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Sonebhadra News: बारिश में होगी फिर वही कहानी शहर के मोहल्लों में भरेगा पानी
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सोनभद्र। चिलचिलाती धूप और गर्मी के बाद बारिश का मौसम लोगों को सुकून देता है, मगर नगर पालिका क्षेत्र के रहवासियों के लिए यह परेशानी बढ़ाने वाला है। जलनिकासी व्यवस्था बदहाल होने के कारण लोग बरसात में बेहाल नजर आते हैं। किसी के मकान में पानी भर जाता है तो किसी की दुकान के सामने जलभराव से व्यापार चौपट हो जाता है। जलनिकासी के समाधान के लिए 37 करोड़ से नाले का निर्माण हो रहा है, लेकिन पर्याप्त समय बीतने के बाद भी 40 फीसदी काम भी पूरा नहीं हो पाया है। नतीजा बारिश नजदीक आने के साथ यहां के लोगों की चिंता बढ़ने लगी है। पिछली बरसातों में घर व मोहल्ले में पानी भरने से हुई जलालत झेलने वाले लोग अभी से चिंतित हैं।
तेजी से बढ़ती आबादी के साथ नगर की जरूरतें भी बढ़ रही हैं। घरों के गंदे पानी की निकासी के लिए बनीं नालियां ही नगर में बरसात के पानी की निकासी का भी जरिया हैं। तेज बरसात के दौरान अक्सर नालियों के ओवरफ्लो होने से गंदा पानी सड़क पर आ जाता है और कई बार घर व दुकान में घुसने लगता है। नगर के बढ़ौली चौक से मेन चौक जाने वाले मार्ग पर पीडब्ल्यूडी कार्यालय के समीप, धर्मशाला चौक, चंडी तिराहा, मंडी गेट के सामने, अंबेडकरनगर, शनि मंदिर, उत्तर मोहाल सहित कई इलाके हर बारिश में घंटों जलभराव से जूझते रहे हैं। रहवासियों के अलावा राहगीरों को भी काफी जलालत झेलनी पड़ती है। जलनिकासी की इस समस्या के समाधान के लिए ही नगर क्षेत्र में नाले के निर्माण को मंजूरी मिली थी। करीब 37 करोड़ रुपये से बनने वाले नाले का कार्य दस माह में जून 2022 तक ही पूरा करने का लक्ष्य था। पहले टेंडर प्रक्रिया में देरी और फिर बजट अवमुक्त होने में सुस्ती का असर है कि नाला निर्माण का कार्य अब तक पूरा नहीं हो पाया है।
बजट मिला नहीं, अब जीएसटी का भी पेंच
वर्ष 2021 में नाला निर्माण के लिए कुल 37 करोड़ का बजट स्वीकृत किया गया था। इसकी अभी आधी राशि भी अवमुक्त नहीं हुई है। पिछले दो वर्षों में निर्माण सामग्री के साथ मजदूरी बढ़ी है। साथ ही जीएसटी की दरों में भी उछाल आया है। ऐसे में कार्य करा रही संस्था के लिए सामने भी समय से काम करने चुनौती बढ़ गई है। इसके लंबा खींचने पर दिक्कत और बढ़ेगी।
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कई जगह अतिक्रमण से बाधित है काम
जिस रूट से नाला गुजरना है, उसमें कई जगह लोगों के अतिक्रमण है। कहीं सेफ्टी टैंक बना हुआ है तो कहीं बोरिंग कराई गई है। चबूतरा व सीढ़ी बनाकर सरकारी भूमि पर कब्जा किया गया है। इस अतिक्रमण को हटाने का कार्य भी अभी शेष है। इससे नाला निर्माण के अभी लंबा खिंचने की उम्मीद जताई जा रही है।
जाम नालियां बढ़ाएंगी परेशानी
वैसे तो नगर की जलनिकासी व्यवस्था के लिए नगर पालिका ने बारिश से पहले नगर के सभी प्रमुख नालियों की सफाई करा दी है। पिछले दिनों अभियान चलाकर सिल्ट बाहर निकाला गया, लेकिन खुली नालियों में कई जगह कूड़ा-कचरा और प्लास्टिक जाने से जलप्रवाह अवरुद्ध हो गया है। नगर के उत्तर मोहाल, चंडी तिराहा रोड, शीतला मंदिर चौराहा के समीप नालियों की ऐसी स्थिति देखी जा सकती है।
नाला निर्माण का कार्य प्रगति पर है। अब तक 41 फीसदी से अधिक काम पूरा हो चुका है। अतिक्रमण हटाने व अन्य अवरोधों को दूर कराने के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है, ताकि बारिश से पहले ज्यादा से ज्यादा काम हो जाय। नाला निर्माण के कारण नगर की पूर्व की जलनिकासी व्यवस्था में कोई अवरोध नहीं आएगा। -तनवीर आलम, जेई, सीएनडीएस।
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तेजी से बढ़ती आबादी के साथ नगर की जरूरतें भी बढ़ रही हैं। घरों के गंदे पानी की निकासी के लिए बनीं नालियां ही नगर में बरसात के पानी की निकासी का भी जरिया हैं। तेज बरसात के दौरान अक्सर नालियों के ओवरफ्लो होने से गंदा पानी सड़क पर आ जाता है और कई बार घर व दुकान में घुसने लगता है। नगर के बढ़ौली चौक से मेन चौक जाने वाले मार्ग पर पीडब्ल्यूडी कार्यालय के समीप, धर्मशाला चौक, चंडी तिराहा, मंडी गेट के सामने, अंबेडकरनगर, शनि मंदिर, उत्तर मोहाल सहित कई इलाके हर बारिश में घंटों जलभराव से जूझते रहे हैं। रहवासियों के अलावा राहगीरों को भी काफी जलालत झेलनी पड़ती है। जलनिकासी की इस समस्या के समाधान के लिए ही नगर क्षेत्र में नाले के निर्माण को मंजूरी मिली थी। करीब 37 करोड़ रुपये से बनने वाले नाले का कार्य दस माह में जून 2022 तक ही पूरा करने का लक्ष्य था। पहले टेंडर प्रक्रिया में देरी और फिर बजट अवमुक्त होने में सुस्ती का असर है कि नाला निर्माण का कार्य अब तक पूरा नहीं हो पाया है।
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बजट मिला नहीं, अब जीएसटी का भी पेंच
वर्ष 2021 में नाला निर्माण के लिए कुल 37 करोड़ का बजट स्वीकृत किया गया था। इसकी अभी आधी राशि भी अवमुक्त नहीं हुई है। पिछले दो वर्षों में निर्माण सामग्री के साथ मजदूरी बढ़ी है। साथ ही जीएसटी की दरों में भी उछाल आया है। ऐसे में कार्य करा रही संस्था के लिए सामने भी समय से काम करने चुनौती बढ़ गई है। इसके लंबा खींचने पर दिक्कत और बढ़ेगी।
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कई जगह अतिक्रमण से बाधित है काम
जिस रूट से नाला गुजरना है, उसमें कई जगह लोगों के अतिक्रमण है। कहीं सेफ्टी टैंक बना हुआ है तो कहीं बोरिंग कराई गई है। चबूतरा व सीढ़ी बनाकर सरकारी भूमि पर कब्जा किया गया है। इस अतिक्रमण को हटाने का कार्य भी अभी शेष है। इससे नाला निर्माण के अभी लंबा खिंचने की उम्मीद जताई जा रही है।
जाम नालियां बढ़ाएंगी परेशानी
वैसे तो नगर की जलनिकासी व्यवस्था के लिए नगर पालिका ने बारिश से पहले नगर के सभी प्रमुख नालियों की सफाई करा दी है। पिछले दिनों अभियान चलाकर सिल्ट बाहर निकाला गया, लेकिन खुली नालियों में कई जगह कूड़ा-कचरा और प्लास्टिक जाने से जलप्रवाह अवरुद्ध हो गया है। नगर के उत्तर मोहाल, चंडी तिराहा रोड, शीतला मंदिर चौराहा के समीप नालियों की ऐसी स्थिति देखी जा सकती है।
नाला निर्माण का कार्य प्रगति पर है। अब तक 41 फीसदी से अधिक काम पूरा हो चुका है। अतिक्रमण हटाने व अन्य अवरोधों को दूर कराने के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है, ताकि बारिश से पहले ज्यादा से ज्यादा काम हो जाय। नाला निर्माण के कारण नगर की पूर्व की जलनिकासी व्यवस्था में कोई अवरोध नहीं आएगा। -तनवीर आलम, जेई, सीएनडीएस।