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Sonebhadra News: भीड़ के आगे व्यवस्थाएं बेबस, 65 की क्षमता वाली बसों में 97 ने किया सफर
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रोडवेज बस में भीड़ की वजह से खड़े होकर सफर करते यात्री।
- फोटो : संवाद
सोनभद्र। रक्षाबंधन पर मुफ्त सफर के एलान के बाद से रोडवेज की बसों में उमड़ रही भीड़ रविवार को भी कम नहीं हुई। त्योहार मनाकर घर लौटने वाली महिलाओं की बड़ी संख्या के चलते रोडवेज की ओर से अतिरिक्त बसों की व्यवस्था भी कम पड़ गई।
सामान्य दिनों में 8-10 हजार यात्री बसों में सफर करते हैं, जबकि दो दिनों से संख्या 20 हजार से अधिक रही। होली, दीपावली और छठ पूजा से भी ज्यादा भीड़ बसों में नजर आई। हाल यह था कि पूरे दिन रोडवेज डिपो और उसके बाहर यात्रियों की भीड़ लगी रही। घंटों खड़े होकर उन्हें बसों का इंतजार करना पड़ा। 65 की क्षमता वाली बसों में 90 से 100 यात्रियों ने सफर किया।
आठ अगस्त की सुबह छह बजे से मुफ्त सफर की सुविधा शुरू हुई थी। इसके बाद से ही रोडवेज की बसों में लगातार भीड़ बनी हुई है। जिले में आवागमन के लिए ट्रेनों की संख्या सीमित होने के कारण अधिकांश लोग बस के सफर पर ही निर्भर हैं। इसके मद्देनजर रोडवेज ने अतिरिक्त बसें भी सड़कों पर उतारी हैं। सोनभद्र डिपो की 72 में से 60 बसों को वाराणसी-शक्तिनगर रूट पर चलाया जा रहा है। इसके अलावा विंध्यनगर, काशी, कैंट, ग्रामीण और चंदौली डिपो की बसें भी दौड़ती रहीं, मगर किसी में भी जगह नहीं थी।
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शनिवार की शाम से रविवार की सुबह तक कुछ देर के लिए भीड़ कम हुई थी, लेकिन दोपहर बाद फिर से यात्रियों की संख्या बढ़ गई। हाल यह रहा कि पर्याप्त बसें होने के बाद भी यात्रियों को स्टैंड पर घंटे भर इंतजार करना पड़ा। यात्रियाें में महिलाओं की संख्या अधिक रही। कई महिलाएं सफर के दौरान सीट मिलने की उम्मीद में बस में सवार हुईं, मगर उन्हें खड़े होकर ही यात्रा पूरी करनी पड़ी।
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कोई 30 मिनट तो किसी ने 50 मिनट किया इंतजार
वाराणसी की ओर जा रहीं सुशीला देवी ने बताया कि वह आधे घंटे से डिपो में हैं, मगर बस नहीं मिल पाई है। इस बीच दो बस गुजरीं, लेकिन उनमें खड़े होने की भी जगह नहीं थी। अब तीसरे बस का इंतजार कर रही हैं। रेणुकूट जाने के लिए खड़ी नफीसा और रेहाना ने बताया कि बसें आ रही हैं, लेकिन भीड़ ज्यादा होने से उसमें सफर मुश्किल है। आशा देवी, दीपेंद्र ने बताया कि उन्हें बनारस जाना है। साथ में बच्चे भी हैं। पूरा सफर खड़े होकर करना संभव नहीं है। पौन घंटे से इंतजार कर रहे हैं। खाली बस आएगी तो जाएंगे।
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दो दिन में 15 हजार ने की मुफ्त यात्रा, ढाई गुना तक भीड़
रोडवेज के आंकड़ों पर गौर करें तो सिर्फ सोनभद्र डिपो की बसों में पिछले दो दिनों में 15 हजार लोगों ने मुफ्त यात्रा की है। पिछले वर्ष छह हजार महिलाओं को मुफ्त सफर का लाभ मिला था। इस बार उनके साथ एक सहयात्री का भी किराया माफ है। आठ अगस्त को डिपो की बसों में 8.75 लाख रुपये का कुल किराए का टिकट बना था। इसमें साढ़े तीन लाख किराया मुफ्त यात्रा करने वाले 2700 यात्रियों का रहा। अगले दिन नौ अगस्त को डिपो को 20.97 लाख रुपये किराए का टिकट बना। इसमें 14.50 लाख रुपये किराए पर 11 हजार से अधिक यात्रियों ने मुफ्त सफर किया। अमूमन हर बस में ढाई से तीन गुना किराया कलेक्शन हुआ है। गोरखपुर तक जाने वाली बस सामान्य दिनों में 40-50 रुपये के किराए में आवागमन करती है, जबकि रक्षाबंधन पर उसका कलेक्शन 1.40 लाख रुपये का रहा।
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वर्जन...
पहले दिन से ही बसों में भीड़ बनी हुई है। सामान्य दिनों में 8-10 हजार यात्री निकलते थे, जबकि त्योहार पर संख्या 20 हजार से अधिक रही। यात्रियों की सुविधा के लिए अतिरिक्त बसें लगाई गई हैं। सबसे ज्यादा सवारी वाराणसी-शक्तिनगर रूट पर ही हैं। यात्रियों को बेहतर सुविधा के लिए हरसंभव प्रयास किया जा रहा है। -विश्राम सिंह, एआरएम, सोनभद्र डिपो।
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सामान्य दिनों में 8-10 हजार यात्री बसों में सफर करते हैं, जबकि दो दिनों से संख्या 20 हजार से अधिक रही। होली, दीपावली और छठ पूजा से भी ज्यादा भीड़ बसों में नजर आई। हाल यह था कि पूरे दिन रोडवेज डिपो और उसके बाहर यात्रियों की भीड़ लगी रही। घंटों खड़े होकर उन्हें बसों का इंतजार करना पड़ा। 65 की क्षमता वाली बसों में 90 से 100 यात्रियों ने सफर किया।
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आठ अगस्त की सुबह छह बजे से मुफ्त सफर की सुविधा शुरू हुई थी। इसके बाद से ही रोडवेज की बसों में लगातार भीड़ बनी हुई है। जिले में आवागमन के लिए ट्रेनों की संख्या सीमित होने के कारण अधिकांश लोग बस के सफर पर ही निर्भर हैं। इसके मद्देनजर रोडवेज ने अतिरिक्त बसें भी सड़कों पर उतारी हैं। सोनभद्र डिपो की 72 में से 60 बसों को वाराणसी-शक्तिनगर रूट पर चलाया जा रहा है। इसके अलावा विंध्यनगर, काशी, कैंट, ग्रामीण और चंदौली डिपो की बसें भी दौड़ती रहीं, मगर किसी में भी जगह नहीं थी।
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शनिवार की शाम से रविवार की सुबह तक कुछ देर के लिए भीड़ कम हुई थी, लेकिन दोपहर बाद फिर से यात्रियों की संख्या बढ़ गई। हाल यह रहा कि पर्याप्त बसें होने के बाद भी यात्रियों को स्टैंड पर घंटे भर इंतजार करना पड़ा। यात्रियाें में महिलाओं की संख्या अधिक रही। कई महिलाएं सफर के दौरान सीट मिलने की उम्मीद में बस में सवार हुईं, मगर उन्हें खड़े होकर ही यात्रा पूरी करनी पड़ी।
कोई 30 मिनट तो किसी ने 50 मिनट किया इंतजार
वाराणसी की ओर जा रहीं सुशीला देवी ने बताया कि वह आधे घंटे से डिपो में हैं, मगर बस नहीं मिल पाई है। इस बीच दो बस गुजरीं, लेकिन उनमें खड़े होने की भी जगह नहीं थी। अब तीसरे बस का इंतजार कर रही हैं। रेणुकूट जाने के लिए खड़ी नफीसा और रेहाना ने बताया कि बसें आ रही हैं, लेकिन भीड़ ज्यादा होने से उसमें सफर मुश्किल है। आशा देवी, दीपेंद्र ने बताया कि उन्हें बनारस जाना है। साथ में बच्चे भी हैं। पूरा सफर खड़े होकर करना संभव नहीं है। पौन घंटे से इंतजार कर रहे हैं। खाली बस आएगी तो जाएंगे।
दो दिन में 15 हजार ने की मुफ्त यात्रा, ढाई गुना तक भीड़
रोडवेज के आंकड़ों पर गौर करें तो सिर्फ सोनभद्र डिपो की बसों में पिछले दो दिनों में 15 हजार लोगों ने मुफ्त यात्रा की है। पिछले वर्ष छह हजार महिलाओं को मुफ्त सफर का लाभ मिला था। इस बार उनके साथ एक सहयात्री का भी किराया माफ है। आठ अगस्त को डिपो की बसों में 8.75 लाख रुपये का कुल किराए का टिकट बना था। इसमें साढ़े तीन लाख किराया मुफ्त यात्रा करने वाले 2700 यात्रियों का रहा। अगले दिन नौ अगस्त को डिपो को 20.97 लाख रुपये किराए का टिकट बना। इसमें 14.50 लाख रुपये किराए पर 11 हजार से अधिक यात्रियों ने मुफ्त सफर किया। अमूमन हर बस में ढाई से तीन गुना किराया कलेक्शन हुआ है। गोरखपुर तक जाने वाली बस सामान्य दिनों में 40-50 रुपये के किराए में आवागमन करती है, जबकि रक्षाबंधन पर उसका कलेक्शन 1.40 लाख रुपये का रहा।
वर्जन...
पहले दिन से ही बसों में भीड़ बनी हुई है। सामान्य दिनों में 8-10 हजार यात्री निकलते थे, जबकि त्योहार पर संख्या 20 हजार से अधिक रही। यात्रियों की सुविधा के लिए अतिरिक्त बसें लगाई गई हैं। सबसे ज्यादा सवारी वाराणसी-शक्तिनगर रूट पर ही हैं। यात्रियों को बेहतर सुविधा के लिए हरसंभव प्रयास किया जा रहा है। -विश्राम सिंह, एआरएम, सोनभद्र डिपो।