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Sonebhadra News: अवैध अस्पतालों पर कार्रवाई के लिए विभाग को शिकायत का इंतजार
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सोनभद्र। जिले में अवैध रूप से संचालित निजी अस्पतालों, क्लीनिकों व पैथाेलॉजी सेंटरों पर कार्रवाई कागजी खानापूर्ति तक सीमित है। किसी मामले में शिकायत होने पर स्वास्थ्य विभाग अस्पतालों की जांच करता है। उसे कुछ दिन बंद कराता है, मगर उसके बाद संचालक नाम बदलकर नए ठिकाने पर धंधा शुरू कर देते हैं।
जिले में 62 निजी अस्पताल, 25 क्लीनिक और 30 पैथालॉजी पंजीकृत हैं। जबकि इसके दोगुने अस्पतालों का संचालन हो रहा है। अवैध अस्पतालों के संचालन पर विभाग की ओर से कार्रवाई कागजों और नोटिस तक सीमित है। डिग्रीधारी डॉक्टर को अपने अस्पताल का पंजीकरण कराने के लिए औपचारिकताएं पूरी करने के नाम पर महीनों चक्कर कटवाया जाता है, जबकि अवैध अस्पताल संचालकों का सारा काम सहजता से हो जाता है। वैध अस्पतालों में उपचार में लापरवाही के दौरान मौतें होती हैं, तब विभाग सिर्फ नोटिस देकर इतिश्री कर लेता है। पीड़ित परिवार या अन्य कोई व्यक्ति शासनस्तर तक शिकायत करता है तो जांच होती है। अस्पताल का पंजीकरण न मिलने पर ताला बंद कर उन्हें नोटिस दिया जाता है। कुछ दिन बाद वही अस्पताल फिर से संचालित होते पाए जाते हैं। बावजूद इसके विभाग कोई कार्रवाई नहीं करता है। संचालक के खिलाफ थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने की जहमत भी कोई नहीं उठाता है। इस महीने विभाग ने सात अस्पताल, क्लीनिक और एक्सरे सेंटर को बंद कराया। इनका संचालन लंबे समय से चल रहा था। हालांकि इनकी शिकायतें की गई थीं। लोगों का कहना है कि ऐसा कैसे संभव है कि विभाग की नजर इन अस्पतालों पर न पड़ी हो।
सरकारी डाॅक्टर देख रहे थे अवैध एक्सरे सेंटर की रिपोर्ट
जिले में स्वास्थ्य विभाग अवैध अस्पतलों पर कार्रवाई से बचता है। इसका अंदाजा घोरावल सीएचसी के ठीक सामने स्थित एक्सरे सेंटर से लगाया जा सकता है। यहां अवैध एक्सरे सेंटर सीएचसी के मरीजों की सालों से जांच कर रहा था। चिकित्सक से लेकर अधीक्षक भी एक्सरे रिपोर्ट देखते रहे हैं, मगर किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। कुछ दिनों पूर्व शिकायत के बाद सेंटर फर्जी मिला, तब बंद कराया गया।
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केस.1 घोरावल कोतवाली क्षेत्र के मोहनी निवासी कलावती को 4 मई की सुबह पेट दर्द और उल्टी की शिकायत थी। उसे परिजनों ने घोरावल के निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। वहां चिकित्सक की लापरवाही से उसकी मौत हो गयी। शिकायत के बाद जांच में सालों से अस्पताल अवैध रूप से संचालित मिला। विभाग ने तब जाकर इसे सील किया।
केस: 2 कुछ दिनों पूर्व एक महिला की मौत से जुड़े मामलों के बाद उरमौरा स्थित एक अस्पताल को बंद कराया गया। वह बिना पंजीयन संचालित था। पहले भी दूसरे नाम से उस अस्पताल का संचालन छपका में होता था। तब महिला की मौत पर उसे सील किया गया था। जगह और नाम बदलकर संचालन किया जा रहा था।
जिले में अभियान चलाकर अवैध अस्पतालों पर कार्रवाई की जा रही है। लगातार जांच चल रही है। बड़ी संख्या में अवैध अस्पतालों को बंद भी कराया गया है। यह कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। -डॉ. गुलाब शंकर, एसीएमओ।
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जिले में 62 निजी अस्पताल, 25 क्लीनिक और 30 पैथालॉजी पंजीकृत हैं। जबकि इसके दोगुने अस्पतालों का संचालन हो रहा है। अवैध अस्पतालों के संचालन पर विभाग की ओर से कार्रवाई कागजों और नोटिस तक सीमित है। डिग्रीधारी डॉक्टर को अपने अस्पताल का पंजीकरण कराने के लिए औपचारिकताएं पूरी करने के नाम पर महीनों चक्कर कटवाया जाता है, जबकि अवैध अस्पताल संचालकों का सारा काम सहजता से हो जाता है। वैध अस्पतालों में उपचार में लापरवाही के दौरान मौतें होती हैं, तब विभाग सिर्फ नोटिस देकर इतिश्री कर लेता है। पीड़ित परिवार या अन्य कोई व्यक्ति शासनस्तर तक शिकायत करता है तो जांच होती है। अस्पताल का पंजीकरण न मिलने पर ताला बंद कर उन्हें नोटिस दिया जाता है। कुछ दिन बाद वही अस्पताल फिर से संचालित होते पाए जाते हैं। बावजूद इसके विभाग कोई कार्रवाई नहीं करता है। संचालक के खिलाफ थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने की जहमत भी कोई नहीं उठाता है। इस महीने विभाग ने सात अस्पताल, क्लीनिक और एक्सरे सेंटर को बंद कराया। इनका संचालन लंबे समय से चल रहा था। हालांकि इनकी शिकायतें की गई थीं। लोगों का कहना है कि ऐसा कैसे संभव है कि विभाग की नजर इन अस्पतालों पर न पड़ी हो।
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सरकारी डाॅक्टर देख रहे थे अवैध एक्सरे सेंटर की रिपोर्ट
जिले में स्वास्थ्य विभाग अवैध अस्पतलों पर कार्रवाई से बचता है। इसका अंदाजा घोरावल सीएचसी के ठीक सामने स्थित एक्सरे सेंटर से लगाया जा सकता है। यहां अवैध एक्सरे सेंटर सीएचसी के मरीजों की सालों से जांच कर रहा था। चिकित्सक से लेकर अधीक्षक भी एक्सरे रिपोर्ट देखते रहे हैं, मगर किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। कुछ दिनों पूर्व शिकायत के बाद सेंटर फर्जी मिला, तब बंद कराया गया।
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केस.1 घोरावल कोतवाली क्षेत्र के मोहनी निवासी कलावती को 4 मई की सुबह पेट दर्द और उल्टी की शिकायत थी। उसे परिजनों ने घोरावल के निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। वहां चिकित्सक की लापरवाही से उसकी मौत हो गयी। शिकायत के बाद जांच में सालों से अस्पताल अवैध रूप से संचालित मिला। विभाग ने तब जाकर इसे सील किया।
केस: 2 कुछ दिनों पूर्व एक महिला की मौत से जुड़े मामलों के बाद उरमौरा स्थित एक अस्पताल को बंद कराया गया। वह बिना पंजीयन संचालित था। पहले भी दूसरे नाम से उस अस्पताल का संचालन छपका में होता था। तब महिला की मौत पर उसे सील किया गया था। जगह और नाम बदलकर संचालन किया जा रहा था।
जिले में अभियान चलाकर अवैध अस्पतालों पर कार्रवाई की जा रही है। लगातार जांच चल रही है। बड़ी संख्या में अवैध अस्पतालों को बंद भी कराया गया है। यह कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। -डॉ. गुलाब शंकर, एसीएमओ।