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Sonebhadra News: जिले में डॉक्टरों के 155 पद, सिर्फ 80 ही दे रहे सेवा, 31 डॉक्टर लापता

Wed, 18 Jun 2025 12:23 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 18 Jun 2025 12:23 AM IST
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There are 155 posts of doctors in the district, only 80 are serving, 31 doctors are missing
जिले में करीब 45 फीसदी चिकित्सकों के पद रिक्त हैं। 155 डॉक्टरों के सापेक्ष सिर्फ 80 चिकित्सक ही सेवा दे रहे हैं। 31 डॉक्टर लापता हैं तो 10 पीजी करने गए हैं। इससे लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं का सही से लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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जिला अस्पताल के मेडिकल काॅलेज में परिवर्तित होने के बावजूद 60 से 65 फीसदी पद रिक्त हैं। सबसे खराब स्थिति ग्रामीण क्षेत्र के सीएचसी-पीएचसी की है। जिले में 10 सीएचसी और 40 से अधिक पीएचसी हैं।
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इन पर जिले के करीब 23 लाख की आबादी के उपचार का जिम्मा है। यहां नियमित चिकित्सकों के कुल 155 पद स्वीकृत हैं। इनके सापेक्ष 123 की तैनाती है। इसमें 31 डॉक्टर वर्षों से लापता हैं, जबकि 10 से अधिक डॉक्टर पीजी करने गए हैं।
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इस तरह मौजूदा समय में सिर्फ 80 से 85 डॉक्टर ही ड्यूटी दे रहे हैं। नियमित स्त्री रोग विशेषज्ञ के कुल 13 पद के सापेक्ष तीन की ही तैनाती है। सीएचसी-पीएचसी पर 15 बाल रोग विशेषज्ञों के नियमित पद हैं। इसमें 11 की तैनाती है।
रेडियोलॉजिस्ट के करीब 10 पद रिक्त हैं। बेहोशी के चिकित्सक के 13 पदों पर सिर्फ चार तैनात हैं। सर्जन के 11 नियमित पदों में भी सिर्फ दो नियुक्त हैं। इससे सामान्य प्रसव तो अनेक अव्यवस्थाओं के बाद हो जाता है लेकिन सीजर के लिए जिला मुख्यालय जाना ही मजबूरी होती है।
कई बार छोटे ऑपरेशन के लिए भी मरीज को रेफर कर दिया जाता है। मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है। दूरी की वजह से कई बार मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं।



एक एमबीबीएस के भरोसे सीएचसी
सरकार की ओर से जिले के दुरूह इलाकों में स्थित सीएचसी और पीएचसी पर चिकित्सकों की तैनाती पर जोर दिया जा रहा है। हालांकि कभी नक्सल प्रभावित रहे कोन ब्लॉक में सीएचसी पर कोई भी विशेषज्ञ तैनात नहीं है। यहां एक एमबीबीएस चिकित्सक के भरोसे उपचार चल रहा है। इस अस्पताल पर करीब दो लाख की आबादी का भार है। ऐसे में यहां बाल रोग, महिला रोग, नेत्र रोग सहित अन्य विशेषज्ञ तैनात न होने के कारण लोगों को चोपन सीएचसी में जाना होता है।

रेफरल हैं सीएचसी-पीएचसी
जिले के अस्पतालों में मानव संसाधनों की भारी कमी है। विशेषज्ञ चिकित्सकों का अभाव व्यवस्था पर भारी पड़ रहा है। इससे मरीजों को उपचार के लिए गैर जनपद का सहारा लेना पड़ता है। पूर्व में कुछ विशेषज्ञ चिकित्सकों के तबादले का सीधा असर मरीजों पर पड़ रहा है। शाम होने के बाद यहां चिकित्सक और कर्मी कम ही नजर आते हैं। कई स्थानों पर अस्पतालों में चिकित्सक बिना किसी अवकाश और सूचना के गायब रहते हैं। ऐसे में उपचार भी प्रभावित होता है।

हड्डी रोग विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं
जिले में सबसे अधिक लोग सड़क हादसों में जान गंवाते हैं। हालांकि जिले में किसी सीएचसी और ब्लॉक पीएचसी पर एक भी हड्डी रोग विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में 200 किमी के दायरे में फैले जिले में सड़क दुर्घटनाओं के दौरान किस तरह लोगों का उपचार मिलता होगा। इसका भी अंदाजा लगाया जा सकता है।


जिले में चिकित्सकों की कमी है, मगर उपलब्ध संसाधनों से बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने का पूरा प्रयास रहता है। रिक्त पदों पर तैनाती के लिए उच्चाधिकारियों को पत्राचार किया गया है। कुछ डॉक्टर मिले भी हैं।
-डॉ. अश्वनी कुमार, सीएमओ।
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