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सूबेदार और तीरथराज ने लगाई हैट्रिक तो विजय सात बार जीते
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विधानसभा में जिले का सबसे ज्यादा बार प्रतिनिधित्व करने का रिकार्ड विजय सिंह गोंड के नाम है। दुद्धी सीट से वह लगातार सात बार विधायक चुने गए हैं। वहीं राबर्ट्सगंज सीट पर दो बार हैट्रिक लगी है। दोनों ही बार यह मौका जनसंघ-भाजपा उम्मीदवारों को मिला है। सूबेदार प्रसाद वर्ष 1969 से 77 तक विधायक रहे तो तीरथराज रामलहर के दौरान 1989 से 93 तक लगातार तीन बार विधायक चुने गए।
राबर्ट्सगंज और दुद्धी सीट के लिए वर्ष 1952 से ही विधायक चुने जाते रहे हैं। पहले चुनाव में यह सीट दुद्धी कम राबर्ट्सगंज के नाम थी तो दूसरे चुनाव में राबर्ट्सगंज नाम था। वर्ष 1962 से दोनों सीटें अलग-अलग र्हुइं। वर्ष 1969 के चुनाव में सूबेदार प्रसाद ने भारतीय जनसंघ के उम्मीदवार के रूप में 6383 वोटों से जीत दर्ज की थी। उन्होंने कांग्रेस के रूपनारायण को हराया था। वर्ष 1974 में महज 21 वोटों के अंतर से कांग्रेस के ही राममूर्ति को हराकर वह दूसरी बार विधायक चुने गए। तीसरी बार वर्ष 1977 में वह लगातार तीसरी बार विधायक बने।
वहीं 1989 के चुनाव में जब प्रदेश में राम लहर चल रही थी, तब भाजपा के टिकट पर तीरथराज पहली बार निर्वाचित हुए थे। उन्होंने 26,063 वोटों से कांग्रेस के कल्लूराम को हराया था। कल्लूराम इससे पहले दो बार लगातार चुनाव जीते थे लेकिन उनकी हैट्रिक के मंसूबे पर तीरथराज ने पानी फेर दिया था। इसके बाद 1991 और 1993 के चुनावों में भी तीरथराज ने जीत दर्ज की। उधर, दुद्धी विधानसभा सीट पर विजय सिंह गोंड पहली बार 1980 में कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में निर्वाचित हुए थे। इसके बाद उन्होंने 1984 में कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज की। 1989 में निर्दल जीतकर उन्होंने हैट्रिक लगाई। 1991 और 1993 में जनता दल तो 1996 और 2002 के चुनाव में वह सपा के सिंबल पर जीतकर विधानसभा पहुंचे थे।
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राबर्ट्सगंज और दुद्धी सीट के लिए वर्ष 1952 से ही विधायक चुने जाते रहे हैं। पहले चुनाव में यह सीट दुद्धी कम राबर्ट्सगंज के नाम थी तो दूसरे चुनाव में राबर्ट्सगंज नाम था। वर्ष 1962 से दोनों सीटें अलग-अलग र्हुइं। वर्ष 1969 के चुनाव में सूबेदार प्रसाद ने भारतीय जनसंघ के उम्मीदवार के रूप में 6383 वोटों से जीत दर्ज की थी। उन्होंने कांग्रेस के रूपनारायण को हराया था। वर्ष 1974 में महज 21 वोटों के अंतर से कांग्रेस के ही राममूर्ति को हराकर वह दूसरी बार विधायक चुने गए। तीसरी बार वर्ष 1977 में वह लगातार तीसरी बार विधायक बने।
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वहीं 1989 के चुनाव में जब प्रदेश में राम लहर चल रही थी, तब भाजपा के टिकट पर तीरथराज पहली बार निर्वाचित हुए थे। उन्होंने 26,063 वोटों से कांग्रेस के कल्लूराम को हराया था। कल्लूराम इससे पहले दो बार लगातार चुनाव जीते थे लेकिन उनकी हैट्रिक के मंसूबे पर तीरथराज ने पानी फेर दिया था। इसके बाद 1991 और 1993 के चुनावों में भी तीरथराज ने जीत दर्ज की। उधर, दुद्धी विधानसभा सीट पर विजय सिंह गोंड पहली बार 1980 में कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में निर्वाचित हुए थे। इसके बाद उन्होंने 1984 में कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज की। 1989 में निर्दल जीतकर उन्होंने हैट्रिक लगाई। 1991 और 1993 में जनता दल तो 1996 और 2002 के चुनाव में वह सपा के सिंबल पर जीतकर विधानसभा पहुंचे थे।
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