादव को अहम मानती है।
भले ही मंच पर मुलायम की तस्वीर न हो लेकिन अभी सपा के चाहने वालों के कंठ में वह रचेबसे हैं। पूर्व जिलाध्यक्ष रामनिहोर यादव और जिला महासचिव विजय यादव ने सीएम के आने से पहले मंच को गरमाने के लिए 10 मिनट तक जो नारे लगवाए तो उसमें भी मुलायम का ही नाम प्रमुख रहा।
राजनीतिक जरूरत के लिहाज से फिलहाल नेताजी को मंच से भले कोई हटा दे लेकिन कंठ से उन्हें हटाना आसान नहीं है। नेताजी के रास्ते पर चलना पार्टी की मजबूरी है। सीएम ने अपने भाषण में कहा भी कि वह सौभाग्यशाली हैं कि नेताजी ने जो योजनाएं शुरू की थीं, उन्हें वह पूरा कर रहे हैं।