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पूर्वांचल विकास बोर्ड की बैठक में उठी सोनभद्र की समस्याएं
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पूर्वांचल विकास बोर्ड की बैठक में सोनभद्र के विकास, अवैध खनन और पर्यावरण प्रदूषण का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। बस्ती जिले में हुई बैठक में पूर्वांचल के अंतिम छोर पर स्थिति आदिवासी बहुल जिले के समग्र विकास पर चर्चा हुई।
बोर्ड के सदस्य नगर के प्रकाश गोयल ने पिछड़ेपन और स्थानीय रहवासियों की समस्या को रखा। कहा कि जिले में घोरावल और ओबरा तहसील से लगी यूपी-एमपी की सीमा पर सोन नदी में अवैध खनन धड़ल्ले से हो रहा है। कैमूर वन्य जीव अभ्यारण्य के दायरे में होने के बावजूद पाबंदियों की अनदेखी कर खननकर्ता मनमानी कर रहे हैं। मप्र सरकार की ओर से आवंटित पट्टे की आड़ में यूपी सीमा के गांव शिल्पी और कोरट में नदी की धारा रोककर खनन किया जा रहा है। इससे कुड़ारी देवी के प्राचीन मंदिर के ढहने की आशंका है। सोन नदी के दक्षिण क्षेत्र में स्थित औद्योगिक इकाइयों के कारण बढ़ते प्रदूषण पर चिंता जताते हुए कोन ब्लाक के पड़रक्ष और म्योरपुर के डडिहरा में जन्म दिव्यांगता की चर्चा की। दुद्धी में कनहर नदी बन रहे बांध को भी शीघ्र पूरा कराने, कोन ब्लाक के नकतवार में सोन नदी पर पुल निर्माण में अनियमितता दूर कराने और घोरावल के वर्दिया गांव में वर्षों से अधूरे पुल को पूरा कराने की मांग रखी। वन क्षेत्र में हर वर्ष बिजली गिरने से होने वाली घटनाओं से बचाव के लिए पहाड़ों पर ताड़ चालित यंत्र स्थापित करने का भी सुझाव दिया।
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बोर्ड के सदस्य नगर के प्रकाश गोयल ने पिछड़ेपन और स्थानीय रहवासियों की समस्या को रखा। कहा कि जिले में घोरावल और ओबरा तहसील से लगी यूपी-एमपी की सीमा पर सोन नदी में अवैध खनन धड़ल्ले से हो रहा है। कैमूर वन्य जीव अभ्यारण्य के दायरे में होने के बावजूद पाबंदियों की अनदेखी कर खननकर्ता मनमानी कर रहे हैं। मप्र सरकार की ओर से आवंटित पट्टे की आड़ में यूपी सीमा के गांव शिल्पी और कोरट में नदी की धारा रोककर खनन किया जा रहा है। इससे कुड़ारी देवी के प्राचीन मंदिर के ढहने की आशंका है। सोन नदी के दक्षिण क्षेत्र में स्थित औद्योगिक इकाइयों के कारण बढ़ते प्रदूषण पर चिंता जताते हुए कोन ब्लाक के पड़रक्ष और म्योरपुर के डडिहरा में जन्म दिव्यांगता की चर्चा की। दुद्धी में कनहर नदी बन रहे बांध को भी शीघ्र पूरा कराने, कोन ब्लाक के नकतवार में सोन नदी पर पुल निर्माण में अनियमितता दूर कराने और घोरावल के वर्दिया गांव में वर्षों से अधूरे पुल को पूरा कराने की मांग रखी। वन क्षेत्र में हर वर्ष बिजली गिरने से होने वाली घटनाओं से बचाव के लिए पहाड़ों पर ताड़ चालित यंत्र स्थापित करने का भी सुझाव दिया।
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