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सुनवाई की तिथि तय, आपत्तियां दूर
अमर उजाला ब्यूरो/सोनभद्र
Updated Sat, 21 Jan 2017 11:30 PM IST
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ओबरा और दुद्धी विधानसभा को अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित किए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका पर उठाई गई आपत्तियां दूर हो गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के लिए 27 जनवरी की तिथि भी दे दी है। अब सोमवार को तत्काल सुनवाई के लिए अलग से प्रार्थनापत्र पड़ेगा। इस क्रम में बुधवार को प्रकरण पर सुनवाई की उम्मीद है।
ऐन चुनाव के वक्त अचानक से दुद्धी और ओबरा सीट को एसटी के लिए आरक्षित किए जाने के खिलाफ पंकज कुमार मिश्रा एवं अन्य की तरफ से याचिका दाखिल की गई है। कहा गया है कि चुनाव आयोग ने खुद 15 जून 2015 को केेंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय को पत्र भेज कहा है कि 13 जनवरी 2014 की अधिसूचना को मान्यता देने के लिए राष्ट्रपति का आदेश जरूरी है। पिछले वर्ष फरवरी और अप्रैल में आरटीआई से दिए गए जवाब में भी यहीं जानकारी दी गई। कहा गया कि संविधान के अनुच्छेद 182 और 170 के तहत राष्ट्रपति का आदेश मिलने के बाद ही, अधिसूचना के क्रियान्वयन की स्थिति स्पष्ट हो सकती है। ऐसे में राष्ट्रपति का आदेश मिले बिना अचानक से किस प्रावधान के तहत दोनों सीटें एसटी के लिए आरक्षित कर दी गई, इस पर सवाल उठाया गया है। साथ ही दोनों सीटों का आरक्षण पूर्ववत किए जाने की याचना की गई है। याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कई बिंदुओं पर आपत्ति जताई थी, जिसके निराकरण के बाद सुनवाई करने को कहा था। अधिवक्ता शेखर जी देवासा के मुताबिक सभी आपत्तियां दूर हो गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के लिए 27 जनवरी की तिथि दी है। चूंकि तिथि दूर है, इसलिए इससे पहले सुनवाई के लिए सोमवार को अलग से प्रार्थनापत्र डाला जाएगा।
ऐन चुनाव के वक्त अचानक से दुद्धी और ओबरा सीट को एसटी के लिए आरक्षित किए जाने के खिलाफ पंकज कुमार मिश्रा एवं अन्य की तरफ से याचिका दाखिल की गई है। कहा गया है कि चुनाव आयोग ने खुद 15 जून 2015 को केेंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय को पत्र भेज कहा है कि 13 जनवरी 2014 की अधिसूचना को मान्यता देने के लिए राष्ट्रपति का आदेश जरूरी है। पिछले वर्ष फरवरी और अप्रैल में आरटीआई से दिए गए जवाब में भी यहीं जानकारी दी गई। कहा गया कि संविधान के अनुच्छेद 182 और 170 के तहत राष्ट्रपति का आदेश मिलने के बाद ही, अधिसूचना के क्रियान्वयन की स्थिति स्पष्ट हो सकती है। ऐसे में राष्ट्रपति का आदेश मिले बिना अचानक से किस प्रावधान के तहत दोनों सीटें एसटी के लिए आरक्षित कर दी गई, इस पर सवाल उठाया गया है। साथ ही दोनों सीटों का आरक्षण पूर्ववत किए जाने की याचना की गई है। याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कई बिंदुओं पर आपत्ति जताई थी, जिसके निराकरण के बाद सुनवाई करने को कहा था। अधिवक्ता शेखर जी देवासा के मुताबिक सभी आपत्तियां दूर हो गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के लिए 27 जनवरी की तिथि दी है। चूंकि तिथि दूर है, इसलिए इससे पहले सुनवाई के लिए सोमवार को अलग से प्रार्थनापत्र डाला जाएगा।
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