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नामांकन की तिथि आई पास, दावेदारों की अटकी सांस
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विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन शुरू होने में अब सिर्फ 48 घंटे का समय शेष रह गया है, मगर कई दलों में उम्मीदवारों पर संशय बरकरार है। भाजपा, बसपा ने अभी किसी भी सीट पर प्रत्याशी के नाम का औपचारिक एलान नहीं किया है। सपा और कांग्रेस की ओर से भी तीन-तीन सीटों पर ही प्रत्याशी घोषित हुए हैं। अन्य चेहरों को लेकर उधेड़बुन बनी हुई है। प्रत्याशी चयन में देर होने से सियासी हलके में नई चर्चाएं भी जोर पकड़ने लगी हैं। अंतिम समय में टिकट घोषित होने से भीतरघात की आशंकाएं भी जताई जा रही हैं।
जिले की चार सीटों पर अंतिम चरण में सात मार्च को मतदान होगा। इसके लिए 10 फरवरी को स्थानीय स्तर पर अधिसूचना जारी होगी। इसी के साथ ही नामांकन प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी। प्रत्याशी 17 फरवरी (राजकीय अवकाश छोड़कर) तक नामांकन पत्र जमा कर सकेंगे। चुनावी रण में उतरने को तैयार दावेदार अपने दस्तावेजों को दुरुस्त करने में जुटे हैं लेकिन टिकट की घोषणा न होने से प्रमुख दलों में इस ओर कोई हलचल नहीं है। उनमें अब भी यह ऊहापोह बना हुआ कि पार्टी उन्हें टिकट देगी या नहीं। अब तक सपा ने सदर, दुद्धी और ओबरा सीट पर उम्मीदवार घोषित किया है तो कांग्रेस ने घोरावल, ओबरा और दुद्धी के लिए उम्मीदवार तय कर दिए हैं। बसपा ने सदर और घोरावल में प्रभारी तो घोषित किया है लेकिन प्रत्याशी के तौर पर नामों का अधिकृत एलान नहीं हुआ है। ऐन वक्त पर टिकट बदलने में माहिर बसपा के दांव को लेकर खुद प्रभारी भी सशंकित हैं। सबसे जटिल स्थिति भाजपा में है। पार्टी ने किसी भी सीट पर उम्मीदवार घोषित नहीं किया है। चारों मौजूदा विधायक अपना टिकट पक्का मानकर चल रहे हैं जबकि अन्य आवेदक भी खुद को ही उम्मीदवार बनाने के प्रति आश्वस्त हैं। कइयों ने तो इस दावे के साथ मंदिरों में जाकर शीश नवाकर आशीर्वाद लेना भी शुरू कर दिया है। टिकट को लेकर बने ऊहापोह के कारण सियासी रंग भी चटख रूप नहीं ले पा रहा है। संभावनाओं के आधार पर ही समीकरण साधे जा रहे हैं। उधर, अंदरखाने में यह चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं कि कहीं देरी का खामियाजा भीतरघात के रूप में प्रत्याशी को न भुगतना पड़ जाए। इससे चुनाव परिणामों पर खासा असर भी पड़ सकता है।
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जिले की चार सीटों पर अंतिम चरण में सात मार्च को मतदान होगा। इसके लिए 10 फरवरी को स्थानीय स्तर पर अधिसूचना जारी होगी। इसी के साथ ही नामांकन प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी। प्रत्याशी 17 फरवरी (राजकीय अवकाश छोड़कर) तक नामांकन पत्र जमा कर सकेंगे। चुनावी रण में उतरने को तैयार दावेदार अपने दस्तावेजों को दुरुस्त करने में जुटे हैं लेकिन टिकट की घोषणा न होने से प्रमुख दलों में इस ओर कोई हलचल नहीं है। उनमें अब भी यह ऊहापोह बना हुआ कि पार्टी उन्हें टिकट देगी या नहीं। अब तक सपा ने सदर, दुद्धी और ओबरा सीट पर उम्मीदवार घोषित किया है तो कांग्रेस ने घोरावल, ओबरा और दुद्धी के लिए उम्मीदवार तय कर दिए हैं। बसपा ने सदर और घोरावल में प्रभारी तो घोषित किया है लेकिन प्रत्याशी के तौर पर नामों का अधिकृत एलान नहीं हुआ है। ऐन वक्त पर टिकट बदलने में माहिर बसपा के दांव को लेकर खुद प्रभारी भी सशंकित हैं। सबसे जटिल स्थिति भाजपा में है। पार्टी ने किसी भी सीट पर उम्मीदवार घोषित नहीं किया है। चारों मौजूदा विधायक अपना टिकट पक्का मानकर चल रहे हैं जबकि अन्य आवेदक भी खुद को ही उम्मीदवार बनाने के प्रति आश्वस्त हैं। कइयों ने तो इस दावे के साथ मंदिरों में जाकर शीश नवाकर आशीर्वाद लेना भी शुरू कर दिया है। टिकट को लेकर बने ऊहापोह के कारण सियासी रंग भी चटख रूप नहीं ले पा रहा है। संभावनाओं के आधार पर ही समीकरण साधे जा रहे हैं। उधर, अंदरखाने में यह चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं कि कहीं देरी का खामियाजा भीतरघात के रूप में प्रत्याशी को न भुगतना पड़ जाए। इससे चुनाव परिणामों पर खासा असर भी पड़ सकता है।
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