सोनभद्र के डीएम निलंबित: शासन ने क्यों की ये कार्रवाई, क्या-क्या हैं आरोप, जानिए पूरा मामला
उत्तर प्रदेश सरकार ने गुरुवार को सोनभद्र के जिलाधिकारी टी के शिबू को निलंबित कर दिया। उनपर चुनाव में लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोप हैं।
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आखिरकार विधानसभा चुनाव में की गई लापरवाही और जनता व जनप्रतिनिधियों से दूरी ही जिलाधिकारी टीके शिबू के जाने की वजह बन गई। उन पर भ्रष्टाचार के भी आरोप लगते रहे हैं। जिस पर शासन ने बृहस्पतिवार को उन्हें निलंबित कर राजस्व परिषद कार्यालय लखनऊ से संबद्ध कर दिया। इसके साथ ही मामले की जांच भी वाराणसी मंडल के आयुक्त को सौंप दी। टीके शीबू की जगह चंद्र विजय सिंह को जिले का नया डीएम बनाया गया है।
अपर मुख्य सचिव डॉ. देवेश चतुर्वेदी ने आयुक्त विंध्याचल मंडल मिर्जापुर समेत अन्य अधिकारियों को इस संबंध में पत्र भेजा है। पत्र में लिखा है कि सोनभद्र के डीएम टीके शिबू के विरुद्ध खनन जिला खनिज न्यास समिति और अन्य निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार की शिकायतें जनप्रतिनिधियों ने की थी।
सोनभद्र में आ गई थी मतदान निरस्त होने की स्थिति
विधानसभा चुनाव में भी बतौर जिला निर्वाचन अधिकारी डीएम टीके शिबू ने गंभीर लापरवाही बरती। जिसमें पोस्टल बैलेट पेपर सील न किए जाने से सार्वजनिक स्थल पर हंगामा होने की देशभर में चर्चा हुई। इस वजह से पूरे जिले का मतदान निरस्त होने की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। बाद में मिर्जापुर के कमिश्नर ने जनप्रतिनिधियों को विश्वास में लेकर लिफाफों को दोबारा सील कराकर प्रकरण का निस्तारण किया था।
जनसामान्य और जनप्रतिनिधियों से भी दूरी का आरोप है। कमिश्नर की जांच में अनियमितताओं के लिए टीके शिबू को प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया है। ऐसे में उन्हें तात्कालिक प्रभाव से निलंबित करते हुए उनके विरुद्ध अनुशासनिक कार्यवाही की जाएगी। टीके शिबू 2012 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। उन्हें 23 अक्तूबर 2021 को सोनभद्र के जिलाधिकारी के पद पर तैनात किया गया था।
अवैध खनन पर रोक और राजस्व की वृद्धि नए डीएम के लिए होगी चुनौती
वर्ष 2011 बैच के आईएएस अधिकारी चंद्र विजय सिंह सोनभद्र जिले के 38वें डीएम होंगे। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती जिले के सबसे बड़े खनन उद्योग की गड़बड़ियों को रोकना और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन की स्थापना करना होगी। गिट्टी बालू के अवैध खनन को लेकर जिला पहले भी चर्चा में रहा है।
खनन उद्योग जिले की लाइफ लाइन है तो सरकारी राजस्व का भी बड़ा स्रोत है। निजी फायदे में कायदा बिगाड़ने के कारण ही खनन कारोबारियों और प्रशासनिक अफसरों में टशन होती रही है। टीके शीबू के निलंबन के पीछे भी खनन का खेल मुख्य वजह माना जा रहा है।
चुनाव के दौरान जांच के नाम पर खनन पर रोक, लगातार हुई कार्रवाइयां और फिर चुनाव बीतते ही फिर से हरी झंडी देने के कारण वह काफी चर्चा में रहे। नए डीएम के लिए अवैध खनन रोकना और राजस्व की भरपाई बड़ी चुनौती होगी। इसके साथ ही वनाधिकार पट्टों के मामलों को निर्विवाद ढंग से निपटाना भी चुनौती मानी जा रही है।