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Sonebhadra News: बांध के आकार के साथ बढ़ रहा विस्थापितों का दर्द

Tue, 21 Feb 2023 11:15 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 21 Feb 2023 11:15 PM IST
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The pain of displaced people is increasing with the size of the dam
पुश्तैनी जमीन छोड़कर कहां जाऊं... मुझे तो अब तक एक चवन्नी भी नहीं मिली। यह गांव भी छोड़ दूंगा तो रहने-खाने का इंतजाम कैसे होगा। हर अफसर से मिल चुके, सिवाय आश्वासन के कुछ नहीं मिला। जैसे-जैसे बांध बन रहा है, चिंता भी बढ़ रही है। मुआवजा नहीं मिला तो जल समाधि ले लेंगे, लेकिन यहां से नहीं जाएंगे। कोरची के रुपनारायण यह कहते हुए फफक पड़ते हैं।
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कोरची वह गांव है, जो कनहर बांध के डूब क्षेत्र में शामिल है। बांध को जून तक पूरा करने का लक्ष्य है। लिहाजा प्रशासन ने फरवरी तक ही डूब क्षेत्र में रहने वालों को जगह खाली करने का फरमान सुना दिया है। रुपनारायण का कहना है कि किसी को दो पीढ़ी तो किसी को तीन पीढ़ी तक मुआवजा दिया गया है। मेरे पिता और भाई को मुआवजा मिला, लेकिन मेरा नाम भी सूची में नहीं रखा गया। अब 15 दिन के भीतर गांव खाली करने को कहा जा रहा है। हम ऐसे कहां जाएंगे। कुछ ऐसे ही पीड़ा रजकुंवारी, विमला देवी, मानमती देवी की भी है। उनका कहना है कि नदी किनारे ही हमारा घर है। सबसे पहले हमारे घर ही डूबेंगे। पिता की संपत्ति पर हम तीन बहनें ही वारिश हैं। कोई भाई नहीं है। हमारा जन्म और शादी इसी गांव में हुई है। फिर भी सरकार ने हमें मुआवजे से वंचित कर रखा है। विस्थापित शिव प्रसाद का कहना है कि मेरे चार लड़कों में से किसी को भी विस्थापन पैकेज नहीं मिला है। रोजाना गांव खाली करने को कहा जा रहा है। ऐसे हाल में हम कहां जाएंगे। आर्थिक स्थिति खराब है। खेतों में अनाज है। बाहर कहा जाएंगे। प्रशासन गांव में सर्वे कराकर हमें मुआवजा दे।
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3719 परिवार, 3520 को मिला है मुआवजा
पुरानी सूची के अनुसार कुल 3719 विस्थापित परिवारों के समक्ष 3520 परिवार को मुआवजा पैकेज दिया जा चुका है। प्रपत्र 6 के अनुसार 424 परिवारों को सूचीबद्ध किया गया है। इसमें 80 परिवारों को मुआवजा दिया गया है। आवासीय प्लाट 3450 विस्थापित परिवार को दिया गया है।
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मुआवजा के साथ फसल कटाई का मिले मौका
विस्थापित नेता गंभीरा प्रसाद, पंकज कुमार गौतम ने कहा कि प्रशासन की ओर से गांव में एक सूचना चस्पा कर शीघ्र गांव खाली करने का अल्टीमेटम दिया गया है। ऐसा न करने पर पुलिस बल का प्रयोग करने का भी उल्लेख है। पहले छूटे हुए विस्थापित परिवारों का नाम सूची में जोड़ा जाए। जो विस्थापित पैकेज का लाभ ले लिए हैं उन्हें सरसों, गेहूं, चना जैसे फसलों की कटाई के लिए 10 जून तक का समय दिया जाए। दोबारा सर्वे कराकर छूटे हुए करीब पांच हजार विस्थापित परिवारों का नाम सूची में दर्ज किया जाए।
27 करोड़ की परियोजना 2700 करोड़ तक पहुंची
कनहर सिंचाई परियोजना की शुरुआत अक्टूबर 1976 में दुद्धी तहसील के अमवार गांव में हुई थी। नारायण दत्त तिवारी की सरकार में सिंचाई मंत्री रहे लोकपति त्रिपाठी के प्रयास से स्वीकृत हुई परियोजना से 108 गांवों के 35462 हेक्टेयर क्षेत्रफल को सिंचित करने का लक्ष्य था। तब इसकी लागत महज 27 करोड़ थी। परियोजना को दस साल में पूरा होनी थी। लेटलतीफी के कारण परियोजना की लागत लगभग सौ गुना 2700 करोड़ तक पहुंच गई है।

परियोजना से विस्थापित होने वाले परिवारों को पैकेज दिया जा रहा है। पैकेज नहीं मिलने वाले परिवार की जांच कराकर उन्हें लाभान्वित कराया जाएगा। शासन के निर्देशानुसार कार्रवाई की जाएगी। - शैलेंद्र मिश्र, एसडीएम दुद्धी।
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