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हाईवे तैयार, पहुंचेगी बिजली
ब्यूरो,अमर उजाला/सोनभद्र
Updated Thu, 31 Mar 2016 12:18 AM IST
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अनपरा डी की पहली और दूसरी दोनों इकाइयों से उत्पादित 1000 मेगावाट बिजली को गांव-गांव भेजने की व्यवस्था हो गई है। इसके लिए पारेषण लाइन का हाईवे तैयार हो गया है। अनपरा डी की बिजली को अब उसी लाइन के जरिए ग्रिड तक पहुंचाया जाएगा, जिससे अनपरा बी की बिजली ले जाई जाती है। दोनों लाइनों को जोड़ने में सफलता प्राप्त हो गई है।
अनपरा डी परियोजना में पांच-पांच सौ मेगावाट की दो उत्पादन इकाइयों के निर्माण का काम वर्ष 2008 में निर्माण शुरू हुआ। अनपरा की अन्य इकाइयों से निकली राख के ढेर पर बनने वाली इन उत्पादन इकाइयों की निर्माण में कई तरह की चुनौतियां सामने आईं, जिसके चलते परियोजना लेट होती गई। आखिरकार 31 मार्च 2015 को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इसकी पहली इकाई का लोकार्पण कर दिया लेकिन इसकी बिजली लोगों तक आज भी नहीं पहुंच पाई है।
इस बीच दूसरी इकाई भी शुरू हो गई। दोनों इकाइयों में उत्पादित 1000 मेगावाट बिजली ग्रिड में पहुंचने के बाद गर्मियों में विद्युत संकट काफी हद तक कम हो जाएगा लेकिन इसे पावर ग्रिड तक भेजने का कोई रास्ता ही नहीं था। अनपरा में बनने वाली बिजली को ग्रिड तक पहुंचाने के लिए अनपरा-उन्नाव के बीच 765 केवीए क्षमता की नई लाइन बनाई जा रही हो लेकिन पर्यावरण क्लीयरेंस के चलते इसका काम रुका हुआ है।
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जब तक यह मामला सुलझता नहीं तब तक अनपरा डी की बिजली को लोगों को घरों तक भेजना संभव नही हो पाएगा। मगर अभियंताओं ने बीच का रास्ता निकाल लिया है। अनपरा डी को अनपरा बी की लाइन से जोड़कर यहां की बिजली को आगे भेजने की तैयारी कर ली गई है। इसके लिए अनपरा डी से अनपरा बी के बीच चार केवीए की लाइन बना दी गई है। अब इस वैकल्पिक रास्ते से ही बिजली ग्रिड तक पहुंचाई जाएगी।
आखिरकार पांच वर्ष बाद इस लाइन का काम भी पूर्ण हो गया। फिलहाल पांच सौ मेगावाट की दूसरी इकाई से उत्पादन जारी है और पहली इकाई से अप्रैल के दूसरे हफ्ते में पूर्ण उत्पादन होने लगेगा। अधिशासी अभियंता पारेषण एके चौरसिया ने नई लाइन तैयार होने की बात की पुष्टि की और कहा कि 31 मार्च या इसके बाद किसी भी समय लाइन चार्ज कर ली जाएगी और अनपरा डी की बिजली घरों तक पहुंचने लगेगी।
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अनपरा डी परियोजना में पांच-पांच सौ मेगावाट की दो उत्पादन इकाइयों के निर्माण का काम वर्ष 2008 में निर्माण शुरू हुआ। अनपरा की अन्य इकाइयों से निकली राख के ढेर पर बनने वाली इन उत्पादन इकाइयों की निर्माण में कई तरह की चुनौतियां सामने आईं, जिसके चलते परियोजना लेट होती गई। आखिरकार 31 मार्च 2015 को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इसकी पहली इकाई का लोकार्पण कर दिया लेकिन इसकी बिजली लोगों तक आज भी नहीं पहुंच पाई है।
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इस बीच दूसरी इकाई भी शुरू हो गई। दोनों इकाइयों में उत्पादित 1000 मेगावाट बिजली ग्रिड में पहुंचने के बाद गर्मियों में विद्युत संकट काफी हद तक कम हो जाएगा लेकिन इसे पावर ग्रिड तक भेजने का कोई रास्ता ही नहीं था। अनपरा में बनने वाली बिजली को ग्रिड तक पहुंचाने के लिए अनपरा-उन्नाव के बीच 765 केवीए क्षमता की नई लाइन बनाई जा रही हो लेकिन पर्यावरण क्लीयरेंस के चलते इसका काम रुका हुआ है।
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जब तक यह मामला सुलझता नहीं तब तक अनपरा डी की बिजली को लोगों को घरों तक भेजना संभव नही हो पाएगा। मगर अभियंताओं ने बीच का रास्ता निकाल लिया है। अनपरा डी को अनपरा बी की लाइन से जोड़कर यहां की बिजली को आगे भेजने की तैयारी कर ली गई है। इसके लिए अनपरा डी से अनपरा बी के बीच चार केवीए की लाइन बना दी गई है। अब इस वैकल्पिक रास्ते से ही बिजली ग्रिड तक पहुंचाई जाएगी।
आखिरकार पांच वर्ष बाद इस लाइन का काम भी पूर्ण हो गया। फिलहाल पांच सौ मेगावाट की दूसरी इकाई से उत्पादन जारी है और पहली इकाई से अप्रैल के दूसरे हफ्ते में पूर्ण उत्पादन होने लगेगा। अधिशासी अभियंता पारेषण एके चौरसिया ने नई लाइन तैयार होने की बात की पुष्टि की और कहा कि 31 मार्च या इसके बाद किसी भी समय लाइन चार्ज कर ली जाएगी और अनपरा डी की बिजली घरों तक पहुंचने लगेगी।