{"_id":"6793d4e41a2487ddf10e4b90","slug":"sncu-will-be-operated-in-mayorpur-chc-sonbhadra-news-c-194-1-son1001-123522-2025-01-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sonebhadra News: म्योरपुर सीएचसी में एसएनसीयू का होगा संचालन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sonebhadra News: म्योरपुर सीएचसी में एसएनसीयू का होगा संचालन
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सोनभद्र। आदिवासी क्षेत्र म्योरपुर और अन्य इलाकों में नवजातों को इलाज के अभाव में जान नहीं गवानी होगी। इसके लिए म्योरपुर सीएचसी में एसएनसीयू की स्थापना होगी। इससे गंभीर रूप से बीमार नवजातों के इलाज में सहूलियत होगी। साथ ही शिशु मृत्युदर में कमी आएगी।
म्योरपुर जिले का सबसे दुरुह और पिछड़ा क्षेत्र है। बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव में हर साल कई की जान चली जाती है। इनमें नवजात बच्चे भी शामिल हैं। सीएचसी पर एफआरयू सेंटर भी स्थापित हैं। यहां सिजेरियन प्रसव होता है। इलाके के किसी भी अस्पताल में एसएनसीयू नहीं है। इलाके में जन्म लेने वाले नवजातों की यदि हालत बिगड़ती है तो चिकित्सक जिला अस्पताल के एसएनसीयू में ही भेजते हैं। ऐसे में बेड को लेकर समस्या बनी रहती है। जिला मुख्यालय से दूरी के चलते लोगों को तत्काल बेहतर चिकित्सा भी उपलब्ध नहीं हो पाती। जब तक यहां से नवजात मुख्यालय स्थित अस्पताल पहुंचते हैं, कई बार उनकी स्थिति बेहद बिगड़ चुकी होती है। आदिवासी बहुल क्षेत्र में नवजातों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने के लिए सीएमओ डॉ. अश्वनी कुमार की पहल पर म्योरपुर सीएचसी में एसएनसीयू स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। ऐसे में गंभीर रूप से बीमार नवजातों को तत्काल आपात स्थिति में एसएनसीयू की सुविधा मिल सकेगी। इसके लिए अतिरिक्त चिकित्सक और स्टाफ की तैनाती भी होगी। उपकरणों को स्टाल करने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। फरवरी माह के तीसरे सप्ताह तक इसके संचालन की उम्मीद है।
-- -- -- -
नवजातों को लेकर भटकते हैं लोग
अब तक क्षेत्र के किसी अस्पताल में एसएनसीयू न होने पर परिजन नवजात बच्चों को लेकर 80 से 100 किमी दूर जिला मुख्यालय पहुंचते हैं। इलाज के लिए उन्हें भटकना होता है। हालांकि म्योरपुर में इसकी स्थापना से म्योरपुर सीएचसी के साथ ही सीएचसी बभनी, सीएचसी दुद्धी, संयुक्त चिकित्सालय डिबुलगंज, अनपरा, शक्तिकनगर, बीजपुर सहित अन्य इलाकों को लाभ मिलेगा।
विज्ञापन
-- -- -
नवजातों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के लिए विभाग प्रतिबद्ध हैं। इसी क्रम में म्योरपुर सीएचसी में 12 बेड का एसएनसीयू स्थापित किया जाएगा। इसको लेकर प्रक्रिया अंतिम चरण में है। डॉ. अश्वनी कुमार,सीएमओ।
विज्ञापन
म्योरपुर जिले का सबसे दुरुह और पिछड़ा क्षेत्र है। बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव में हर साल कई की जान चली जाती है। इनमें नवजात बच्चे भी शामिल हैं। सीएचसी पर एफआरयू सेंटर भी स्थापित हैं। यहां सिजेरियन प्रसव होता है। इलाके के किसी भी अस्पताल में एसएनसीयू नहीं है। इलाके में जन्म लेने वाले नवजातों की यदि हालत बिगड़ती है तो चिकित्सक जिला अस्पताल के एसएनसीयू में ही भेजते हैं। ऐसे में बेड को लेकर समस्या बनी रहती है। जिला मुख्यालय से दूरी के चलते लोगों को तत्काल बेहतर चिकित्सा भी उपलब्ध नहीं हो पाती। जब तक यहां से नवजात मुख्यालय स्थित अस्पताल पहुंचते हैं, कई बार उनकी स्थिति बेहद बिगड़ चुकी होती है। आदिवासी बहुल क्षेत्र में नवजातों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने के लिए सीएमओ डॉ. अश्वनी कुमार की पहल पर म्योरपुर सीएचसी में एसएनसीयू स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। ऐसे में गंभीर रूप से बीमार नवजातों को तत्काल आपात स्थिति में एसएनसीयू की सुविधा मिल सकेगी। इसके लिए अतिरिक्त चिकित्सक और स्टाफ की तैनाती भी होगी। उपकरणों को स्टाल करने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। फरवरी माह के तीसरे सप्ताह तक इसके संचालन की उम्मीद है।
विज्ञापन
नवजातों को लेकर भटकते हैं लोग
अब तक क्षेत्र के किसी अस्पताल में एसएनसीयू न होने पर परिजन नवजात बच्चों को लेकर 80 से 100 किमी दूर जिला मुख्यालय पहुंचते हैं। इलाज के लिए उन्हें भटकना होता है। हालांकि म्योरपुर में इसकी स्थापना से म्योरपुर सीएचसी के साथ ही सीएचसी बभनी, सीएचसी दुद्धी, संयुक्त चिकित्सालय डिबुलगंज, अनपरा, शक्तिकनगर, बीजपुर सहित अन्य इलाकों को लाभ मिलेगा।
विज्ञापन
नवजातों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के लिए विभाग प्रतिबद्ध हैं। इसी क्रम में म्योरपुर सीएचसी में 12 बेड का एसएनसीयू स्थापित किया जाएगा। इसको लेकर प्रक्रिया अंतिम चरण में है। डॉ. अश्वनी कुमार,सीएमओ।