{"_id":"597637024f1c1b66278b4570","slug":"shivdwar-on-shivratri","type":"story","status":"publish","title_hn":"शिवद्वार में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शिवद्वार में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
अमर उजाला ब्यूरो, सोनभद्र
Updated Mon, 24 Jul 2017 11:35 PM IST
विज्ञापन
शिवरात्रि पर दर्शन करने पहंुचे लोग
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सावन माह के तीसरे सोमवार को लगभग एक लाख कांवरियों ने शिवद्वार धाम में जलाभिषेक किया। सबसे पहले डाक बम कांवरियों ने शिवद्वार में जलाभिषेक कर पूजन-अर्चन किया। पड़ोसी जनपदों समेत मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार और झारखंड से भी कांवरियों शिवद्वार में पहंुचे।
जिला मुख्यालय राबर्ट्सगंज के दंडईत बाबा मंदिर स्थित शिव मंदिर, वीरेश्वर महादेव मंदिर, सोमनाथ मंदिर, बरैला महादेव मंदिर, कंडाकोट मंदिर पर भक्तों का जलाभिषेक के लिए तांता लगा रहा। भक्तों ने तीसरे सोमवार को बाबा भोलेनाथ को जलाभिषेक कर बेल पत्र, धतुर, मदार, फूल, चावल, रोली, चंदन, मधु, दधि, दुध, फल, मिष्ठान आदि चढ़ाकर विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया।
भक्तों की ओर से जगह-जगह रूद्राभिषेक भी कराया गया। विजयगढ़ किला से नई बाजार, राबर्ट्सगंज, चुर्क, परासी पांडेय, शाहगंज, घोरावल के साथ ही मिर्जापुर से लेकर मड़िहान, कलवारी, जमुई, घोरावल और शिवद्वार तक हर जगह सड़कों पर कांवडिय़ों का ही रेला दिखाई पड़ा। घोरावल से शिवद्वार तक का पूरा क्षेत्र रविवार शाम तक शिवप्रिय भगवा रंग से पट गया और कांवड़िए मंदिर के कपाट खुलने का इंतजार करने लगे।
विज्ञापन
सोमवार को तड़के दो बजे रात्रि में उमामहेश्वर की प्रतिमा का दिव्य शृंगार किया गया और मंगला आरती के बाद मंदिर का कपाट खोल दिया गया। सबसे पहले डाक बम कावरियों ने जलाभिषेक कर पूजन-अर्चन किया। इसके साथ ही कांवरियों और श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। घोरावल नगर के प्राचीन शिव मंदिर, दशामिहवा तालाब के शिव मंदिर, दुर्गा मंदिर समेत विभिन्न मंदिरों में भी भक्तों ने भगवान शिव का दर्शन-पूजन किया।
विज्ञापन
जिला मुख्यालय राबर्ट्सगंज के दंडईत बाबा मंदिर स्थित शिव मंदिर, वीरेश्वर महादेव मंदिर, सोमनाथ मंदिर, बरैला महादेव मंदिर, कंडाकोट मंदिर पर भक्तों का जलाभिषेक के लिए तांता लगा रहा। भक्तों ने तीसरे सोमवार को बाबा भोलेनाथ को जलाभिषेक कर बेल पत्र, धतुर, मदार, फूल, चावल, रोली, चंदन, मधु, दधि, दुध, फल, मिष्ठान आदि चढ़ाकर विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया।
विज्ञापन
भक्तों की ओर से जगह-जगह रूद्राभिषेक भी कराया गया। विजयगढ़ किला से नई बाजार, राबर्ट्सगंज, चुर्क, परासी पांडेय, शाहगंज, घोरावल के साथ ही मिर्जापुर से लेकर मड़िहान, कलवारी, जमुई, घोरावल और शिवद्वार तक हर जगह सड़कों पर कांवडिय़ों का ही रेला दिखाई पड़ा। घोरावल से शिवद्वार तक का पूरा क्षेत्र रविवार शाम तक शिवप्रिय भगवा रंग से पट गया और कांवड़िए मंदिर के कपाट खुलने का इंतजार करने लगे।
विज्ञापन
सोमवार को तड़के दो बजे रात्रि में उमामहेश्वर की प्रतिमा का दिव्य शृंगार किया गया और मंगला आरती के बाद मंदिर का कपाट खोल दिया गया। सबसे पहले डाक बम कावरियों ने जलाभिषेक कर पूजन-अर्चन किया। इसके साथ ही कांवरियों और श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। घोरावल नगर के प्राचीन शिव मंदिर, दशामिहवा तालाब के शिव मंदिर, दुर्गा मंदिर समेत विभिन्न मंदिरों में भी भक्तों ने भगवान शिव का दर्शन-पूजन किया।