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Sonebhadra News: पारिवारिक अपेक्षा और संवाद की कमी से बढ़ रहे आत्महत्या के मामले
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दुद्धी। भाऊराव देवरस राजकीय महाविद्यालय में बुधवार को आत्महत्या रोकथाम दिवस पर संगोष्ठी हुई। मानसिक स्वास्थ्य और छात्र आत्महत्या रोकथाम विषय पर संगोष्ठी में युवाओं में बढ़ती आत्महत्या की प्रवृत्ति के कारणों और समाधान पर चर्चा की गई।
संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. रामसेवक सिंह यादव ने किया। वक्ता डॉ. सचिन कुमार विश्वकर्मा ने कहा कि बढ़ते शैक्षणिक दबाव और प्रतियोगिता के कारण छात्रों में मानसिक तनाव बढ़ रहा है। कॉलेज केवल ज्ञान का केंद्र न बनें, बल्कि छात्रों को काउंसिलिंग, संवाद और संवेदनशील वातावरण देकर जीवन रक्षा की दिशा में कार्य करें।
डॉ. राजेश कुमार यादव ने कहा कि शिक्षण संस्थान एक विशेष ज्ञान के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य का सहारा भी दें। डॉ. गीता ने कही कि छात्र आत्महत्या के शैक्षणिक दबाव, असफलता का भय, पारिवारिक अपेक्षा, संवाद की कमी और मानसिक स्वास्थ्य कमजोर होना है।
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नियमित काउंसिलिंग, संवाद की संस्कृति और जागरूकता कार्यक्रम से हम इसे दूर कर सकते हैं। मिथिलेश कुमार गौतम ने कहा कि आज के समय में उच्च शिक्षा संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य एक गंभीर चुनौती है। शिक्षा का उद्देश्य केवल सफलता नहीं बल्कि स्वस्थ मानसिक संतुलन और सकारात्मक जीवन निर्माण भी होना चाहिए।
अध्यक्षता कर रहे प्राचार्य डॉ. रामसेवक सिंह यादव ने छात्र आत्महत्या के सामाजिक एवं आर्थिक कारणों पर चर्चा करते हुए कहा कि अत्यधिक सामाजिक उपेक्षाएं, पारिवारिक दबाव, बेरोजगारी और आर्थिक तंगी छात्रों को गहरे तनाव में ले जाते हैं। संवाद
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संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. रामसेवक सिंह यादव ने किया। वक्ता डॉ. सचिन कुमार विश्वकर्मा ने कहा कि बढ़ते शैक्षणिक दबाव और प्रतियोगिता के कारण छात्रों में मानसिक तनाव बढ़ रहा है। कॉलेज केवल ज्ञान का केंद्र न बनें, बल्कि छात्रों को काउंसिलिंग, संवाद और संवेदनशील वातावरण देकर जीवन रक्षा की दिशा में कार्य करें।
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डॉ. राजेश कुमार यादव ने कहा कि शिक्षण संस्थान एक विशेष ज्ञान के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य का सहारा भी दें। डॉ. गीता ने कही कि छात्र आत्महत्या के शैक्षणिक दबाव, असफलता का भय, पारिवारिक अपेक्षा, संवाद की कमी और मानसिक स्वास्थ्य कमजोर होना है।
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नियमित काउंसिलिंग, संवाद की संस्कृति और जागरूकता कार्यक्रम से हम इसे दूर कर सकते हैं। मिथिलेश कुमार गौतम ने कहा कि आज के समय में उच्च शिक्षा संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य एक गंभीर चुनौती है। शिक्षा का उद्देश्य केवल सफलता नहीं बल्कि स्वस्थ मानसिक संतुलन और सकारात्मक जीवन निर्माण भी होना चाहिए।
अध्यक्षता कर रहे प्राचार्य डॉ. रामसेवक सिंह यादव ने छात्र आत्महत्या के सामाजिक एवं आर्थिक कारणों पर चर्चा करते हुए कहा कि अत्यधिक सामाजिक उपेक्षाएं, पारिवारिक दबाव, बेरोजगारी और आर्थिक तंगी छात्रों को गहरे तनाव में ले जाते हैं। संवाद