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निजीकरण के विरोध में छात्रों ने किया विरोध प्रदर्शन
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ओबरा इंटरमीडिएट कालेज में विरोध प्रदर्शन कर धरने पर बैठे छात्र छात्राएं। संवाद
- फोटो : SONBHADRA
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ओबरा इंटर कॉलेज का निजीकरण करने को लेकर विद्यालय के छात्र छात्राओं ने शुक्रवार को विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान छात्र छात्राओं ने परियोजना प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
आंदोलन कर रहे छात्रों ने बताया कि उच्च बिजली प्रबंधन इंटर कॉलेज के निजीकरण का निर्णय लेकर छात्रों के भविष्य को अंधकार में डाल रहा है। ओबरा इंटरमीडिएट कॉलेज पूरी तरह से गरीब आदिवासी बनवासी क्षेत्रों के बीच बसा हुआ है। इस विद्यालय में बिल्ली, खैरटिया, सेमिया, कुडारी, अगोरी, टापू, अरंगी, चकाड़ी, गुरुड़, परसोई, फफराकुंड सहित दर्जनों आदिवासी बहुल गांवों के बच्चे पढ़ने आते हैं।
निजी हाथों में विद्यालय को सौंपे जाने के पश्चात आदिवासी बनवासी क्षेत्र के गरीब बच्चे शिक्षा से वंचित रह जाएंगे। इस विद्यालय के माध्यम से ही गरीब आदिवासी बच्चे समाज से जुड़ने में सहायक बने हैं। इस विद्यालय का निजीकरण होने की स्थिति में बच्चों का भविष्य अंधकार में हो जाएगा। वहीं युवा गरीब आदिवासी बच्चे समाज से कटकर गलत रास्ते पर चलने का अंदेशा बढ़ जाएगा।
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इस दौरान छात्र-छात्राओं ने मांग किया कि इस कॉलेज को पूर्व की तरह गवर्नमेंट कॉलेज घोषित किया जाए। विद्यालय का नवीनीकरण कराकर सुंदरीकरण कराया जाए। बिजली व्यवस्था सुदृढ़ कराई जाए। अन्यथा की स्थिति में बच्चे लगातार आंदोलन करने को विवश होंगे।
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आंदोलन कर रहे छात्रों ने बताया कि उच्च बिजली प्रबंधन इंटर कॉलेज के निजीकरण का निर्णय लेकर छात्रों के भविष्य को अंधकार में डाल रहा है। ओबरा इंटरमीडिएट कॉलेज पूरी तरह से गरीब आदिवासी बनवासी क्षेत्रों के बीच बसा हुआ है। इस विद्यालय में बिल्ली, खैरटिया, सेमिया, कुडारी, अगोरी, टापू, अरंगी, चकाड़ी, गुरुड़, परसोई, फफराकुंड सहित दर्जनों आदिवासी बहुल गांवों के बच्चे पढ़ने आते हैं।
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निजी हाथों में विद्यालय को सौंपे जाने के पश्चात आदिवासी बनवासी क्षेत्र के गरीब बच्चे शिक्षा से वंचित रह जाएंगे। इस विद्यालय के माध्यम से ही गरीब आदिवासी बच्चे समाज से जुड़ने में सहायक बने हैं। इस विद्यालय का निजीकरण होने की स्थिति में बच्चों का भविष्य अंधकार में हो जाएगा। वहीं युवा गरीब आदिवासी बच्चे समाज से कटकर गलत रास्ते पर चलने का अंदेशा बढ़ जाएगा।
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इस दौरान छात्र-छात्राओं ने मांग किया कि इस कॉलेज को पूर्व की तरह गवर्नमेंट कॉलेज घोषित किया जाए। विद्यालय का नवीनीकरण कराकर सुंदरीकरण कराया जाए। बिजली व्यवस्था सुदृढ़ कराई जाए। अन्यथा की स्थिति में बच्चे लगातार आंदोलन करने को विवश होंगे।