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Sonebhadra News: 24 घंटे में एक मीटर बढ़ा रिहंद और धंधरौल बांध का जलस्तर

Thu, 17 Jul 2025 11:39 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 17 Jul 2025 11:39 PM IST
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The water level of Rihand and Dhandhraul dam increased by one meter in 24 hours
सोनभद्र। पहाड़ी क्षेत्रों में दो दिनों की भारी बारिश से जिले के जलाशय लबालब हो गए हैं। नगवां बांध 94 तो ओबरा 95 फीसदी तक भर गया है। रिहंद और धंधरौल बांध में भी महज 24 घंटे के अंदर एक मीटर पानी बढ़ गया है। ऐहतियात के तौर पर नगवां बांध के 11 में से 8 फाटक खोल दिए गए हैं। इसके जरिए दोपहर तक 21665 क्यूसेक पानी निकाला जाता रहा। चंदौली जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों में अलर्ट कर दिया गया है। वहीं धंधरौल बांध से 335 क्यूसेक पानी बहाया जा रहा है। बांध के तटवर्ती इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है।
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मंगलवार की शाम से शुरू हुई बरसात बुधवार को पूरे दिन और बृहस्पतिवार की भोर होती रही। दुद्धी और रॉबर्ट्सगंज तहसील क्षेत्र में सबसे ज्यादा वर्षा दर्ज की गई। पहाड़ों पर हुई भारी बारिश का पानी नालाें के जरिये आने से बांधों के जलस्तर में तेजी से वृद्धि दर्ज की गई है। मंगलवार तक नगवां बांध 60 प्रतिशत तक भरा था। बांध का जलस्तर 351.25 मीटर दर्ज किया गया था। वहीं बृहस्पतिवार को जलस्तर 354.26 मीटर दर्ज किया गया। इस बांध का अधिकतम जलस्तर 354.60 मीटर है। बांध 94 प्रतिशत तक भर गया है, जबकि कैचमेंट एरिया में पानी आने का क्रम लगातार जारी है। ओबरा बांध का जलस्तर भी अधिकतम से सिर्फ 24 सेमी नीचे रह गया है। मप्र और छत्तीसगढ़ तक फैले रिहंद बांध के कैचमेंट एरिया में भारी बारिश का असर बांध के जलस्तर पर दिख रहा है। यह बांध 81.32 प्रतिशत तक भर गया है। मिर्जापुर, सोनभद्र और चंदौली जिले में सिंचाई व पेयजल के प्रमुख स्रोत धंधरौल बांध का जलस्तर अभी दो मीटर नीचे हैं। बांध अपनी क्षमता का आधा भी नहीं भरा है।
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खतरे के निशान से आधा मीटर ऊपर बह रही सोन नदी, छठ घाट डूबा
चोपन। लगातार बारिश और मप्र के बाणसागर बांध से पानी छोड़े जाने के चलते सोन नदी ने बृहस्पतिवार को खतरे के निशान (171 मीटर) को पार कर लिया। शाम पांच बजे तक नदी 171.58 मीटर के स्तर पर बह रही थी। चोपन का छठ घाट और रेलवे का पंप हाउस पानी में डूब गया था। रेलवे कॉलोनी की जलापूर्ति ठप हो गई है। रिहायशी इलाकों की ओर से भी नदी का पानी तेजी से बढ़ रहा है। इसके मद्देनजर तटवर्ती क्षेत्रों में अलर्ट घोषित करते हुए निगरानी बढ़ा दी गई है।
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जिले के मध्य से प्रवाहित सोन नदी में मप्र से पानी आता है। अगोरी के पास बिजुल और रेणु नदी भी इसमें समाहित होती हैं। चारों तरफ भारी बारिश और पहाड़ी नदियों के उफनाने का असर सोन नदी के जलस्तर पर बुधवार की शाम से ही दिखने लगा था। मंगलवार को दो सेमी की गति से घट रही नदी में बुधवार को उतनी ही तेजी दिखी। बृहस्पतिवार की सुबह तक नदी में 11 सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से वृद्धि हो रही थी। दोपहर बाद नदी ने खतरे के निशान को छू लिया और शाम पांच बजे जलस्तर 171.58 मीटर दर्ज किया गया। इससे तटीय इलाकों में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। नदी का पानी अब धीरे-धीरे रिहायशी क्षेत्रों की ओर बढ़ रहा है। रेलवे के मोटर रूम में पानी भरने के बाद काॅलोनियों में पानी सप्लाई बाधित हुई है। हालांकि कर्मचारियों ने मोटर निकाल कर सुरक्षित स्थान पर रख दिया। पूर्व मध्य रेलवे वरीय अनुभाग अभियंता आरबी पाल ने बताया कि रेलवे कॉलोनी में आपूर्ति के लिए अभी पानी उपलब्ध है। जल स्तर घटते ही व्यवस्था बहाल कर ली जाएगी। नदी के जलस्तर बढ़ने की सूचना पर नगर पंचायत अध्यक्ष उस्मान अली मौके पर पहुंचे। नदी किनारे बसे लोगों से बातचीत कर उनकी स्थिति जानी। केंद्रीय जल आयोग के कुशल कार्य सहायक रामनरेश ने बताया कि नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और यह खतरे के निशान से ऊपर पहुंच चुका है। जलस्तर की लगातार निगरानी की जा रही है।
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