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चुनावी रैलियों तक ही सिमट गया दुद्धी को जिला बनाने का वादा
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दुद्धी ब्लाक और रेलवे स्टेशन।
- फोटो : SONBHADRA
पिछले एक दशक में कोई भी लोकसभा चुनाव हो या विधानसभा का। आदिवासी बहुल दुद्धी को अलग जिला बनाने की आवाज हर बार जोर-शोर से उठती रही है। पिपरी से लेकर दुद्धी तक हर शुक्रवार और शनिवार को आंदोलन का दौर निरंतर जारी है। राजनीतिक दलों की ओर से इसे पूरा करने के आश्वासन भी मिलते रहे हैं, मगर अब तक दुद्धी के लोगों की यह आवाज नक्कारखाने की तूती बनकर ही गूंजती रही है।
सोन नदी के दक्षिण में स्थित ओबरा और दुद्धी तहसील के चोपन, कोन, दुद्धी, बभनी और म्योरपुर ब्लाक को मिलाकर नया जिला बनाने का सुझाव है। इसमें चोपन, डाला, ओबरा, अनपरा और दुद्धी नगर पंचायत भी शामिल हैं। इस क्षेत्र की संपूर्ण आबादी 14 लाख से अधिक है। मप्र, झारखंड, छत्तीसगढ़ और बिहार की सीमा से सटा यह क्षेत्र घने जंगलों और आदिवासी आबादी वाला है। जटिल भौगोलिक स्थिति के चलते पिछड़े इस क्षेत्र को विकास के मामले में आगे ले जाने के लिए अलग जिला की मांग अरसे से उठती आ रही है। संघर्ष समिति की ओर से निरंतर आंदोलन भी किया जा रहा है। पिछले चुनावों में इसे पूरा करने के मंच से वादे किए गए थे। चुनावी वादों से इतर किसी भी सरकार ने इस दिशा में कोई ठोस पहल तक नहीं की। पिछले विधानसभा चुनाव में यह मामला इस कदर उछला कि भाजपा-अद एस के गठबंधन ने सपा का यह मजबूत किला भी ढहा दिया। पांच वर्ष में भी चुनावी सभाओं में हुए वादों के मूर्त रूप न लेने से दुद्धी के लोग मायूस हैं। इस बार फिर से यह मुद्दा आदिवासी अंचल में जोर-शोर से गरमाने लगा है। इसी के इर्द-गिर्द इलाके की सियासत का खांका भी खींचा जाने लगा है। यहां के लोगों का मानना है कि अबकी चुनाव में यह मुद्दा काफी असरदार रहेगा। ठोस वादा करने वाले को ही इलाके की जनता नुमाइंदा चुनने में रुचि दिखाएगी।
...तो इसलिए चाहते हैं दुद्धी बने अलग जिला
हिंडाल्को, एनटीपीसी, एनसीएल की परियोजनाओं, क्रशर प्लांट, बालू खनन के जरिए दुद्धी प्रदेश को सबसे ज्यादा राजस्व देने वाला क्षेत्र है। यहां की अधिकांश आबादी अनुसूचित जाति और जनजाति की है। पूरे देश में पहले दो जिले सबसे बड़े थे। इसमें मप्र का बस्तर और दूसरा उत्तर प्रदेश का मिर्जापुर। बुनियादी विकास के लिए बस्तर को बांटकर छह नए जिले बनाए गए लेकिन मिर्जापुर को बस दो हिस्सों मिर्जापुर और सोनभद्र में बांटा गया। नवसृजित सोनभद्र जिले का मुख्यालय भी राबर्ट्सगंज में बनाया गया जहां से दुद्धी तहसील मुख्यालय की दूरी ही 70 किमी से अधिक है। इस तहसील के बभनी, बीजपुर, शक्तिनगर जैसे इलाके जिला मुख्यालय से 125-130 किमी की दूरी पर हैं। कई गांवों की दूरी 150 किमी से भी अधिक है। लंबी दूरी होने के कारण मुख्यालय आना भी वहां के लोगों के लिए दुष्कर रहता है।
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कई मौजूदा जिलों से बड़ा है दुद्धी का क्षेत्र
दुद्धी को जिला बनाने की लड़ाई लड़ रहे संघर्ष समिति के पदाधिकारियों के दावों पर गौर करें तो दुद्धी हर मायने में जिला बनाए जाने के योग्य है। उनकी ओर से प्रस्तुत प्रस्ताव के अनुसार सोन नदी के दक्षिण प्रस्तावित दुद्धी जिले में 389 राजस्व गांवों को इसमें शामिल किया जा सकता है। इसमें दुद्धी के 305 और सदर तहसील के चोपन व नवसृजित कोन ब्लाक के सोन नदी के दक्षिण स्थित राजस्व ग्रामों को शामिल किया गया है। इस क्षेत्र की कुल आबादी 14 लाख और क्षेत्रफल करीब 2380 वर्ग किमी होगी। इसके पूर्व में वर्तमान जिला शामली में 284, बागपत में 287, हापुड़ में 331, गौतम बुद्ध नगर में 381 राजस्व ग्राम सम्मिलित हैं। यूपी के 34 जिलों का क्षेत्रफल इससे कम है।
जनसंख्या में भी छह जिले इससे छोटे
महोबा में 878055, हमीरपुर 1104021, श्रावस्ती 1114815, शामली में 1291541, बागपत में 1302156, औरैया 1372267 की आबादी पर जिला बनाया गया था। जैसे छह जिले जनसंख्या में प्रस्तावित जिले से छोटे हैं। इसके अलावा छत्तीसगढ़ राज्य के बलरामपुर जिले की जनसंख्या 598685 और सूरजपुर की जनसंख्या 660280 है।
हर तरह से योग्य होने के बाद भी दुद्धी की उपेक्षा होती रही है। हर दल ने हमें छला है। पिछले विधानसभा चुनाव में मंच से जिला बनाने का वादा किया गया था। पांच वर्षों तक लगातार उन्हें वादे की याद दिलाई जाती रही। दिल्ली-लखनऊ जाकर वादे की याद दिलाई गई, फिर भी किसी ने इसमें रुचि नहीं दिखाई। इस बार चुनाव में दुद्धी की हो रही उपेक्षा का जवाब लिया जाएगा। अलग जिला बने बगैर दुद्धी का सर्वांगीण विकास नहीं हो सकता। - राजकुमार अग्रहरि, अध्यक्ष, दुद्धी जिला बनाओ संघर्ष समिति।
मिर्जापुर से अलग कर सोनभद्र को नया जिला बनाया गया तब पिपरी में मुख्यालय बनाया जा रहा था, मगर बाद में इसे राबर्ट्सगंज कर दिया गया। दुद्धी के लोगों के लिए यह मुख्यालय इतना दूर है कि आम लोग वहां तक पहुंच ही नहीं पाते। दुद्धी हर मायने में जिला बनने की योग्यता रखता है। पहाड़ी और आदिवासी क्षेत्र के लिए जिला बनाने के मानक की तुलना मैदानी इलाकों के मानक से नहीं की जा सकती। - प्रभु सिंह कुशवाहा, संस्थापक महासचिव, जिला बनाओ संघर्ष समिति।
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सोन नदी के दक्षिण में स्थित ओबरा और दुद्धी तहसील के चोपन, कोन, दुद्धी, बभनी और म्योरपुर ब्लाक को मिलाकर नया जिला बनाने का सुझाव है। इसमें चोपन, डाला, ओबरा, अनपरा और दुद्धी नगर पंचायत भी शामिल हैं। इस क्षेत्र की संपूर्ण आबादी 14 लाख से अधिक है। मप्र, झारखंड, छत्तीसगढ़ और बिहार की सीमा से सटा यह क्षेत्र घने जंगलों और आदिवासी आबादी वाला है। जटिल भौगोलिक स्थिति के चलते पिछड़े इस क्षेत्र को विकास के मामले में आगे ले जाने के लिए अलग जिला की मांग अरसे से उठती आ रही है। संघर्ष समिति की ओर से निरंतर आंदोलन भी किया जा रहा है। पिछले चुनावों में इसे पूरा करने के मंच से वादे किए गए थे। चुनावी वादों से इतर किसी भी सरकार ने इस दिशा में कोई ठोस पहल तक नहीं की। पिछले विधानसभा चुनाव में यह मामला इस कदर उछला कि भाजपा-अद एस के गठबंधन ने सपा का यह मजबूत किला भी ढहा दिया। पांच वर्ष में भी चुनावी सभाओं में हुए वादों के मूर्त रूप न लेने से दुद्धी के लोग मायूस हैं। इस बार फिर से यह मुद्दा आदिवासी अंचल में जोर-शोर से गरमाने लगा है। इसी के इर्द-गिर्द इलाके की सियासत का खांका भी खींचा जाने लगा है। यहां के लोगों का मानना है कि अबकी चुनाव में यह मुद्दा काफी असरदार रहेगा। ठोस वादा करने वाले को ही इलाके की जनता नुमाइंदा चुनने में रुचि दिखाएगी।
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...तो इसलिए चाहते हैं दुद्धी बने अलग जिला
हिंडाल्को, एनटीपीसी, एनसीएल की परियोजनाओं, क्रशर प्लांट, बालू खनन के जरिए दुद्धी प्रदेश को सबसे ज्यादा राजस्व देने वाला क्षेत्र है। यहां की अधिकांश आबादी अनुसूचित जाति और जनजाति की है। पूरे देश में पहले दो जिले सबसे बड़े थे। इसमें मप्र का बस्तर और दूसरा उत्तर प्रदेश का मिर्जापुर। बुनियादी विकास के लिए बस्तर को बांटकर छह नए जिले बनाए गए लेकिन मिर्जापुर को बस दो हिस्सों मिर्जापुर और सोनभद्र में बांटा गया। नवसृजित सोनभद्र जिले का मुख्यालय भी राबर्ट्सगंज में बनाया गया जहां से दुद्धी तहसील मुख्यालय की दूरी ही 70 किमी से अधिक है। इस तहसील के बभनी, बीजपुर, शक्तिनगर जैसे इलाके जिला मुख्यालय से 125-130 किमी की दूरी पर हैं। कई गांवों की दूरी 150 किमी से भी अधिक है। लंबी दूरी होने के कारण मुख्यालय आना भी वहां के लोगों के लिए दुष्कर रहता है।
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कई मौजूदा जिलों से बड़ा है दुद्धी का क्षेत्र
दुद्धी को जिला बनाने की लड़ाई लड़ रहे संघर्ष समिति के पदाधिकारियों के दावों पर गौर करें तो दुद्धी हर मायने में जिला बनाए जाने के योग्य है। उनकी ओर से प्रस्तुत प्रस्ताव के अनुसार सोन नदी के दक्षिण प्रस्तावित दुद्धी जिले में 389 राजस्व गांवों को इसमें शामिल किया जा सकता है। इसमें दुद्धी के 305 और सदर तहसील के चोपन व नवसृजित कोन ब्लाक के सोन नदी के दक्षिण स्थित राजस्व ग्रामों को शामिल किया गया है। इस क्षेत्र की कुल आबादी 14 लाख और क्षेत्रफल करीब 2380 वर्ग किमी होगी। इसके पूर्व में वर्तमान जिला शामली में 284, बागपत में 287, हापुड़ में 331, गौतम बुद्ध नगर में 381 राजस्व ग्राम सम्मिलित हैं। यूपी के 34 जिलों का क्षेत्रफल इससे कम है।
जनसंख्या में भी छह जिले इससे छोटे
महोबा में 878055, हमीरपुर 1104021, श्रावस्ती 1114815, शामली में 1291541, बागपत में 1302156, औरैया 1372267 की आबादी पर जिला बनाया गया था। जैसे छह जिले जनसंख्या में प्रस्तावित जिले से छोटे हैं। इसके अलावा छत्तीसगढ़ राज्य के बलरामपुर जिले की जनसंख्या 598685 और सूरजपुर की जनसंख्या 660280 है।
हर तरह से योग्य होने के बाद भी दुद्धी की उपेक्षा होती रही है। हर दल ने हमें छला है। पिछले विधानसभा चुनाव में मंच से जिला बनाने का वादा किया गया था। पांच वर्षों तक लगातार उन्हें वादे की याद दिलाई जाती रही। दिल्ली-लखनऊ जाकर वादे की याद दिलाई गई, फिर भी किसी ने इसमें रुचि नहीं दिखाई। इस बार चुनाव में दुद्धी की हो रही उपेक्षा का जवाब लिया जाएगा। अलग जिला बने बगैर दुद्धी का सर्वांगीण विकास नहीं हो सकता। - राजकुमार अग्रहरि, अध्यक्ष, दुद्धी जिला बनाओ संघर्ष समिति।
मिर्जापुर से अलग कर सोनभद्र को नया जिला बनाया गया तब पिपरी में मुख्यालय बनाया जा रहा था, मगर बाद में इसे राबर्ट्सगंज कर दिया गया। दुद्धी के लोगों के लिए यह मुख्यालय इतना दूर है कि आम लोग वहां तक पहुंच ही नहीं पाते। दुद्धी हर मायने में जिला बनने की योग्यता रखता है। पहाड़ी और आदिवासी क्षेत्र के लिए जिला बनाने के मानक की तुलना मैदानी इलाकों के मानक से नहीं की जा सकती। - प्रभु सिंह कुशवाहा, संस्थापक महासचिव, जिला बनाओ संघर्ष समिति।

दुद्धी ब्लाक और रेलवे स्टेशन।- फोटो : SONBHADRA