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महाराणा प्रताप-लक्ष्मीबाई के जीवन से लें प्रेरणा
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सोनभद्र। क्षत्रिय महासभा की तरफ से शनिवार को प्रदेश उपाध्यक्ष डा. गोपाल सिंह के आवास पर भारत के वीर सपूत, महान योद्धा महाराणा प्रताप की जयंती मनाई गई। इस दौरान राष्ट्र के गौरव महाराणा प्रताप के अद्भुत शौर्य एवं साहस का जिक्र करते हुए देश के नौनिहालों, युवाओं से उनके जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया गया। लॉकडाउन के चलते बेहद ही सादे समारोह में मनाई गई जयंती में अधिकांश लोगों ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म के जरिए ऑनलाइन सहभागिता दर्ज कराई।
डा. गोपाल सिंह ने कहा कि महाराणा प्रताप आजीवन देश की एकता और अखंडता के लिए विदेशी आक्रांताओं से संघर्ष करते रहे। विपरीत से विपरीत परिस्थितियों में े उनका दृढ़ संकल्प बना रहा। उन्होंने न केवल भारत के आन-बान-शान के लिए अपने जीवन का बलिदान किया बल्कि जाति-पाति, ऊंच-नीच से उपर उठकर सामाजिक समरसता का भी व्यापक संदेश दिया।
अध्यक्षता कर रहे जिलाध्यक्ष हिमांशु सिंह ने कहा कि चाहे महाराणा प्रताप का जीवन हो या लक्ष्मीबाई का। दोनों ने जीवन के अंतिम सांस तक विदेशी आक्रांताओं की अधीनता स्वीकार नहीं की। इस जज्बे, इस शौर्य को हमेशा रखना होगा। उपाध्यक्ष शीतला सिंह, शमशेर बहादुर सिंह ने कहा कि भारत देश वीरों का देश रहा है। यहां के अमर सपूतों ने कई ऐसी गाथाएं रची है, जिस पर देश का बच्चा-बच्चा गर्व करता है। वर्तमान परिस्थितियों में ऐसे वीर सपूतों की देश को बहुत जरूरत है। नई पीढ़ी को इसे समझना होगा और उनसे सीख लेते हुए आगे बढ़ना होगा। गजेंद्र सिंह, सोनेंद्र सिंह रघुवंशी, राहुल सिंह, अंकित सिंह ने भी राणा प्रताप के शौर्य और साहस का जिक्र करते हुए पदचिन्हों के अनुसरण पर बल दिया।
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डा. गोपाल सिंह ने कहा कि महाराणा प्रताप आजीवन देश की एकता और अखंडता के लिए विदेशी आक्रांताओं से संघर्ष करते रहे। विपरीत से विपरीत परिस्थितियों में े उनका दृढ़ संकल्प बना रहा। उन्होंने न केवल भारत के आन-बान-शान के लिए अपने जीवन का बलिदान किया बल्कि जाति-पाति, ऊंच-नीच से उपर उठकर सामाजिक समरसता का भी व्यापक संदेश दिया।
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अध्यक्षता कर रहे जिलाध्यक्ष हिमांशु सिंह ने कहा कि चाहे महाराणा प्रताप का जीवन हो या लक्ष्मीबाई का। दोनों ने जीवन के अंतिम सांस तक विदेशी आक्रांताओं की अधीनता स्वीकार नहीं की। इस जज्बे, इस शौर्य को हमेशा रखना होगा। उपाध्यक्ष शीतला सिंह, शमशेर बहादुर सिंह ने कहा कि भारत देश वीरों का देश रहा है। यहां के अमर सपूतों ने कई ऐसी गाथाएं रची है, जिस पर देश का बच्चा-बच्चा गर्व करता है। वर्तमान परिस्थितियों में ऐसे वीर सपूतों की देश को बहुत जरूरत है। नई पीढ़ी को इसे समझना होगा और उनसे सीख लेते हुए आगे बढ़ना होगा। गजेंद्र सिंह, सोनेंद्र सिंह रघुवंशी, राहुल सिंह, अंकित सिंह ने भी राणा प्रताप के शौर्य और साहस का जिक्र करते हुए पदचिन्हों के अनुसरण पर बल दिया।
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