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उदय होते सूरजदेव को अर्घ्य देकर मांगी सुख-समृद्धि
sonbhadra
Updated Thu, 15 Nov 2018 12:35 AM IST
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सूर्योपासना का महापर्व छठ:
सूर्योपासना का महापर्व छठ:
उदय होते सूरजदेव को अर्घ्य देकर मांगी सुख-समृद्धि
प्रसाद वितरण के साथ किया 36 घंटे के व्रत का समापन
सूर्यदेव की पहली झलक पाने के लिए श्रद्धालु रहे बेकरार
गाजे-बाजे के साथ की अगवानी, देर तक लगाया जयकारा
फोटो -
अमर उजाला ब्यूरो
सोनभद्र। प्रकृति के प्रति आस्था बढ़ाने वाले सूर्योपासना के चारदिनी महापर्व का बुधवार को उदय होते सूर्य को अर्घ्य के साथ समापन हो गया। सुबह अर्घ्य के समय जहां पूजा घाट श्रद्धालुओं से पटे रहे। वहीं पौ फटने के साथ ही गाजे-बाजे के साथ उदय होते सूर्य की अगवानी की गई और उनकी विधि-विधान से पूजा कर सुख-समृद्धि, लंबी आयु और आरोग्यता का वरदान मांगा गया। व्रती महिलाओं और परिवार के लोगों ने सूप में पूजन सामग्री सजाकर, दीप जलाकर और गन्ने का मंडप सजाकर छठगीत गाते हुए कमर भर पानी में खड़े होकर सूरजदेव को अर्घ्य दिया। प्रसाद वितरण के बाद व्रतियों ने पारण किया। इस दौरान छठ गीत से चप्पा-चप्पा गुलजार रहा।
इससे पहले पूरी रात पूजा घाटों पर छठ मइया की आराधना होती रही। जगह-जगह जागरण का आयोजन किया गया। राबट्र्सगंज में नगरपालिका रामसरोवर, अकड़हवा तालाब, मेहुड़ी नहर, बढ़ौली के शिव सरोवर, पुसौली तालाब, बिचपई तालाब, गोरारी तालाब, बरकरा तालाब, लोढ़ी तालाब, ढुटेर तालाब, मरकरी नहर, तरावां तालाब आदि पर व्रतियों ने जहां पूरी रात जागते हुए आराधना में गुजारी। सुबह फल-प्रसाद से सजे सूप के साथ सूर्यदेव को अर्घ्य देने और प्रसाद वितरण के बाद 36 घंटे का निर्जला व्रत पूरा किया। सभी जगह सुरक्षा के कड़े प्रबंध बने रहे।
डाला: कोटा छठ घाट, काली मंदिर घाट, कुरदहवां नाला छठ घाट पर व्रतियों ने उदय होते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन किया। यहां भाजपा जिला कार्य समिति सदस्य मुकेश जैन, ग्राम पंचायत सदस्य आदि ने पूजा के बाद छठ घाट पर फैले कूड़े की सफाई की। रीशू जायसवाल, राजू, रामसूरत, रामा, मान सिंह, समोधिया, दयाराम गुप्ता, नौशाद आदि ने भी सहभागिता दर्ज कराई।
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ओबरा: पुत्र और सुहाग की मंगल कामना को लेकर किया जाने वाला महाछठ पर्व का बुधवार की सुबह उदयाचलगामी सूर्य को अघ्र्य देकर व्रतियों ने अपना व्रत पूर्ण किया। इस दौरान छठ मइया के भक्ति गीतों से परिक्षेत्र गुलजार रहा। नगर क्षेत्र में बारह से अधिक छठ घाटों पर सूर्यदेव की उपासना की। अर्घ्य के मद्देनजर भोर से ही घाटों पर भीड़ जमा हो गई थी। मंगलवार की रात रेणु नदी छठ घाट सहित अन्य छठ स्थलों पर देवी जागरण का भी आयोजन किया गया। महिमा छठी मईया के इ जहनवा जाने ला.., बानी शेर पर सवार जैसे भक्ति गीत माहौल को भक्तिमय बनाए रहे। ठंड से बचाव के लिए अलाव की व्यवस्था बनी रही। नगर पंचायत अध्यक्ष प्रानमति देवी, पूर्व नपं अध्यक्ष दुर्गावती देवी, उमाशंकर सिंह, अधिशासी अधिकारी टीएन चौबे, संजय बैसवार, रमेश सिंह यादव, आनंद पटेल दयालु, मिथिलेश अग्रहरि, धर्मराज सिंह आदि व्यवस्था में लगे रहे।
बभनी: सूर्यषष्ठी पर्व भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। मंगलवार को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रतिरयों ने पूरी रात छठ मइया और सूर्यदेव की आराधना की। सुबह उगते सूरज को अर्घ्य देकर व्रत पूर्ण किया। इलाके के सभी 25 छठ घाट बभनी, चपकी, असनहर, नधिरा, करमघट्टी, शीशटोला, भंवर, जिगनहवा, चैनपुर, पोखरा, चकसानी, खोतोमहुआ आदि पर भक्तों की भीड़ लगी रही। सूप में पूजन सामग्री सजाकर, दीप जलाकर और गन्ने का मंडप सजाकर छठगीत गाते हुए सूर्य को अघ्र्य दिया।
सलखन: गुरमा बेलकप पंचायत भवन से सटा, मारकुंडी में घाघर नदी किे कसहवा घाट, भैसासुर घाट, शीतला मंदिर घाट, तलाई चकरिया घाट, सलखन में आदर्श तालाब, अवई, केवटा में नहर घाट पर उदीयमान भगवान भाष्कर को अर्घ्य दिया गया। सभी जगह रात में जागरण का आयोजन किया गया। अवई छठ घाट पर ओबरा विधायक संजय सिंह गोंड़ ने फीता काटकर देवी जागरण का उद्घाटन किया गया। गुरमा नगर पंचायत के शीतला मंदिर छठ घाट पर धनुष यज्ञ की लीला मंचित की गई।
दुद्धी: कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष के चतुर्थी तिथि (छठ महापर्व) पर व्रती महिलाओं ने मराठा प्राचीन तालाब, कैलाश कुंज द्वार, जाबर, धनौरा, लौवा नदी आदि स्थानों पर जलाशयों में उतर कर भगवान भाष्कर की उपासना की। ठेकुआ, फल, चावल के बने लड्डू आदि से सूप को सजाकर दूध और जल से सूर्य को ऊषा अर्घ्य दिया। परिवार के सुख-समृद्धि, आरोग्यता की कामना की। युवा स्वर्णकार संघ ने मां विध्वासनी जागरण आयोजित कराया। कानपुर के सुरजीत सिंह अलबेला ने क्या लेकर आया है और क्या लेकर जाएंगा ख़ाली हाथ आया है खाली हाथ जायेगा.., वाराणसी की गीतांजलि मौर्या ने सोहर केलवा के जुग जुग लालनऊ.., निमियां के डार मईया झूलेली झुलनवां..., लोक गायक हंसराज यादव ने निमियां नाहिरवा ऐ माईं निमियां सुखवा.. आदि भक्ति गीतों की प्रस्तुति दी। प्रयागराज की पूजा केशरवानी नें प्यारा सजा है तेरा द्वार भवानी सहित कई भक्ति गीत सुनाए। युवा स्वर्णकार संघ के अध्यक्ष अरविंद सोनी, चंदन सोनी, अभिषेक जौहरी, आशुतोष चौहरी, विकास जौहरी, विवेक जौहरी, अवधेश जौहरी, रामपाल जौहरी, नीरज जायसवाल, जगदंबा जौहरी, डा. केके चौरसिया, बालकृष्ण जायसवाल आदि मौजूद रहे।
चोपन: उगते सूर्य के दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं का भोर में तीन बजे से सोन नदी स्थित छठ घाट के लिए पहुंचना शुरू हो गया। पौ फटते ही व्रती महिलाएं पानी में उतरकर भगवान भाष्कर के उपासना में लग गईं। जैसे ही सूर्यदेव ने दर्शन दिया, सूप में पूजन सामग्री और फलों की थाल सजाकर भगवान भाष्कर को अर्घ्य देने का काम शुरू कर दिया गया। इस दौरान गाजे-बाजे के साथ श्रद्धालु सूर्यदेव और छठ मइया के जयकारे लगाते रहे। राजा मिश्रा, प्रदीप अग्रवाल, संजय जैन, सुनील सिंह, महेंद्र केशरी, दिव्य विकास सिंह, शब्बीर खान, विजय अग्रहरी, उमेश सिंह टीटी आदि व्यवस्था में लगे रहे। अधिवक्ता अमित सिंह ने संचालन किया।
म्योरपुर: लिलासी मोड़ स्थित हनुमान मंदिर छठ घाट पर छठ पूजन और उदयाचलगामी सूर्य की पहली झलक पाने के लिए भोर से ही भीड़ लगी रही। सुबह सवा छह बजे अर्घ्य देकर चार दिनी व्रत-पूजन का समापन किया गया।
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सूर्योपासना का महापर्व छठ:
उदय होते सूरजदेव को अर्घ्य देकर मांगी सुख-समृद्धि
प्रसाद वितरण के साथ किया 36 घंटे के व्रत का समापन
सूर्यदेव की पहली झलक पाने के लिए श्रद्धालु रहे बेकरार
गाजे-बाजे के साथ की अगवानी, देर तक लगाया जयकारा
फोटो -
अमर उजाला ब्यूरो
सोनभद्र। प्रकृति के प्रति आस्था बढ़ाने वाले सूर्योपासना के चारदिनी महापर्व का बुधवार को उदय होते सूर्य को अर्घ्य के साथ समापन हो गया। सुबह अर्घ्य के समय जहां पूजा घाट श्रद्धालुओं से पटे रहे। वहीं पौ फटने के साथ ही गाजे-बाजे के साथ उदय होते सूर्य की अगवानी की गई और उनकी विधि-विधान से पूजा कर सुख-समृद्धि, लंबी आयु और आरोग्यता का वरदान मांगा गया। व्रती महिलाओं और परिवार के लोगों ने सूप में पूजन सामग्री सजाकर, दीप जलाकर और गन्ने का मंडप सजाकर छठगीत गाते हुए कमर भर पानी में खड़े होकर सूरजदेव को अर्घ्य दिया। प्रसाद वितरण के बाद व्रतियों ने पारण किया। इस दौरान छठ गीत से चप्पा-चप्पा गुलजार रहा।
इससे पहले पूरी रात पूजा घाटों पर छठ मइया की आराधना होती रही। जगह-जगह जागरण का आयोजन किया गया। राबट्र्सगंज में नगरपालिका रामसरोवर, अकड़हवा तालाब, मेहुड़ी नहर, बढ़ौली के शिव सरोवर, पुसौली तालाब, बिचपई तालाब, गोरारी तालाब, बरकरा तालाब, लोढ़ी तालाब, ढुटेर तालाब, मरकरी नहर, तरावां तालाब आदि पर व्रतियों ने जहां पूरी रात जागते हुए आराधना में गुजारी। सुबह फल-प्रसाद से सजे सूप के साथ सूर्यदेव को अर्घ्य देने और प्रसाद वितरण के बाद 36 घंटे का निर्जला व्रत पूरा किया। सभी जगह सुरक्षा के कड़े प्रबंध बने रहे।
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ओबरा: पुत्र और सुहाग की मंगल कामना को लेकर किया जाने वाला महाछठ पर्व का बुधवार की सुबह उदयाचलगामी सूर्य को अघ्र्य देकर व्रतियों ने अपना व्रत पूर्ण किया। इस दौरान छठ मइया के भक्ति गीतों से परिक्षेत्र गुलजार रहा। नगर क्षेत्र में बारह से अधिक छठ घाटों पर सूर्यदेव की उपासना की। अर्घ्य के मद्देनजर भोर से ही घाटों पर भीड़ जमा हो गई थी। मंगलवार की रात रेणु नदी छठ घाट सहित अन्य छठ स्थलों पर देवी जागरण का भी आयोजन किया गया। महिमा छठी मईया के इ जहनवा जाने ला.., बानी शेर पर सवार जैसे भक्ति गीत माहौल को भक्तिमय बनाए रहे। ठंड से बचाव के लिए अलाव की व्यवस्था बनी रही। नगर पंचायत अध्यक्ष प्रानमति देवी, पूर्व नपं अध्यक्ष दुर्गावती देवी, उमाशंकर सिंह, अधिशासी अधिकारी टीएन चौबे, संजय बैसवार, रमेश सिंह यादव, आनंद पटेल दयालु, मिथिलेश अग्रहरि, धर्मराज सिंह आदि व्यवस्था में लगे रहे।
बभनी: सूर्यषष्ठी पर्व भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। मंगलवार को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रतिरयों ने पूरी रात छठ मइया और सूर्यदेव की आराधना की। सुबह उगते सूरज को अर्घ्य देकर व्रत पूर्ण किया। इलाके के सभी 25 छठ घाट बभनी, चपकी, असनहर, नधिरा, करमघट्टी, शीशटोला, भंवर, जिगनहवा, चैनपुर, पोखरा, चकसानी, खोतोमहुआ आदि पर भक्तों की भीड़ लगी रही। सूप में पूजन सामग्री सजाकर, दीप जलाकर और गन्ने का मंडप सजाकर छठगीत गाते हुए सूर्य को अघ्र्य दिया।
सलखन: गुरमा बेलकप पंचायत भवन से सटा, मारकुंडी में घाघर नदी किे कसहवा घाट, भैसासुर घाट, शीतला मंदिर घाट, तलाई चकरिया घाट, सलखन में आदर्श तालाब, अवई, केवटा में नहर घाट पर उदीयमान भगवान भाष्कर को अर्घ्य दिया गया। सभी जगह रात में जागरण का आयोजन किया गया। अवई छठ घाट पर ओबरा विधायक संजय सिंह गोंड़ ने फीता काटकर देवी जागरण का उद्घाटन किया गया। गुरमा नगर पंचायत के शीतला मंदिर छठ घाट पर धनुष यज्ञ की लीला मंचित की गई।
दुद्धी: कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष के चतुर्थी तिथि (छठ महापर्व) पर व्रती महिलाओं ने मराठा प्राचीन तालाब, कैलाश कुंज द्वार, जाबर, धनौरा, लौवा नदी आदि स्थानों पर जलाशयों में उतर कर भगवान भाष्कर की उपासना की। ठेकुआ, फल, चावल के बने लड्डू आदि से सूप को सजाकर दूध और जल से सूर्य को ऊषा अर्घ्य दिया। परिवार के सुख-समृद्धि, आरोग्यता की कामना की। युवा स्वर्णकार संघ ने मां विध्वासनी जागरण आयोजित कराया। कानपुर के सुरजीत सिंह अलबेला ने क्या लेकर आया है और क्या लेकर जाएंगा ख़ाली हाथ आया है खाली हाथ जायेगा.., वाराणसी की गीतांजलि मौर्या ने सोहर केलवा के जुग जुग लालनऊ.., निमियां के डार मईया झूलेली झुलनवां..., लोक गायक हंसराज यादव ने निमियां नाहिरवा ऐ माईं निमियां सुखवा.. आदि भक्ति गीतों की प्रस्तुति दी। प्रयागराज की पूजा केशरवानी नें प्यारा सजा है तेरा द्वार भवानी सहित कई भक्ति गीत सुनाए। युवा स्वर्णकार संघ के अध्यक्ष अरविंद सोनी, चंदन सोनी, अभिषेक जौहरी, आशुतोष चौहरी, विकास जौहरी, विवेक जौहरी, अवधेश जौहरी, रामपाल जौहरी, नीरज जायसवाल, जगदंबा जौहरी, डा. केके चौरसिया, बालकृष्ण जायसवाल आदि मौजूद रहे।
चोपन: उगते सूर्य के दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं का भोर में तीन बजे से सोन नदी स्थित छठ घाट के लिए पहुंचना शुरू हो गया। पौ फटते ही व्रती महिलाएं पानी में उतरकर भगवान भाष्कर के उपासना में लग गईं। जैसे ही सूर्यदेव ने दर्शन दिया, सूप में पूजन सामग्री और फलों की थाल सजाकर भगवान भाष्कर को अर्घ्य देने का काम शुरू कर दिया गया। इस दौरान गाजे-बाजे के साथ श्रद्धालु सूर्यदेव और छठ मइया के जयकारे लगाते रहे। राजा मिश्रा, प्रदीप अग्रवाल, संजय जैन, सुनील सिंह, महेंद्र केशरी, दिव्य विकास सिंह, शब्बीर खान, विजय अग्रहरी, उमेश सिंह टीटी आदि व्यवस्था में लगे रहे। अधिवक्ता अमित सिंह ने संचालन किया।
म्योरपुर: लिलासी मोड़ स्थित हनुमान मंदिर छठ घाट पर छठ पूजन और उदयाचलगामी सूर्य की पहली झलक पाने के लिए भोर से ही भीड़ लगी रही। सुबह सवा छह बजे अर्घ्य देकर चार दिनी व्रत-पूजन का समापन किया गया।