UP: 10 लाख के इनामी सहित 2 लोगों को उम्रकैद, रुपये के बंटवारे में हुई थी एक की मौत; आतंक का चेहरा था ये नक्सली
सोनभद्र के ब्रह्मोरी निवासी एक शख्स से तहरीर देकर 2009 के 3 दिसंबर को युवक के माैत की जानकारी पुलिस को दी थी। बताया था कि नक्सली रुपये के बंटवारे को लेकर आपस में छीना झपटी कर रहे थे। इस दाैरान गोली लगने से युवक की माैत हो गई।
विस्तार
साढ़े 15 वर्ष पूर्व हुई रामवृक्ष की हत्या के मामले में गुरुवार को कोर्ट ने हार्डकोर नक्सली मुन्ना विश्वकर्मा और अजीत कोल को उम्रकैद की सजा सुनाई। अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम जितेंद्र कुमार द्विवेदी की अदालत ने सुनवाई के दौरान दोनों पर 20-20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया।
साथ ही अर्थदंड न देने पर 4-4 माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। मुन्ना विश्वकर्मा को पहले भी तीन अन्य मामलों में उम्रकैद की सजा हो चुकी है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, कोन थाना क्षेत्र के ब्रह्मोरी निवासी अजय कुमार पासवान ने 3 दिसंबर, 2009 को कोन थानाध्यक्ष को दी तहरीर में अवगत कराया था कि वह चौकीदार का बेटा है। एक दिसंबर की रात करीब 3 बजे भीतरी जंगल में नक्सलियों के दो गुटों के बीच लेबी वसूली और रुपये के बंटवारे को लेकर फायरिंग हुई है।
15 साल बाद मिला न्याय
इसमें एक नक्सली की मौत हो गई। कुछ नक्सली भीतरी जंगल में मौजूद हैं। इस तहरीर पर पुलिस ने अज्ञात में हत्या का केस दर्ज कर मामले की विवेचना शुरू की। घटना स्थल से रामवृक्ष का शव बरामद कर पुलिस ने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
विवेचना के दौरान हार्डकोर नक्सली रॉबर्ट्सगंज के कम्हारीडीह निवासी मुन्ना विश्वकर्मा उर्फ विद्रोही उर्फ रामवृक्ष और चंदौली के नौगढ़ थाना क्षेत्र के सनाइत निवासी अजीत कोल उर्फ बब्बल का नाम प्रकाश में आया। विवेचक ने पर्याप्त सबूत मिलने पर कोर्ट में चार्जशीट दाखिल किया था।
मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्कों को सुनने, गवाहों के बयान व पत्रावली का अवलोकन करने पर दोषी हार्डकोर नक्सली मुन्ना विश्वकर्मा और अजीत कोल को आजीवन कारावास व 20- 20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर 4-4 माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी।