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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sonebhadra News ›   Sonbhadra's tomatoes and chillies are in demand in foreign countries, yet farmers are empty handed.

Sonebhadra News: सोनभद्र के टमाटर-मिर्च की विदेशों में भी मांग, फिर भी किसानों के हाथ खाली

Tue, 16 Jul 2024 02:35 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 16 Jul 2024 02:35 AM IST
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Sonbhadra's tomatoes and chillies are in demand in foreign countries, yet farmers are empty handed.
करमा। सोनांचल में पैदा वाली मिर्च और टमाटर की मांग विदेशों में खूब है। नेपाल, बांग्लादेश, दुबई सहित कई देशों में यहां की टमाटर और मिर्च जाती है। बावजूद किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल पाता। व्यापारी रियायती कीमत पर खरीद कर ऊंची कीमत पर कारोबार करते हैं। उचित बाजार न मिलने से खेती में अपना खून-पसीना एक करने वाले किसानों की मेहनत का लाभ व्यापारी उठा रहे हैं। वह सीधे खेतों में पहुंचकर किसानों से उपज खरीदते हैं और फिर उसे अपने तरीके से विदेशों में भेजकर बढ़िया मुनाफ कर रहे हैं।
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रॉबर्ट्सगंज, घोरावल, करमा ब्लॉक के गांवों में सब्जी की खेती प्रमुखता से होती है। करमा क्षेत्र के धौरहरा, पुरखास, सिरविट, पगिया, हिनौता, सिरसिया ठकुराई, खैरपुर, टिकुरिया, कुसी, बकाही, खैराही, डीलाही आदि गांव टमाटर और मिर्च की पैदावार के लिए चर्चित हैं। यहां किसान गेहूं, धान से ज्यादा टमाटर, मिर्च और सब्जी की खेती करते हैं। 8000 हेक्टेयर में टमाटर की खेती होती है। ज्यादातर किसान सर्दियों वाले टमाटर की खेती करते हैं। इसी तरह मिर्च की पैदावार भी इस क्षेत्र में खूब होती है। इन दिनों किसान मिर्च के पौधे लगाने में जुटे हैं। हर साल अच्छी आमदनी की उम्मीद में किसान टमाटर और मिर्च की खेती तो करते हैं, लेकिन फसल तैयार होने पर उन्हें पर्याप्त मुनाफा नहीं मिल पाता। इसके पीछे उचित बाजार न होने को कारण बताया जा रहा है। किसान अपनी उपज को मंडी में लाते हैं, जहां अक्सर उनकी उपज को औने-पौने दाम ही मिल पाता है। इससे किराया भी नहीं निकल पाता। उधर, दूसरी कोलकाता, बिहार, गोरखपुर सहित अन्य क्षेत्रों से व्यापारी सीधे किसानों से संपर्क कर उनके खेत से ही माल खरीद लेते हैं। इसके बदले उतना ही दाम मिलता है, जो मंडी में होता है। इससे बस किसानों का किराया बच जाता है। बाद में इसी उपज को व्यापारी अपने माध्यम से नेपाल और बंगाल के रास्ते बांग्लादेश सहित अन्य देशों को भेजते हैं। किसानों का कहना है कि अगर स्थानीय किसानों को सीधे व्यापार से जोड़ने की पहल की जाय तो उनका मुनाफा बढ़ सकता है।
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लखनऊ से छोटे पैक में दुबई भेजी जाती है मिर्च

भरकवाह गांव निवासी रमेश चौहान ने 10 बीघे में मिर्च की खेती की है। उन्होंने बताया कि सोनभद्र की मंडी के आढ़तियों के माध्यम से मिर्च लखनऊ की मंडियों में भेजा जाता है। वहां से फॉर्मर एसोसिएशन के जरिए 4 किलो की पैकिंग कराई जाती है और इसके बाद उन्हें दुबई भेजा जाता है। इनका कहना है कि 500-700 पिकअप मिर्च बाहर भेजी जाती है। धौरहरा निवासी रामपति पटेल ने 20 बीघे में मिर्च की खेती की है। बताया कि यहां की उपज विदेश जाती है। इसके लिए बॉर्डर पर कागजी औपचारिकताएं पूरी करनी होती हैं। जो किसान इसमें सक्षम हैं, वह मुनाफा भी पा रहे हैं। यूनिवर्सल सोनांचल फार्मर एसोसिएशन के प्रबंध निदेशक गोपाल सिंह वैद्य का कहना है कि विदेशों में मिर्च की आपूर्ति होती है। स्थानीय किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए संस्था का लाइसेंस बनवाया जा रहा है। इसके बाद यहां से भी काम शुरू हो जाएगा।
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वर्जन...

जिले में मिर्च और टमाटर की खेती किसान बड़ी तादाद में करते हैं। यह माल विदेश भी जाता है। किसानों को सीधे मुनाफे से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए उनके एफपीओ बनवाए जा रहे हैं। साथ ही प्रोसेसिंग यूनिट भी लगवाने की योजना है। इससे किसान उत्पाद की खुद मार्केटिंग भी कर पाएंगे।

-मेवाराम, जिला उद्यान अधिकारी।
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